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खबर छपी… फिर भी नहीं चेती खाकी! खोपड़ी अमर या कानून बेअसर…​सीकर एसपी के सड़क सुरक्षा अभियान की फतेहपुर में खाकी ने एक बार फिर खोली पोल…


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खबर छपी… फिर भी नहीं चेती खाकी! खोपड़ी अमर या कानून बेअसर…​सीकर एसपी के सड़क सुरक्षा अभियान की फतेहपुर में खाकी ने एक बार फिर खोली पोल…

फतेहपुर में दूसरे दिन भी बिना हेलमेट फर्राटे भरते दिखे जवान

जनमानस शेखावाटी सवांददाता : अनिल शेखीसर

​फतेहपुर : आजकल सड़क सुरक्षा का पाठ पढ़ाने वाली खाकी पर खुद ही नियमों की धज्जियां उड़ाने के संगीन आरोप लग रहे हैं। जनमानस शेखावाटी’ में प्रमुखता से खबर प्रकाशित होने के बावजूद लगातार दूसरे दिन भी फतेहपुर शेखावाटी में कुछ बेपरवाह पुलिसकर्मी (होम गार्ड) बिना हेलमेट सड़कों पर फर्राटा भरते दिखाई दिए। खबर के बाद सुधरने के बजाय खाकी वीरों की यह बेफिक्री सीकर पुलिस अधीक्षक के ड्रीम प्रोजेक्ट ‘सड़क सुरक्षा अभियान’ की साख पर सीधे तौर पर सवालिया निशान खड़े कर रही है।

​गौरतलब है कि जनमानस शेखावाटी ने गुरुवार को पुलिसकर्मियों की निजी बाइक (RJ 23 NS 4428) से जुड़े गैर-जिम्मेदाराना रवैये को प्रमुखता से उजागर किया था। जिसमे बाइक का इंश्योरेंस दम तोड़ चुका था और दो पुलिसकर्मी बाइक पर बैठे थे दोनो के ही पास हेलमेट नहीं था उम्मीद थी कि खबर के बाद जिम्मेदार तंत्र हरकत में आएगा और महकमे में अनुशासन का चाबुक चलेगा। लेकिन शुक्रवार को एक बार खाकीधारियों का यही लापरवाह रवैया फतेहपुर की सड़कों पर दोबारा मौत का तांडव मचाते देखने को मिला, जिससे पूरे पुलिस महकमे की भारी फजीहत हो रही है।

बिना हेलमेट के जवान

खोपड़ी अमर’ या कानून बेअसर?
​आम नागरिक जरा सी मजबूरी में बिना हेलमेट दिख जाए, तो पुलिस की चालान मशीनें और जुर्माने का चाबुक तुरंत एक्टिव हो जाता है। लेकिन जब कानून के रखवाले ही यह मान बैठें कि वर्दी पहनते ही उनकी खोपड़ी ‘एक्सीडेंट-प्रूफ’ और ‘अमर’ हो गई है, तो कानून की इकबाल पर सवाल खड़ा होना लाजिम है। शहर में अब यही चर्चा जोरों पर है कि क्या सड़क सुरक्षा का सारा ज्ञान और जुर्माना सिर्फ आम जनता की जेब ढीली करने के लिए है?

कोतवाल के बयान सवालो में…
​थाना अधिकारी महेंद्र मीणा (कोतवाल) फतेहपुर ने दो दिन पहले ही बड़ी-बड़ी बातें करते हुए कहा था कि “समझा-समझकर थक गए हैं, अब जवानों पर सख्त विभागीय कार्रवाई की सिफारिश करेंगे।” उच्चाधिकारी कार्रवाई करेंगे लेकिन 24 घंटे के भीतर सामने आई जमीनी हकीकत ने इन दावों की पूरी हवा निकाल दी है। न तो ढील देने वाले मातहतों के दिल में अपने कप्तान का डर दिख रहा है और न ही नियम तोड़ने वाले सिपाहियों पर अफसरों की किसी चेतावनी का असर हो रहा है। और ना ही कोतवाल की उच्चाधिकारियों वाली बात का असर धरातल पर दिखा

​क्या एसपी का चलेगा कानूनी ‘चाबुक’?
​अब यह पूरा मामला सीधे जिला पुलिस कप्तान (एसपी सीकर) के संज्ञान, इकबाल और त्वरित कार्रवाई की चौखट पर आ खड़ा हुआ है। सवाल यह है कि क्या बार-बार कानून को ठेंगा दिखाने वाले इन वर्दीधारियों पर एसपी सीकर की कार्रवाई होगी? क्या इन अनुशासनहीन जवानों पर वैसी ही निष्पक्ष और नजीर पेश करने वाली विभागीय गाज गिरेगी, जैसी एक आम नागरिक पर गिरती है? पूरी जनता अब इसी कड़े फैसले की राह देख रही है। और एसपी के फैसले का इंतजार कर रही हैं ।

क्या ‘सड़क सुरक्षा अभियान’ के नियम सिर्फ निहत्थी आम जनता पर थोपने के लिए बनाए गए हैं?
​मीडिया में खुलासा होने के बाद भी खुलेआम घूम रहे इन नियम तोड़ने वालों पर अब तक क्या निलंबन या चालान की कार्रवाई हुई?

क्या इन लापरवाह पुलिसकर्मियों का चालान काटकर और विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई कर उसे सार्वजनिक किया जाएगा?
क्या दो दिन पूर्व चली खबर और खाकी ने कोई कार्रवाई की?

​क्या सीकर पुलिस इस मामले में कोई ऐसी सख्त मिसाल कायम करेगी, जिससे यह साबित हो सके कि कानून की नजर में वर्दी और आम नागरिक सब बराबर हैं?
​
​एसपी साहब! आपके सड़क सुरक्षा अभियान की साख और असली परीक्षा अब किसी आम नागरिक के चौराहे पर नहीं, बल्कि आपके अपने ही महकमे के भीतर से शुरू होती है। आम जनता का चालान काटने में चीते जैसी फुर्ती दिखाने वाली व्यवस्था क्या अपने ही नियम तोड़ने वाले जवानों पर विभागीय चाबुक चलाकर तत्काल निलंबित या चालान की कार्रवाई करेगी? या फिर यह गंभीर मामला भी कागजी चेतावनियों और ठंडे बस्ते के बयानों में दबा दिया जाएगा? ये देखना होगा

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