फतेहपुर की सड़कों पर निजी स्कूलों का ‘खूनी खेल’; वर्दी की खामोशी के बीच रॉन्ग साइड में दौड़ रहा मासूमों का भविष्य!
कहीं बीडी सिगरेट की कश लगाते दिखे चालक तो कही सड़क पर खेलते दिखे नोनिहाल, हेलमेट पर सख्ती स्कूली वाहनों पर भक्ति...?
जनमानस शेखावाटी सवांददाता : अनिल शेखीसर
फतेहपुर शेखावाटी : फतेहपुर शेखावाटी की सड़कों पर इन दिनों निजी स्कूलों की बसों का जो नजारा देखने को मिल रहा है, वह न केवल हैरान करने वाला है, बल्कि मासूम बच्चों की सुरक्षा के साथ सरेआम खिलवाड़ है। आज सुबह जब हमारी टीम ने इन स्कूल बसों की जमीनी हकीकत का जायजा लिया, तो जो सच सामने आया, वह रोंगटे खड़े कर देने वाला था। यहाँ स्कूल प्रबंधन की घोर लापरवाही, ड्राइवरों की जानलेवा मनमानी और स्थानीय पुलिस व परिवहन विभाग की कुंभकर्णी नींद का ऐसा कॉकटेल दिख रहा है, जो किसी बड़ी अनहोनी को खुला न्योता दे रहा है।
तस्वीरें साफ गवाही दे रही हैं कि कानून का खौफ पूरी तरह खत्म हो चुका है। पहली तस्वीर में डेफोडिल स्कूल बस का ड्राइवर अपनी बेशर्मी की हदें पार करता नजर आया। ट्रैफिक नियमों को दरकिनार कर बस को गलत दिशा में पार्क करना तो जैसे इनकी आदत बन चुका है, लेकिन हद तब हो गई जब ड्राइवर साहब मासूम बच्चों को सड़क पर भगवान भरोसे छोड़कर बड़ी शांति से बीड़ी-सिगरेट का कश लगाने में मशगूल दिखे। इन ‘धुआं उड़ाते’ उस्तादों को देखकर लगता है जैसे बच्चों को सुरक्षित घर पहुंचाना नहीं, बल्कि सड़क पर कश लगाना ही इनकी पहली योग्यता है। क्या स्थानीय पुलिस प्रशासन को सड़कों पर रेंगती यह सुनहरी लापरवाही नजर नहीं आती, या फिर ‘सुविधा शुल्क’ के चश्मे ने उनकी आंखों की रोशनी धुंधली कर दी है?

क्या यही वह ‘सुरक्षित वातावरण’ है जिसका दावा स्कूल प्रबंधन अपने भारी-भरकम विज्ञापनों में करता है?
लापरवाही का अगला खतरनाक उदाहरण शास्त्री स्कूल का है। यहाँ के ड्राइवर महोदय को चंद मीटर की दूरी और थोड़ा सा डीजल बचाने की इतनी जल्दी है कि वे बच्चों की जान को हथेली पर रखकर व्यस्त सड़क पर बस को बहादुरी से गलत दिशा (रॉन्ग साइड) में दौड़ा रहे हैं। वहीं विनायक स्कूल की बस का कारनामा तो और भी हैरान करने वाला है। इन्होंने कानून और व्यवस्था के प्रति अपने दुस्साहस का परिचय देते हुए सीधे हमारे पत्रकार की गाड़ी के सामने ही गलत दिशा में बस अड़ा दी। इन्हें अच्छी तरह पता है कि खाकी वर्दी और आरटीओ साहब से फतेहपुर पुलिस की मेहरबानी जब तक इनके साथ है, इनका कोई बाल भी बांका नहीं कर सकता। सरेआम नियमों की धज्जियां उड़ाती ये बसें यह साबित करने के लिए काफी हैं कि शहर में यातायात व्यवस्था को संभालने वाली पुलिस और मोटर वाहन अधिनियम की दुहाई देने वाला परिवहन विभाग सिर्फ कागजी घोड़े दौड़ाने और मूकदर्शक बने रहने के लिए ही तनख्वाह उठा रहा है।

यह सिर्फ यातायात नियमों का सामान्य उल्लंघन नहीं है, बल्कि यह अभिभावकों के भरोसे का कत्ल और सुप्रीम कोर्ट द्वारा स्कूल बसों के लिए जारी की गई सुरक्षा गाइडलाइंस की सीधी अवहेलना है। स्कूल प्रशासन और स्थानीय पुलिस यह अच्छी तरह ध्यान रखें कि सड़क पर वे केवल गाड़ी नहीं, बल्कि इस देश का भविष्य लेकर चल रहे हैं। यदि पुलिस प्रशासन और परिवहन विभाग ने अपनी सुस्ती छोड़कर इन ‘बेलगाम’ बसों, उनके फिटनेस सर्टिफिकेट्स और नशेड़ी व लापरवाह ड्राइवरों पर तुरंत सख्त कानूनी कार्रवाई नहीं की, तो किसी बड़ी दुर्घटना के बाद इसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी। क्या पुलिस और आरटीओ विभाग किसी मासूम की लाश गिरने के बाद ही अपनी इस गहरी और आरामदायक नींद से जागेंगे? समय रहते इस ‘सड़क तंत्र’ के गुंडाटैक्स और लापरवाही पर कानूनी हंटर चलाने की सख्त जरूरत है।
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