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छापर में मनाई धूलंंडी, डीजे की धुन पर थिरके युवा:पर्यावरण संरक्षण का दिया संदेश, युवाओं ने पक्के रंगों से किया परहेज


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छापर में मनाई धूलंंडी, डीजे की धुन पर थिरके युवा:पर्यावरण संरक्षण का दिया संदेश, युवाओं ने पक्के रंगों से किया परहेज

छापर में मनाई धूलंंडी, डीजे की धुन पर थिरके युवा:पर्यावरण संरक्षण का दिया संदेश, युवाओं ने पक्के रंगों से किया परहेज

छापर : कस्बे में धुलंडी का पर्व उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। लोग एक-दूसरे को गुलाल लगाकर होली खेल रहे हैं। इस वर्ष होली पर पर्यावरण संरक्षण और जल के अपव्यय को रोकने का विशेष संदेश भी दिया जा रहा है।

कस्बे के चौक-चौराहों और मुख्य बाजारों में युवा डीजे पर होली के गीतों पर झूमते नजर आए। ‘होलियां में उड़े रे गुलाल’ और ‘रंग बरसे भीगे चूनर वाली’ जैसे पारंपरिक राजस्थानी लोकगीतों पर जमकर नृत्य किया गया। लोगों ने एक-दूसरे को गुलाल लगाकर रंगों के इस पावन पर्व की शुभकामनाएं दीं।

इस बार चंद्र ग्रहण और सूतक का मिला-जुला असर भी देखने को मिला। कुछ लोगों ने मंगलवार को ही धुलंडी मना ली थी, लेकिन अधिकांश लोग बुधवार को ही यह त्योहार मना रहे हैं। पर्यावरण संरक्षण के संदेश के तहत, युवाओं ने पक्के रंगों का उपयोग करने से परहेज किया।

इसके बजाय, उन्होंने गुलाल और अबीर लगाकर होली खेली, जिससे जल संरक्षण और रासायनिक रंगों से बचाव का संदेश दिया गया।धुलंडी का पर्व होलिका दहन के अगले दिन मनाया जाता है। इसी दिन से कुंवारी युवतियां, किशोरियां और सुहागिनें सोलह दिनों तक चलने वाले गणगौर पूजन का भी प्रारंभ करती हैं।

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