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आचार्य महाश्रमण का 65 जन्म दिवस बडे उत्साह के साथ मनाया


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आचार्य महाश्रमण का 65 जन्म दिवस बडे उत्साह के साथ मनाया

आचार्य महाश्रमण का 65 जन्म दिवस बडे उत्साह के साथ मनाया

जनमानस शेखावाटी सवंददाता : गजराज शर्मा

बीदासर : थान सुथान भवन मे युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रम की सुशिष्या साध्वी मंजुयशा के पावन सान्निध्य में आचार्य श्री महाश्रमण का 65 वां जन्मोत्सव 17 वां पट्टोत्सव एवं 53 वां दिक्षा दिवस यह त्रिआयामी कार्यकम आयोजित हुआ। बड़े ही उत्साह के साथ मनाया गया। कार्यक्रम का प्रारंभ साध्वी श्री ने नमस्कार महामंत्र के मंगल उच्चारण से किया। सामूहिक पार्श्वनाथ स्तुति का संगान किया गया।

तेरापथं सभा के मंत्री हनुमानमल सेठिया ने अपने आराध्य के प्रति दीर्घायू की मंगलकामना करते हुए कहा-भारत की इस पुण्य धरा पर अनेक महापुरुष हुए है जिन्होंने अपने पुरुषार्थ एवं पराक्रम, श्रद्धा एवं श्रम से, वाणी और व्यवहारसे, शिक्षा व संस्कार से, संयम व सादगी से त्याग व तपस्या से विनय और समर्पण भाव से सेवा एवं स्वाध्याय से अपने जीवन को अध्यात्म के पथ पर प्रशस्त किया। उन्हीं महापुरुषो में आचार्य महाश्रमण का नाम भी गौरवान्वित हुआ है। आपका जन्म चूस जिले के क्षेत्र सरदारशहर में हुआ माता पिता से अच्छे धार्मिक संस्कारों का सिंचन प्राप्तकर मात्र 12 वर्ष की आयु में दीक्षित हुए। मुनि सुमेरमल स्वामी लाडनूं ने आपने आपको सरदारशहर में ही विशाल जनमेदनी की उपस्थिति में गुरु आज्ञा से संयम प्रदान किया।

दीक्षित होने के बाद उन्होंने गुरु दर्शन कर आपको श्री चरणों में समर्पित कर दिया तब से ही आपके उपर गुरु दृष्टि टिक गई। आचार्य तुलसी एवं आचार्य महाप्रज्ञ की पावन्‌ सान्दिय में अपनी आत्म साधना करते हुए संघीय कार्यों में भी आपको जोड़ दिया गया। आपकी अप्रमत्तता, जागरुकता, सेवाभावना समर्पण निष्ठा संघनिष्ठा, गुरुमिष्ठा आचारनिष्ठा, भयर्यात निष्ठा, कर्तव्य निष्ठा व श्रमनिष्ठा ने गुरुओं के दिल में एक अनुण स्थान बना दिया।

योगक्षेम वर्ष में आपको महाश्रमण सम्मान से सम्मानित किया आचार्य महाप्रज्ञ आपके प्रखर व्यक्तित्व को देख युवाचार्य पद पर सुशोभित किया।इस अवसर पर साध्वी चिन्मयप्रभा, साध्वी इन्द्रप्रभा, तीर्थप्रभा एवं मानसप्रभा द्वारा “एक्सीलेंसी अर्वाड का रोचक कार्यक्रम प्रस्तुत किया। शासन रमावनी, साध्वी जयन्तयशा तेरापंथ महिला मण्डल की अध्यक्षा मंजू बौथरा ,शान्तिदेनी, पूनमचन्द सिंघवी, सरोज देवी वैद, , दानमल बांठिया, नवदीप बैगानी, ज्ञानशाला की ज्ञानार्थी माही बैगानी आदि सभी ने आचार्यप्रवर की गीत कविता भाषण आदि द्वारा अभ्यर्थना की।

एक सुमधुर ने शासन यशोमनि द्वारा रचित गीत का मधुर संगान किया। कार्यक्रम का संयोजन साध्वी चिन्मयप्रभा जी ने बड़े व्यवस्थित रूप से किया। भाई बहनों की उपस्थिति अच्छ सराहनीय रही। मंगळपान से कार्यकम सानन्द संपन्न हुआ ।आचार्य प्रवर की गीत कविता भाषण आदि द्वारा अभ्यर्थना की। साध्वी वृंद ने एक सुमपुर ने शासन यशोमती द्वारा रचित गीत का मधुर संगान किया। कार्यक्रम का संयोजन साध्वी चिन्मयप्रभा ने बड़े व्यवस्थित रूप से किया। भाई बहनों की उपस्थिति अच्छा सराहनीय रही। मंगलपाठ से कार्यकम सानन्द संपन्न हुआ।

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