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बीदासर में फूटा जन आक्रोश विद्युत पोल हटाने की मांग पर आमरण अनशन, “एक ही मांग एक ही काम विद्युत पोल हटाओ विभाग” के साथ अनशन शुरू


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बीदासर में फूटा जन आक्रोश विद्युत पोल हटाने की मांग पर आमरण अनशन, “एक ही मांग एक ही काम विद्युत पोल हटाओ विभाग” के साथ अनशन शुरू

पोल बना परेशानी, अब बना जनआंदोलन बुजुर्ग की जिद: समाधान या संघर्ष !

जनमानस शेखावाटी सवांददाता : गजराज शर्मा

बीदासर : विशेष प्रतिनिधि नगर के वार्ड संख्या 03 स्थित चौरडिया चौक में विद्युत पोल की समस्या अब बड़े जनसंघर्ष का रूप ले चुकी है। स्थानीय निवासी रतनलाल चौरडिया ने 28 जून 2026 से आमरण अनशन शुरू कर दिया है। उनका कहना है कि घर के मुख्य द्वार के सामने खड़ा विद्युत पोल न केवल दैनिक जीवन में बाधा उत्पन्न कर रहा है,बल्कि कभी भी बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकता है। मामला तब और गंभीर हो गया जब चौरडिया ने प्रशासन को चेतावनी देते हुए स्पष्ट कहा कि यदि 2 जुलाई 2026 तक पोल नहीं हटाया गया, तो वे आत्मघाती कदम उठाने को मजबूर होंगे।

इस चेतावनी के बाद पूरे क्षेत्र में चिंता और प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है विद्युत पोल घर के मैन गेड़ के सामने खड़ा है। रतनलाल चौरडिया ने बताया कि उन्होंने कई बार लिखित शिकायतें दीं,अधिकारियों से मुलाकात की,लेकिन हर बार फाइल आगे बढ़ाने की बात कहकर टाल दिया गया। जब सुनवाई नहीं हुई, तो मजबूर होकर मुझे यह कदम उठाना पड़ा,” इस मुद्दे ने अब जनआंदोलन का रूप ले लिया है। आसपास के नागरिक, व्यापारी और युवा वर्ग चौरडिया के समर्थन में खुलकर सामने आ गए हैं। लोगों का कहना है कि यह सिर्फ एक व्यक्ति की समस्या नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र की सुरक्षा और सुविधा का सवाल है।

स्थानीय निवासी कहते हैं:
“अगर आज यह पोल नहीं हटाया गया, तो कल किसी बड़े हादसे की जिम्मेदारी कौन लेगा?” प्रशासन पर दबाव, विभाग सक्रिय अनशन की खबर फैलते ही स्थानीय प्रशासन और विद्युत विभाग हरकत में आ गया है।

मानवता बनाम प्रशासनिक लापरवाही
इस पूरे घटनाक्रम ने प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक बुजुर्ग को अपनी मांग मनवाने के लिए आमरण अनशन जैसे कठोर कदम उठाने पड़ रहे हैं, यह अपने आप में व्यवस्था की विफलता को दर्शाता है। चौरड़िया ने कहा की यदि 2 जुलाई 2026 तक विद्युत पोल नही हटाया गया तो रतनलाल चौरडिया आत्महत्या कर लेगे जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी विद्युत विभाग की होगी और मेरे परिवार को एक करोड़ रुपए की सहायता राशि देनी होगी

क्या होगा आगे?
अब निगाहें 2 जुलाई पर टिकी हैं। यदि तय समय सीमा तक समाधान नहीं हुआ, तो स्थिति और गंभीर हो सकती है। जनसमर्थन बढ़ने के साथ यह आंदोलन बड़े स्तर पर फैल सकता है। “यह संघर्ष अब केवल एक पोल हटाने की मांग नहीं, बल्कि आमजन की आवाज बन चुका है-अब फैसला प्रशासन के हाथ में है।”

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