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इस्लामपुर नाम बदलने के प्रस्ताव पर ग्रामीणों का विरोध:15 जून को कलेक्ट्रेट तक पैदल मार्च निकालेंगे ग्रामीण


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इस्लामपुर नाम बदलने के प्रस्ताव पर ग्रामीणों का विरोध:15 जून को कलेक्ट्रेट तक पैदल मार्च निकालेंगे ग्रामीण

इस्लामपुर नाम बदलने के प्रस्ताव पर ग्रामीणों का विरोध:15 जून को कलेक्ट्रेट तक पैदल मार्च निकालेंगे ग्रामीण

इस्लामपुर : ग्राम पंचायत इस्लामपुर में गांव का नाम ‘श्रीरामपुर’ करने के प्रस्ताव पर ग्रामीणों में गहरा रोष है। ग्रामीणों ने स्पष्ट किया है कि वे नाम बदलने की अनुमति नहीं देंगे, क्योंकि यह उनकी पहचान और विरासत से जुड़ा है।

इस प्रस्ताव के विरोध में ग्रामीणों ने 15 जून को गांव से कलेक्ट्रेट तक पैदल मार्च निकालने का निर्णय लिया है। हाल ही में हुई एक बैठक में बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने भाग लेकर नाम परिवर्तन के खिलाफ अपनी एकजुटता प्रदर्शित की। लोगों ने बताया कि इस्लामपुर केवल एक नाम नहीं, बल्कि लगभग 400 साल पुरानी विरासत, इतिहास और सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक है।

गांव के बुजुर्गों और सामाजिक प्रतिनिधियों ने बताया कि इस्लामपुर हमेशा से हिंदू-मुस्लिम सौहार्द का उदाहरण रहा है। यहां सदियों से मंदिर और मस्जिद सामाजिक समरसता का संदेश देते आ रहे हैं। सूफी संत हजरत इरादतुल्लाह शाह साहब की दरगाह भी सभी धर्मों के लोगों के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र है।

ग्रामीणों ने तर्क दिया कि गांव की पहचान उसके इतिहास और योगदान से बनती है, न कि किसी नए नाम से। ग्रामीणों ने यह भी बताया कि इस गांव ने देश को कई वीर सैनिक दिए हैं, जिनमें 1965 और 1971 के भारत-पाक युद्ध में वीरता दिखाने वाले कर्नल अब्दुल रसूल खान जैसे नाम शामिल हैं, जो आज भी गांव का गौरव हैं। ग्रामीणों ने कहा कि नाम परिवर्तन का यह मुद्दा केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि उनकी भावनाओं और विरासत से जुड़ा है।

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