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हरितवाल के लेख इतिहासकारों में हो रहे प्रसिद्ध


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हरितवाल के लेख इतिहासकारों में हो रहे प्रसिद्ध

हरितवाल के लेख इतिहासकारों में हो रहे प्रसिद्ध

खेतड़ी : रीढ़ का टीला उत्खनन के संदर्भ में वरिष्ठ पत्रकार एवं इतिहासकार गोविंद राम हरितवाल का लेख इन दिनों इतिहासकारों और आमजन के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। इस महत्वपूर्ण आलेख को आपणी बबाई यूट्यूब चैनल, खेतड़ी से प्रकाशित वीर वीरांगना, खेतड़ी नगर से प्रकाशित शेखावाटी जनमानस, नीमकाथाना से प्रकाशित मॉर्निंग मैसेज, सीकर से प्रकाशित चमकता राजस्थान तथा क्राइम न्यूज़ चैनल द्वारा प्रसारित कर व्यापक स्तर पर लोगों तक पहुंचाया गया है।

लेख के माध्यम से क्षेत्र के प्राचीन ऐतिहासिक तथ्यों को सामने लाने के लिए हरितवाल ने सभी समाचार माध्यमों की संपादकीय टीम का आभार व्यक्त किया है। आलेख के प्रकाशन और प्रसारण के बाद इतिहासकारों, पुरातत्वविदों और पाठकों की ओर से सकारात्मक प्रतिक्रियाएं मिल रही हैं, जिसमें इसे क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक पहल बताया गया है।

पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग राजस्थान, जयपुर के पुरान्वेषण एवं उत्खनन अधिकारी डॉ विवेक शुक्ला ने अपनी टिप्पणी में कहा कि रीढ़ का टीला पुरास्थल शेखावाटी क्षेत्र के इतिहास को समझने में मील का पत्थर साबित होगा। उन्होंने हरितवाल के प्रयासों को पुरातात्विक शोध को जनमानस तक पहुंचाने में अत्यंत महत्वपूर्ण बताया।

वहीं डॉ दीपक ने इसे अनुकरणीय कार्य बताते हुए भविष्य में अपनी टीम के साथ इस स्थल का निरीक्षण करने की बात कही। प्रोफेसर रविंद्र कुमार शर्मा ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि बबाई, चिड़ावा, झुंझुनू और गुरारा जैसे क्षेत्रों से जुड़े हरितवाल के शोधपूर्ण समाचार यह सिद्ध करते हैं कि शेखावाटी क्षेत्र राजस्थान की संस्कृति, व्यापार, स्थापत्य कला और विरासत का प्रमुख केंद्र रहा है।

उन्होंने गुरारा से प्राप्त चांदी के मुद्रांकित सिक्कों के संदर्भ में भी हरितवाल के कार्य की सराहना की और जफर उल्लाह खान की पुस्तक का उल्लेख करते हुए इसे ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण बताया। नवलगढ़ की प्रोफेसर पुष्पा शर्मा ने भी इस विषय पर अपनी सहमति जताई।

प्रतापगढ़ कॉलेज के प्राचार्य वीरेंद्र कुमार चंदेला ने कहा कि हरितवाल के प्रयास क्षेत्र की समृद्ध विरासत को जनमानस तक पहुंचाने में अत्यंत सराहनीय हैं। वहीं उत्खनन टीम के सदस्य डॉ महेश सामोता और राजेंद्र कुमार चौधरी ने भी विभिन्न समाचार पत्रों में आलेख के प्रकाशन पर प्रसन्नता व्यक्त की है।

इस प्रकार हरितवाल के शोधपूर्ण लेख न केवल इतिहासकारों के बीच लोकप्रिय हो रहे हैं, बल्कि क्षेत्र की ऐतिहासिक धरोहर को नई पहचान दिलाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

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