[pj-news-ticker post_cat="breaking-news"]

पराली से रोशन हो रहा झुंझुनूं:हर महीने बन रही 1 करोड़ यूनिट से ज्यादा ‘ग्रीन बिजली’, झुंझुनूं का यह मॉडल पूरे प्रदेश के लिए एक मिसाल


निष्पक्ष निर्भीक निरंतर
  • Download App from
  • google-playstore
  • apple-playstore
  • jm-qr-code
X
झुंझुनूंटॉप न्यूज़राजस्थानराज्य

पराली से रोशन हो रहा झुंझुनूं:हर महीने बन रही 1 करोड़ यूनिट से ज्यादा ‘ग्रीन बिजली’, झुंझुनूं का यह मॉडल पूरे प्रदेश के लिए एक मिसाल

पराली से रोशन हो रहा झुंझुनूं:हर महीने बन रही 1 करोड़ यूनिट से ज्यादा 'ग्रीन बिजली', झुंझुनूं का यह मॉडल पूरे प्रदेश के लिए एक मिसाल

झुंझुनूं : आमतौर पर खेती का वेस्टेज यानी ‘पराली’ किसानों और पर्यावरण के लिए एक बड़ी समस्या मानी जाती है, लेकिन झुंझुनूं जिले ने इस समस्या को ही अपनी सबसे बड़ी ताकत बना लिया है। जिले में मंड्रेला रोड पर लगा एक आधुनिक बायोमास पावर प्लांट अब पराली से बड़े पैमाने पर बिजली का उत्पादन कर रहा है। यह प्लांट न सिर्फ जिले की बिजली की जरूरतों को पूरा कर रहा है, बल्कि प्रदूषण को कम करने में भी वरदान साबित हो रहा है।

​हर महीने 1 करोड़ 5 लाख यूनिट बिजली का उत्पादन

​अजमेर विद्युत वितरण निगम झुंझुनूं के अधीक्षण अभियंता (SE) महेश टीबड़ा ने बताया कि जिले के लिए यह एक बहुत बड़ा अचीवमेंट है। इस बायोमास आधारित प्लांट से हर महीने लगभग 1 करोड़ 5 लाख यूनिट बिजली का शानदार प्रोडक्शन हो रहा है।

मंड्रेला में लगे प्लांट में हर महीने 1 करोड़ यूनिट बिजली बन रही है (फाइल फोटो)
मंड्रेला में लगे प्लांट में हर महीने 1 करोड़ यूनिट बिजली बन रही है (फाइल फोटो)

प्रदूषण भी खत्म और बिजली भी मुफ्त जैसी

​इस प्लांट की सबसे खास बात इसकी कार्यप्रणाली है। खेतों में फसल कटाई के बाद जो पराली या कृषि अवशेष बच जाते हैं, उन्हें इस प्लांट में लाकर सुरक्षित तरीके से जलाया जाता है और उससे बिजली तैयार की जाती है।

खेती के वेस्टेज यानी पराली से सुरक्षित तरीके से बिजली बनाई जा रही है
खेती के वेस्टेज यानी पराली से सुरक्षित तरीके से बिजली बनाई जा रही है

​अधीक्षण अभियंता (SE), महेश टीबड़ा ने बताया कि

इस तकनीक से जिले को दोहरा फायदा मिल रहा है। पहला यह कि खेतों में पराली जलाने से होने वाला प्रदूषण अब पूरी तरह नियंत्रित हो गया है, और दूसरा, उसी वेस्टेज का इस्तेमाल करके हमें भारी मात्रा में बिजली मिल रही है। यह जिला प्रशासन और बिजली निगम की एक बहुत बड़ी और सफल योजना है।

जिले की आत्मनिर्भरता में बड़ा कदम

​इस बायोमास प्लांट के सुचारू रूप से चलने के बाद से झुंझुनूं में बिजली की पारम्परिक निर्भरता कम हुई है। SE टीबड़ा ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले कृषि कचरे को अब एक उपयोगी संसाधन में बदल दिया गया है, जिससे स्थानीय किसानों को भी अपने कृषि वेस्टेज का सही निस्तारण करने का जरिया मिल गया है। बिजली उत्पादन के क्षेत्र में झुंझुनू का यह मॉडल पूरे प्रदेश के लिए एक मिसाल बन रहा है।

Related Articles