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विशेष रिपोर्ट – जरा याद करो कुर्बानी…शपथ तक का राष्ट्रवाद ? शून्य खड़ा तिरंगे का पोल, मौन खड़ा तंत्र


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विशेष रिपोर्ट – जरा याद करो कुर्बानी…शपथ तक का राष्ट्रवाद ? शून्य खड़ा तिरंगे का पोल, मौन खड़ा तंत्र

​तिरंगे के नीचे शपथ लेने वालों की आंखें बंद..? ​पुलिस थानों के मुख्य द्वार के पास लगे डंडे से झंडा गायब...

जनमानस शेखावाटी सवंददाता : ​आबिद खान

फतेहपुर : ​एक ओर जहाँ तिरंगे को राष्ट्रीय ध्वज का सर्वोच्च सम्मान दिया जाता है, और हमारी सेना के जांबाज शहीद होने के बाद इसी तिरंगे में लिपटकर घर आते हैं, वहीं दूसरी ओर फतेहपुर में सिस्टम की नाक के नीचे राष्ट्रीय अस्मिता का अपमान हो रहा है। पुलिस थानों और एसडीएम कार्यालय से महज 300 मीटर के दायरे में लगा ‘हाई मास्ट’ पोल आज राष्ट्रध्वज विहीन खड़ा है। लाखों रुपए की लागत से फतेहपुर के गौरव को बढ़ाने के लिए लगाया गया यह तिरंगा आज भ्रष्टाचार और प्रशासनिक अनदेखी की भेंट चढ़ चुका है। जिम्मेदार कुंभकर्णी नींद में हैं, और गौरव का प्रतीक माना जाने वाला पोल आज शून्य खड़ा व्यवस्था को मुंह चिढ़ा रहा है। ​

खाली पड़ा पोल

“जिस तिरंगे के सम्मान में फौजी भाई सरहद पर सीना तानकर खड़े रहते हैं और शहीद होने पर वही तिरंगा उनकी अंतिम विदाई का एकमात्र सहारा होता है, उसी तिरंगे को फतेहपुर के गलियारों में सरेआम अपमानित किया जा रहा हैं। क्या हमारे साहबों की वर्दी पर लगे सितारे , तिरंगे के सम्मान और फौजी भाईयो की भावनाओ से भी बड़े हो गए हैं।?

पूर्व में फटा था राष्ट्रीय ध्वज

​प्रशासन के सभी दफ्तर आसपास, फिर भी तिरंगा गायब…
हैरानी की बात यह है कि जिस स्थान पर यह पोल लगा है, वहाँ से 100 मीटर के दायरे में कोतवाली थाना, सदर थाना, हैं तो वही 300 मीटर के दायरे में तहसीलदार कार्यालय, एसडीएम कार्यालय, जलदाय, वन और बिजली विभाग के आला अधिकारियों के महत्वपूर्ण दफ्तर स्थित हैं। क्षेत्र के तमाम आला अधिकारी प्रतिदिन इसी रास्ते से गुजरते हैं, लेकिन क्या वजह है कि उनकी नजर इस सूने पोल पर नहीं पड़ती? क्या यह महज लापरवाही है या राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति संवेदनहीनता की पराकाष्ठा? जिस राष्ट्रध्वज की सुरक्षा और सम्मान का जिम्मा प्रशासन सहित हम सब पर है, क्या उसी को ‘अनदेखा’ करना अब नया दस्तूर बन गया है?
जो अधिकारी इस पोल के नीचे से रोज गुजरते हैं, उन्हें उस खाली पोल को देखकर शर्म आखिर क्यों नहीं आती? काश, ये पोल बोल पाता तो शायद अपनी दुर्दशा पर आंसू बहाकर प्रशासन की इस गहरी नींद को हिला देता।”

​लाखों का टेंडर,.. गोलमाल? पार्षद ने सदन में उठाया था मुद्दा, फिर भी प्रशासन मौन आयुक्त पर लगे गंभीर आरोप…

