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सुजानगढ़ में उत्साह से मनाया जा रहा गणगौर पर्व:सुबह लोकगीतों से पूजन, दोपहर में बन्दौरे, शाम को निकाल रहे घुड़ला


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सुजानगढ़ में उत्साह से मनाया जा रहा गणगौर पर्व:सुबह लोकगीतों से पूजन, दोपहर में बन्दौरे, शाम को निकाल रहे घुड़ला

सुजानगढ़ में उत्साह से मनाया जा रहा गणगौर पर्व:सुबह लोकगीतों से पूजन, दोपहर में बन्दौरे, शाम को निकाल रहे घुड़ला

सुजानगढ़ : सुजानगढ़ में पारंपरिक गणगौर पर्व धूमधाम से मनाया जा रहा है। युवतियां और महिलाएं उत्साह के साथ गणगौर का पूजन कर रही है। धुलंडी से शीतलाष्टमी तक होलिका की भस्म से गणगौर बनाकर पूजन किया जाता है। वहीं शीतलाष्टमी के दिन महिलाएं कुम्हार के घर से मिट्टी लाकर उसकी गणगौर बनाती है।

गणगौर की पूजा के बाद 21 मार्च को गणगौर पर्व मनाया जाएगा। इस दिन गणगौर की सवारी निकलेगी और नाथो तालाब पर मेले का आयोजन होगा।

गणगौर के रूप में मां पार्वती की पूजा क्षेत्र में गणगौर के पर्व को लेकर महिलाओं में बहुत चाव रहता है। मां पार्वती की गणगौर के रूप में पूजा की जाती है। शादी के बाद पहली गणगौर खास होती है। नवविवाहिताएं सज धज कर शीतलाष्टमी के दिन कुम्हार के घर मिट्टी लाने जाती है। जिसकी गणगौर बनाकर रोज सुबह लोकगीतों के साथ गणगौर का पूजन होता है।

वहीं, दिन में बंदौरे और शाम को घुड़ला निकाला जाता है। पूजन का आखिरी दिन पूजन करने वाली महिलाओं युवतियों के लिए भाव भरा दिन होता है। जब गणगौर को पानी में प्रवाहित कर दिया जाता है। प्रतीकात्मक रूप से गणगौर एक साल के लिए ससुराल चली जाती है।

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