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कुंड निर्माण के नाम पर 15 हजार रुपये लेने का आरोप, 8 साल बाद भी नहीं बना कुंड कलायणसर ग्राम पंचायत का मामला, पीड़ित ने मीडिया से लगाई न्याय की गुहार


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कुंड निर्माण के नाम पर 15 हजार रुपये लेने का आरोप, 8 साल बाद भी नहीं बना कुंड कलायणसर ग्राम पंचायत का मामला, पीड़ित ने मीडिया से लगाई न्याय की गुहार

कुंड निर्माण के नाम पर 15 हजार रुपये लेने का आरोप, 8 साल बाद भी नहीं बना कुंड कलायणसर ग्राम पंचायत का मामला, पीड़ित ने मीडिया से लगाई न्याय की गुहार

जनमानस शेखावाटी सवांददाता : गजराज शर्मा 

बीदासर : ग्राम पंचायत कलायणसर में कुंड निर्माण के नाम पर राशि लेने के बावजूद वर्षों बाद भी निर्माण कार्य नहीं होने का मामला सामने आया है। पीड़ित श्याम दास ने आरोप लगाया है कि वर्ष 2018 में उन्होंने सरकारी योजना के तहत कुंड निर्माण करवाने के लिए ग्राम पंचायत में 15 हजार रुपये जमा करवाए थे, लेकिन आज तक ना तो कुंड का निर्माण हुआ और ना ही उनकी जमा राशि वापस लौटाई गई। श्यामदास ने बताया कि उस समय ग्राम सेवक ने उन्हें भरोसा दिलाया था कि पंचायत की ओर से ठेकेदार भेजकर उनके खेत स्थान पर कुंड का निर्माण करवा दिया जाएगा। सरकारी योजना का लाभ मिलने की उम्मीद में उन्होंने निर्धारित राशि जमा करवा दी, लेकिन समय बीतता गया और काम शुरू तक नहीं हुआ पीड़ित का कहना है कि पिछले करीब 8 वर्षों से वे लगातार ग्राम पंचायत और संबंधित अधिकारियों के चक्कर काट रहे हैं। कई बार मौखिक रूप से शिकायत करने के बावजूद उनकी सुनवाई नहीं हुई। उन्होंने आरोप लगाया कि हर बार उन्हें केवल आश्वासन दिया गया, लेकिन समस्या का समाधान आज तक नहीं किया गया। श्याम दास ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्र में पानी की समस्या को देखते हुए उन्होंने कुंड निर्माण के लिए रुपये जमा करवाए थे ताकि परिवार और पशुओं के लिए पानी की व्यवस्था हो सके, लेकिन योजना का लाभ नहीं मिलने से उन्हें आर्थिक और मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इस मामले को गंभीर बताते हुए प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग की है। यदि किसी व्यक्ति से योजना के नाम पर राशि ली गई है तो या तो कार्य पूरा करवाया जाए या फिर उसकी जमा राशि ब्याज सहित वापस लौटाई जाए। पीड़ित ने जिला प्रशासन एवं संबंधित विभाग के उच्च अधिकारियों से मामले की जांच करवाकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग करते हुए यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो ग्रामीण सामूहिक रूप से आंदोलन का रास्ता भी अपना सकते हैं।

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