[pj-news-ticker post_cat="breaking-news"]

विद्युत विभाग की ‘चमत्कारी सीढ़ी’ : जहाँ गाड़ियां बनती हैं सीढ़ियां और लाइनमैनों की जान है दांव पर!


निष्पक्ष निर्भीक निरंतर
  • Download App from
  • google-playstore
  • apple-playstore
  • jm-qr-code
X
टॉप न्यूज़फतेहपुरराजस्थानराज्यसीकर

विद्युत विभाग की ‘चमत्कारी सीढ़ी’ : जहाँ गाड़ियां बनती हैं सीढ़ियां और लाइनमैनों की जान है दांव पर!

सेफ्टी नियम केवल कागजों पर? फतेहपुर में 'मौत' को दावत देता सरकारी सिस्टम

जनमानस शेखावाटी सवंददाता : आबिद खान

​फतेहपुर : वह दिन दूर नहीं जब सीकर के फतेहपुर विद्युत विभाग को उसकी ‘चमत्कारी’ तकनीकों के लिए विश्व स्तर पर सम्मानित किया जाएगा! जहाँ एक तरफ डिस्कॉम के ‘वातानुकूलित कमरों’ में बैठे उच्चाधिकारी सुरक्षा (Safety) को लेकर भारी-भरकम ‘फरमान’ और ‘गाइडलाइन्स’ जारी कर अपनी ज़िम्मेदारी से पल्ला झाड़ लेते हैं, वहीं दूसरी तरफ फतेहपुर ग्रामीण शाखा के ‘साहसी’ अधिकारी और कर्मचारी इन नियमों की सरेआम धज्जियां उड़ाने में लगे हैं। यहाँ सेफ्टी का मतलब शायद ‘कागजी खानापूर्ति’ तक ही सीमित रह गया है।

​गाड़ी बनी सीढ़ी: जुगाड़ का अनोखा नमूना!
​ताजा मामला फतेहपुर बिजली विभाग की ग्रामीण शाखा का सामने आया है, जहां लाइन मेन का नाम अमित जोया बताया जा रहा हैं। जिसे देखकर कोई भी हैरान रह जाए। नियम कहते हैं कि हर विभागीय वाहन पर एक सुरक्षित सीढ़ी होना अनिवार्य है, लेकिन यहाँ की कलाकारी देखिए! यहाँ एक लाइनमैन एफआरटी (FRT) वाहन को ही ‘चमत्कारी सीढ़ी’ बनाकर काम करता हुआ नजर आया। क्या बात है! यह वो अद्भुत ‘फतेहपुर मॉडल’ है, जहाँ जुगाड़ के आगे नियम भी पानी भरते हैं और अधिकारी अपनी पीठ थपथपाते हैं।

विद्युत विभाग की ‘चमत्कारी सीढ़ी’

​शहादत’ का इंतज़ार? मौत का मंज़र कोई नया नहीं
​विभाग का यह ‘लापरवाह’ रवैया तब है जब फतेहपुर बिजली विभाग में काम करने वाले कई लाइनमैन पहले ही ‘करंट’ का शिकार होकर अपनी जान गँवा चुके हैं। और कई झुलस चुके हैं। लेकिन विभाग के अधिकारी शायद किसी और बड़ी ‘शहादत’ का इंतज़ार कर रहे हैं! उन पूर्व मौतों से कोई सबक सीखने के बजाय, फतेहपुर बिजली विभाग ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि उनके लिए कर्मचारी की जान उनकी नजर में ‘दो कौड़ी’ की भी नहीं है। क्या विभाग का यही असली चेहरा है?

​साहब’ बेखबर!
क्या यह ‘खूनी लापरवाही’ जारी रहेगी? ​इतनी बड़ी लापरवाही अधिकारियों की नाक के नीचे से गुजरती है, लेकिन ‘साहब’ तो बेखबर हैं। क्या निगम के अधिकारी केवल बेबस जनता को बिजली चोरी के नाम पर डराने के लिए हैं, वीसीआर भरने के लिए हैं। या फिर उन अधिकारियों को अपनी जान जोखिम में डालकर काम कर रहे कर्मचारियों की भी कोई चिंता है?

​बड़ा सवाल यह है: क्या प्रशासन किसी और बड़ी दुर्घटना के बाद ही हरकत में आएगा? या फिर बिजली विभाग अपनी ‘चमत्कारी’ तकनीकों को आगे बढ़ाता रहेगा? यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या सीकर के ‘उच्चाधिकारी’ इस ‘खूनी लापरवाही’ पर कोई संज्ञान लेते हैं या फिर फतेहपुर बिजली विभाग की यह ‘तानाशाही’ यूँ ही जारी रहेगी।

​विभाग की ‘जुगाड़ इंजीनियरिंग’ का जलवा!

​विद्युत विभाग की यह ‘जुगाड़ इंजीनियरिंग’ वाकई काबिले-तारीफ है! जहाँ दुनिया सुरक्षा मानकों की रट लगाए बैठी है, वहीं फतेहपुर के जांबाज अधिकारी अपने कर्मचारियों की जान जोखिम में डालकर ‘मौत का खेल’ रच रहे हैं। सरकारी फाइलों में चमकती गाइडलाइन्स और धरातल पर दौड़ती गाड़ियों की यह सीढ़ी-नुमा कलाकारी विभाग की उस ‘खोखली संवेदनशीलता’ को बयां करती है, जहाँ कर्मचारियों की जान का मोल महज एक ‘दुर्घटना’ के आंकड़े से अधिक कुछ भी नहीं है। क्या अधिकारी किसी और ‘शहादत’ के बाद ही नींद से जागेंगे? ये देखना होगा।

Related Articles