उदयपुरवाटी में भाजपा-कांग्रेस ने उतारे चेयरमैन प्रत्याशी:भाजपा से अनुराधा सैनी और कांग्रेस से रूड़मल सैनी मैदान में, मुकाबला कांटे का
उदयपुरवाटी में भाजपा-कांग्रेस ने उतारे चेयरमैन प्रत्याशी:भाजपा से अनुराधा सैनी और कांग्रेस से रूड़मल सैनी मैदान में, मुकाबला कांटे का
उदयपुरवाटी : नगरपालिका अध्यक्ष पद की कुर्सी पर काबिज होने के लिए राजनीतिक बिसात पूरी तरह बिछ चुकी है। बुधवार को नामांकन प्रक्रिया के अंतिम दिन सियासी पारा अपने चरम पर पहुंच गया। भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस दोनों ही प्रमुख राजनीतिक दलों ने ऐन वक्त पर अपने-अपने प्रत्याशियों के नामों पर मुहर लगाते हुए रिटर्निंग अधिकारी तानियां रिंणवा के समक्ष अधिकृत सिंबल के साथ नामांकन पत्र दाखिल कर दिए। वहीं निर्दलीय प्रत्याशी के मैदान में उतरने से अब चुनावी मुकाबला बेहद दिलचस्प और त्रिकोणीय हो गया है।
शक्ति प्रदर्शन के साथ बीजेपी की अनुराधा ने भरा पर्चा
भारतीय जनता पार्टी ने चुनावी रणनीति के तहत वार्ड संख्या 22 मोहल्ला तामीड़ा निवासी अनुराधा सैनी पत्नी महेश सैनी को मैदान में उतारा है। अनुराधा सैनी ने पार्टी पदाधिकारियों और समर्थकों के भारी हुजूम के साथ रिटर्निंग अधिकारी के समक्ष अपना पर्चा दाखिल किया और बीजेपी का आधिकारिक सिंबल सौंपा। इस दौरान वार्ड संख्या 04 के पार्षद घनश्याम स्वामी उनके प्रस्तावक बने।
कांग्रेस ने रूड़मल सैनी पर खेला दांव
कांग्रेस पार्टी ने गहन मंथन के बाद वार्ड संख्या 06 कुआं गोदुवाला निवासी रूड़मल सैनी पर दांव खेला है। रूड़मल सैनी ने भी दलबल के साथ पहुंचकर अपना पर्चा दाखिल किया और कांग्रेस का अधिकृत सिंबल जमा कराया। कांग्रेस प्रत्याशी के नामांकन में वार्ड 25 की पार्षद सुमन चेजारा ने प्रस्तावक की भूमिका निभाई।

निर्दलीय शिशपाल सैनी ने बढ़ाई हलचल
दोनों प्रमुख दलों के बीच सीधी जंग के बीच वार्ड संख्या 10 कुआं ठठेरावाला निवासी शिशपाल सैनी ने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में नाम निर्देशन पत्र दाखिल कर ताल ठोक दी है। नामांकनों की औपचारिक जांच और प्रत्याशियों की सूची जारी होते ही शहर की चुनावी चौपालों पर गणित लगना शुरू हो गया है।
‘किंगमेकर’ निर्दलीयों के दम पर सत्ता की जंग तेज
उदयपुरवाटी पालिका बोर्ड बनाने के लिए बहुमत का जादुई आंकड़ा जुटाने की कवायद तेज हो गई है। स्पष्ट बहुमत के लिए दोनों ही प्रमुख दलों की नजरें अब निर्दलीय पार्षदों पर टिक गई हैं। निर्दलीय पार्षद इस चुनाव में ‘सत्ता की चाबी’ यानी ‘किंगमेकर’ बनकर उभरे हैं। अपने-अपने पाले में पार्षदों को एकजुट रखने के लिए बाड़ेबंदी और पर्दे के पीछे का सियासी गुणा-गणित चरम पर पहुंच गया है।
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