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गोपालपुरा की हरीतिमा ढाणी में हुआ पौधारोपण


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गोपालपुरा की हरीतिमा ढाणी में हुआ पौधारोपण

महिलाओं ने लोकगीतों और नृत्य के साथ प्रकृति संरक्षण का लिया संकल्प

जनमानस शेखावाटी सवांददाता : गजराज शर्मा

बीदासर : बीदासर के निकटवती गांव गोपालपुरा स्थित हरीतिमा ढाणी में पौधारोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में पंचायत की प्रशासक एवं निवर्तमान सरपंच सविता राठी के नेतृत्व में ग्रामीण महिलाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। महिलाओं ने लोकगीत गाते हुए और पारंपरिक नृत्य प्रस्तुत करते हुए पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया तथा प्रकृति को बचाने का सामूहिक संकल्प लिया। इस अवसर पर प्रशासक सविता राठी ने कहा कि गोपालपुरा में लंबे समय से स्वच्छता एवं पर्यावरण संरक्षण को लेकर लगातार अभियान चलाए जा रहे हैं।

गांव को स्वच्छ एवं सुंदर बनाने के उद्देश्य से प्लास्टिक मुक्त अभियान भी संचालित किया जा रहा है, जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। उन्होंने कहा कि ग्रामीणों के सहयोग से गांव आज साफ-सुथरा और स्वच्छ वातावरण वाला क्षेत्र बन चुका है।राठी ने बताया कि पंचायत द्वारा ग्रामीण महिलाओं की सक्रिय भागीदारी से हरीतिमा ढाणी में हजारों पौधे लगाए गए हैं। इन पौधों के संरक्षण और नियमित देखभाल के कारण क्षेत्र में हरियाली बढ़ी है तथा वातावरण शुद्ध हुआ है।

उन्होंने उपस्थित महिलाओं से जल संरक्षण पर विशेष ध्यान देने का आग्रह करते हुए कहा कि पानी की प्रत्येक बूंद अमूल्य है, इसलिए पानी का दुरुपयोग रोकना हम सभी की जिम्मेदारी है। साथ ही उन्होंने लोगों को भी जल संरक्षण के प्रति जागरूक करने का आह्वान किया।उन्होंने बताया कि पंचायत द्वारा पूरे गांव की दीवारों पर पारंपरिक मांडणा कला को बढ़ावा देने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इससे गांव की सांस्कृतिक पहचान मजबूत होगी और गोपालपुरा की सुंदरता में भी वृद्धि होगी।कार्यक्रम के दौरान खेताराम, तिलोकाराम एवं गोपाल ने व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी संभाली।

कार्यक्रम का सफल संचालन एलडीसी ज्योति कछावा के नेतृत्व में किया गया। वहीं आचू, कमली, भंवरी, संतोष, ग्यारसी, सोहनी, नानुड़ी सहित अनेक महिलाओं ने लोकगीतों की प्रस्तुतियों के साथ पारंपरिक नृत्य कर कार्यक्रम को उत्सवमय बना दिया। इस अवसर पर लोगों ने अधिक से अधिक पौधे लगाने, उनका संरक्षण करने तथा पर्यावरण संतुलन बनाए रखने का संकल्प लिया। कार्यक्रम ने ग्रामीण क्षेत्र में पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ सामुदायिक सहभागिता का भी उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया।

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