रोजा आत्म शुद्धि- अनुशासन और सब्र -धैर्य सीखना है – डॉ अहसान गौरी(ADDI CMHO)
रोजा आत्म शुद्धि- अनुशासन और सब्र -धैर्य सीखना है - डॉ अहसान गौरी(ADDI CMHO)
जनमानस शेखावाटी सवंददाता : मोहम्मद अली पठान
चूरू : जिला मुख्यालय पर डॉ अहसान गौरी अतिरिक्त मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी चूरू ने माहे रमजान की मुबारकबाद देते हुए बताया कि रोज़ा (उपवास) शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद है। यह पाचन तंत्र को आराम देता है, शरीर को डिटॉक्स करता है, और वज़न घटाने, ब्लड प्रेशर व कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करने में मदद करता है। यह मानसिक तनाव, चिंता और अवसाद को कम करने में भी सहायता करता है, साथ ही सहानुभूति और आत्म-नियंत्रण की भावना बढ़ाता है। शारीरिक डिटॉक्स (Detoxification): दिन भर भूखे रहने से शरीर में जमा वसा (fat) का उपयोग करता है, जिससे विषाक्त पदार्थ बाहर निकलते हैं और लीवर व किडनी को आराम मिलता है। वजन और पाचन में सुधारः होता है।
रोज़े से वजन कम हो सकता है और लिपिड प्रोफाइल में सुधार हो सकता है, जिससे ‘खराब’ कोलेस्ट्रॉल नियंत्रित होता है। ओर मानसिक और आत्म-नियंत्रणः यह अनुशासन, धैर्य और मानसिक स्पष्टता को बढ़ावा देता है, जिससे तनाव कम हो सकता है। पाचन तंत्र को आरामः एक महीने का उपवास पाचन तंत्र के लिए “रीसेट” बटन की तरह काम करता है।गर्भवती महिलाओं और गंभीर मधुमेह रोगियों को चिकित्सा परामर्श लेने के बाद ही रोजे रखना चाहिए। स्वस्थ्य को मध्य नजर रखते हुए रोजा रखे। इफ्तार में पौष्टिक भोजनः खजूर, पानी, फल और फाइबर युक्त भोजन से शुरुआत करें। सेहरी में प्रोटीन और फाइबर युक्त भोजन करना चाहिए।तला-भुना खाने से बचें। पानी की कमी न होने देंः इफ्तार के बाद पर्याप्त तरल पदार्थ लें।
नींद सुनिश्चित करें, क्योंकि उपवास से नींद के पैटर्न में बदलाव आ सकता है।
रोज़ा (Fasting) इस्लाम के पांच स्तंभों में से एक है, जो रूहानी (आध्यात्मिक) और जिस्मानी (शारीरिक) दोनों तरह के फायदे देता है। यह आत्म-अनुशासन, अल्लाह के प्रति समर्पण, और पापों से मुक्ति पाने का माध्यम है। यह न केवल रूह को शुद्ध करता है। बल्कि शरीर को डिटॉक्सिफाई (विषाक्त पदार्थों को निकालना) करने और पाचन तंत्र को आराम देने में भी मदद करता है। जिससे कैंसर जैसी बीमारियों का खतरा कम हो सकता है।
रोज़ा (उपवास) रखने से इस्लामिक फायदे हैं। तक़वा की प्राप्तिः रोज़े का मुख्य उद्देश्य अल्लाह का डर और उससे गहरा संबंध। गुनाहों से माफी: रमज़ान में रोज़ा रखने से पिछले गुनाह माफ़ होते हैं और यह रूहानी सफाई का जरिया है। यह भूख और प्यास पर काबू पाकर आत्म-अनुशासन और सब्र (धैर्य) सिखाता है। गरीबों के प्रति सहानुभूतिः भूख का एहसास होने से गरीबों के प्रति सहानुभूति और परोपकार की भावना जागृत होती है।
रोज़ेदारों के लिए जन्नत में ‘अर-रय्यान’ नाम का खास दरवाज़ा है। जहां से रोजेदार ही गुजर सकते हैं। रोज़ा से स्वास्थ्य संबंधी फायदे हैं। शरीर का डिटॉक्सः दिन भर भूखा रहने से पाचन तंत्र को आराम मिलता है और शरीर से हानिकारक विषाक्त पदार्थ (Toxins) बाहर निकल जाते हैं। वजन और मेटाबॉलिज्मः यह मेटाबॉलिज्म को संतुलित करता है और वजन को नियंत्रित करने में सहायक होता है। मानसिक शांतिः रोज़ा रखने से दिमागी कार्यप्रणाली में सुधार और मानसिक शांति मिलती है।
सुन्नत तरीकाः इफ्तार में खजूर का सेवन पैगंबर की सुन्नत है, जो शरीर को तुरंत ग्लूकोज और पौष्टिक तत्व (फाइबर, आयरन) प्रदान करता है। रोज़ा एक मुकम्मल इबादत है जो रूह की सफाई के साथ-साथ शरीर को भी स्वस्थ रखता है।
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