शिक्षा के ‘मंदिर’ में व्यापार का तांडव : पत्रकार को थाने भेज दो वरना घर पहुंच जाऊंगा – कोतवाल
पुलिस के मनोज ने कहा प्राइवेट स्कूल हैं, पैसे तो लेंगे ही..! महँगी किताबों पर सवाल पूछा तो पत्रकार को मिला प्रिंसिपल से धक्का सोशल मिडिया पर वीडियो वायरल, आवाज़ उठाने वाली माँ को मिली 'TC' देने की धमकी! मीडिया को सूचना देने वाले गार्जियन पर बनाया गया दबाव बच्चों की टीसी काट देने का डर दिखाकर लिखवाया गया पत्र..! स्कूल ने कोतवाली थाने में पत्रकार दुर्गेश पारीक खोटियां के खिलाफ दिया परिवाद!
जनमानस शेखावाटी सवंददाता : आबिद खान
फतेहपुर : राजस्थान में जहाँ एक ओर सरकारें ‘शिक्षा के अधिकार’ और ‘सुलभ शिक्षा’ के बड़े-बड़े विज्ञापनों से दीवारें पाट रही हैं, वहीं सीकर के फतेहपुर स्थित अमृत विद्या आश्रम से एक ऐसी शर्मनाक, चिंताजनक और झकझोर देने वाली तस्वीर सामने आई है, जो पूरी शिक्षा व्यवस्था के मुंह पर करारा तमाचा है।
यहाँ न केवल शिक्षा के नाम और किताबों के नाम पर ‘लूट’ का बाजार गर्म है, बल्कि सच दिखाने गए मीडियाकर्मी के साथ बदसलूकी, मुकदमों की धमकियां, परिवाद और न्याय माँगने वाले अभिभावकों को मानसिक रूप से प्रताड़ित करने का खेल भी खुलेआम, बेखौफ चल रहा है। सवाल ये है क्या अब स्कूल ज्ञान के मंदिर हैं या खुलेआम चलती फिरती किताबी दुकानें?
एक माँ की बेबसी: ‘पंद्रह हजारी’ पिता कहाँ से लाए किताबों के ₹7672?
ताजसर की रहने वाली पूनम की व्यथा सुनिए :
- एक माँ जिसकी आँखों में बेटियों का भविष्य है, लेकिन सिस्टम की बेरुखी ने उन्हीं आँखों को नम कर दिया है।
- कक्षा 8 की छात्रा गरिमा और कक्षा 2 की छात्रा सीदिका की किताबों के लिए स्कूल ने क्रमशः ₹4797 और ₹2874 (कुल ₹7672) की मांग की है।
- पूनम ने बताया कि उन्होंने स्कूल से कहा कि वे किताबें बाहर से खरीद लेंगी, तो साफ शब्दों में जवाब मिला—
“किताबें स्कूल से ही खरीदनी होंगी।”


कक्षा 8 की सिग्नेचर के साथ किताबो की राशि की रशीदअब सवाल ये उठता है :
- क्या स्कूल बच्चों का शिक्षा केंद्र है या फिर जबरन थोपे गए व्यापार का अड्डा?
- पूनम के पति नरेंद्र, जो महज 15 हजार रुपये महीने में पूरे घर की जिम्मेदारी उठाते हैं, उनके लिए यह रकम किसी आर्थिक हमले से कम नहीं थी।
- लेकिन जब इस ‘अघोषित फिरौती’ के खिलाफ पूनम ने आवाज उठाई, तो संवेदनशीलता दिखाने के बजाय स्कूल प्रशासन ने सीधे बच्चों की TC काट देने की धमकी दे डाली।
पूनम के अनुसार, उनके जेठ सुरेंद्र जी को यह धमकी दी गई हैं। यानी सवाल पूछो, तो बच्चों का भविष्य दांव पर आ जाता हैं।
मर्यादा भूले प्रिंसिपल: सवाल पर दिया मीडियाकर्मी को धक्का, वीडियो वायरल
जब इस पूरे मामले की जानकारी पत्रकार दुर्गेश पारीक खोटियां को मिली और वे सच्चाई जानने स्कूल पहुंचे, तो मामला और भी गंभीर और शर्मनाक हो गया। प्रिंसिपल के वरुण कुमार से जब NCERT नियमों के खिलाफ किताबों की महंगी बिक्री और अभिभावकों पर दबाव को लेकर सवाल किया गया, तो जवाब देने के बजाय उन्होंने अपना आपा खो दिया। और फिर जो हुआ, उसने पूरे सिस्टम का चेहरा बेनकाब कर दिया : पत्रकार को धक्का देकर स्कूल से बाहर निकाल दिया गया।

सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो इस बात का गवाह है कि जो व्यक्ति बच्चों को संस्कार सिखाने का जिम्मेदार है, वही सवाल पूछने पर धक्का-मुक्की करता नजर आ रहा है। यह धक्का सिर्फ एक पत्रकार को नहीं था, “यह धक्का था लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को, और हर उस अभिभावक को जो सवाल पूछने की हिम्मत करता है।
अभिभावकों को बंधक बनाकर लिखवाए जा रहे ‘माफीनामे’?
जयपुर गुलाबी टाइम्स की टीम जब इस मामले की जड़ में पहुंची तो इस कथित लूट तंत्र की जड़ें कितनी गहरी हैं, इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि एक अन्य अभिभावक सुरेंद्र कुमार ने चौंकाने वाला खुलासा किया हैं। उनके अनुसार, जब उन्होंने किताबों की कीमतों पर आपत्ति जताई, तो उन्हें स्कूल बुलाकर शिक्षकों ने बिठाकर चारों ओर से घेर लिया।
फिर उन पर दबाव बनाया गया या तो लिखकर दो कि मेने मीडिया को नहीं बुलाया, या बच्चों की TC ले जाओ।
एक पिता, जो अपने बच्चों के भविष्य के लिए जीता है, उसे मजबूरी में झुकना पड़ा। और लिखना पड़ा कि उसने किसी भी मीडियाकर्मी को सूचना नही दी थी
यहां सवाल बड़ा ये हैं कि अब स्कूल मीडियाकर्मियों को सूचना देने पर भी टी सी देने की कार्रवाई आखिर किस डर से कर रही हैं।
पिता सुरेंद्र को कक्षा 3 के अनवी और कक्षा 8 के जतिन के लिए क्रमशः ₹2874 और ₹4798 की किताबें स्कूल से खरीदनी पड़ीं।
रसीदें भी मीडिया टीम को सौंपी गईं यानी आरोप हवा में नहीं, कागज पर दर्ज हैं।

खाकी पर सवाल: रक्षक या रसूखदारों के पहरेदार?
इस पूरे मामले में पुलिस की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। पत्रकार दुर्गेश खोटिया के पास कोतवाली से मनोज नामक व्यक्ति का फोन आता है, जो नोटिस देने के बजाय फोन पर ही स्कूल का पक्ष लेते हुए कहता है—
“प्राइवेट स्कूल है, फीस तो लेंगे ही।”
जब जयपुर गुलाबी टाइम्स की टीम ने इस मामले में वर्जन लेने के लिए कोतवाल महेंद्र मीणा से संपर्क साधा , तो उन्होंने वर्जन देने के बजाय सवाल पूछने वालों की हैसियत पर ही सवाल उठा दिए—
कोतवाल महेंद्र मीणा ने कहा आप कौन होते हो पूछने वाले?”
और साथ ही कहा—
“महिलाओ से बदतमीजी का अधिकार पत्रकारों को किसने दिया?”
अब बड़ा सवाल ये है—
क्या मामला किताबों की लूट का है, या उसे किसी और दिशा में मोड़ने की कोशिश हो रही है? क्या पुलिस निष्पक्ष जांच करेगी, या सवाल पूछने वालों को ही कटघरे में खड़ा करेगी? क्योंकि कोतवाल साहेब के साथ बातचीत में बार बार उनके मुंह से निकले शब्द ये इशारा करते हैं कि इस मामले को क्या वे महिलाओं से बत्तमीजी से जुड़ा तो नहीं बना रहे ये बड़ा सवाल हैं। कोतवाल महेंद्र मीणा ने वर्जन देने की बजाय कहा कि पत्रकार आपका आदमी हैं तो थाने भेज दो वरना खोटिया दूर नही हैं घर पहुंच जाऊंगा
शिक्षा का मंदिर या किताबों की दुकाने?
अमृत विद्या आश्रम स्कूल के नाम पर चल रहे इस संस्थान में अब शायद ‘अक्षरों’ से ज्यादा ‘अंकों’ की अहमियत हो गई है। जब हमारी टीम ने डमी गार्जियन बनकर एडमिशन की जानकारी ली, तो साफ कहा गया “किताबें स्कूल से ही लेनी होंगी, बाहर से नहीं।” यह केवल नियमों का उल्लंघन नहीं, बल्कि एक तरह का जबरन थोपे गया व्यापारिक एकाधिकार है।
जब इस पूरे मामले पर प्रिंसिपल के वरुण से जवाब मांगा गया, तो उन्होंने फोन काट दिया और कहां कि इस मामले में मैं कुछ भी नही बता सकता। यानी जवाब नहीं, सिर्फ खामोशी। प्रिंसिपल साहब एक तरफ मीडिया को धक्का दे रहे हैं तो वही दूसरी और मीडिया के सवालो बचते भी नजर आ रहे हैं।
अब कार्रवाई या फिर चुप्पी?
- क्या फतेहपुर प्रशासन और शिक्षा विभाग इस किताबों की ‘लूट तंत्र’ पर ताला लगाएगा?
- या फिर पूनम जैसी माताएं अपने बच्चों के भविष्य और स्कूल की मनमानी के बीच यूं ही पिसती रहेंगी?
- इस पूरे मामले ने पुलिस प्रशासन और शिक्षा व्यवस्था दोनों को कठघरे में खड़ा कर दिया है।
- अब देखना होगा, क्या कोतवाल महेंद्र कुमार मीणा इस मामले में ठोस कार्रवाई करते हैं?
- या फिर पुलिस अधीक्षक सीकर हस्तक्षेप कर इस पूरे मामले का सच सामने लाते हैं?
- क्योंकि एक तरफ, देश का चौथा स्तंभ और बेबस माता-पिता हैं तो वही दूसरी तरफ ‘शिक्षा का मंदिर’ बन चुका व्यापार का केंद्र।
बीते दिनो हमारी टीम ने राजस्थान का सबसे बड़ा स्टिंग ऑपरेशन कुछ शिक्षा माफियाओं के खिलाफ किया था बावजूद इसके सीकर का शिक्षा विभाग अब तक मौन हैं। और कोतवाली पुलिस परिवाद लेकर पत्रकारों को फोन पर ने केवल कानून का पाठ पढ़ा रही हैं बल्कि घर पहुंचने की धमकी भी दे रही हैं।
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