जब हमारी टीम मामले की तह में पहुंची तो भ्रष्टाचार की बू आने लग गई?
प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस तिरंगे और पोल का टेंडर 11/08/2023 को 17 लाख 74 हजार रुपए में हुआ था, जिसका वर्क ऑर्डर 1 मार्च 2025 को 14 लाख 94 हजार 269 रुपए में जारी किया गया। नियमानुसार कार्य पूर्ण करने की अंतिम तिथि 31/05/2025 थी, मगर कथित तौर पर नगर परिषद आयुक्त और ठेकेदार की ‘जुगलबंदी’ के चलते इसे 7 माह की देरी से लगाया गया। नियम कहते हैं कि देरी पर 10% पेनल्टी लगनी चाहिए, लेकिन यहाँ कानून को ताक पर रख दिया गया। निर्दलीय पार्षद इस्माइल खान ने सदन में पुरजोर तरीके से आवाज उठाते हुए नगर परिषद आयुक्त अनिता खीचड़ पर गंभीर आरोप लगाए थे। आरोप है कि यह कार्य ‘पसंदीदा’ कंपनी एसएस कंस्ट्रक्शन से कराया गया पार्षद ने आरोप लगाया हैं संबंधित कंपनी में मेडम की हिस्सेदारी हैं। और अब यह मामला गंभीर जांच का विषय बन गया है कि इस मेहरबानी के पीछे की असली वजह क्या है? पार्षद ने यह भी आरोप लगाए हैं कि तिरंगा लगने के एक माह बाद ही फट गया था बावजूद इसके आयुक्त मेडम ने कंपनी को रनिंग बिल का भुगतान भी कर दिया था और ना तो पेनल्टी काटी और ना ही दुबारा तिरंगा लगवाया गया उल्लेखनीय हैं कि संबंधित आयुक्त पर कई बार ट्रेपिंग जैसी कार्रवाई की खबरे काफी बार वायरल हो चुकी हैं।

​फटा तिरंगा उतारा, सम्मान चढ़ाया भ्रष्टाचार की भेंट?

स्थानीय सूत्रों और पार्षद के अनुसार, शुरुआत में घटिया गुणवत्ता वाले कपड़े का तिरंगा लगाया गया था, जो एक माह के अंदर फट गया था । फटे हुए तिरंगे का लहराना सीधे तौर पर ‘फ्लैग कोड ऑफ इंडिया’ का उल्लंघन और राष्ट्रध्वज का अपमान है। जब इस मामले को पार्षद इस्माइल खान ने आवाज दी तो सोशल मीडिया पर जनता का आक्रोश बढ़ने लगा, जिसके बाद प्रशासन ने तिरंगा बदलवाने के बजाय उसे उतारना ही उचित समझा। आरोप है कि कंपनी ने बेहद हल्के और घटिया स्तर के कपड़े का इस्तेमाल किया, जिसके कारण यह स्थिति बनी। यह सीधे तौर पर सरकारी धन का दुरुपयोग और राष्ट्रीय गरिमा के साथ खिलवाड़ है।

नगर परिषद का वर्क ऑर्डर.

​अधिकारियों की चुप्पी, खड़े कर रही गंभीर सवाल

जब इस गंभीर मामले पर जन मानस शेखावाटी की टीम ने एसडीएम और नगर परिषद आयुक्त से उनका पक्ष जानना चाहा, तो उन्होंने बात करना मुनासिब नहीं समझा।

  • अधिकारियों की यह चुप्पी कई संदेहों को जन्म देती है। क्या प्रशासन के पास इस लापरवाही का कोई जवाब नहीं है?
  • ​सवाल बड़ा है..! जिस तिरंगे के नीचे खड़े होकर एसडीएम और थाना प्रभारी संविधान की शपथ लेते हैं, क्या उनकी जिम्मेदारी सिर्फ उस शपथ तक ही सीमित है?
  • अपनी नाक के नीचे से गायब तिरंगा और खाली खड़ा पोल क्या इन अधिकारियों की कार्यशैली पर सवालिया निशान नहीं है?
  • अगर सिस्टम राष्ट्रीय ध्वज के सम्मान की रक्षा नहीं कर सकता, तो आम जनता की सुरक्षा और न्याय की उम्मीद किससे की जाए?
  • प्रशासन की यह ‘मौन स्वीकृति’ आने वाले समय में बड़ी जांच का आधार बन सकती है।

अब देखना होगा कि जिला कलेक्टर और एसपी सीकर संबंधित मामले में क्या कार्रवाई करते हैं।

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