समान नागरिक संहिता (UCC) पर मुस्लिम समाज का कड़ा विरोध, शरियत में दखल न देने की मांग
समान नागरिक संहिता (UCC) पर मुस्लिम समाज का कड़ा विरोध, शरियत में दखल न देने की मांग
जनमानस शेखावाटी सवांददाता : मोहम्मद अली पठान
चुरू : राजस्थान में समान नागरिक संहिता (UCC) को लागू करने की प्रक्रिया और चर्चाओं के बीच मुस्लिम समुदाय ने इसका पुरजोर विरोध किया है। अंसारी नर्सरी मे आयोजित बैठक में अपने आधिकारिक सुझावों और आपत्तियों में कहा है कि यूसीसी देश की बहुलता और विविधता के खिलाफ है। वक्ताओ ने तर्क दिया कि संविधान प्रदत्त धार्मिक स्वतंत्रता (अनुच्छेद 25) के तहत मुस्लिम पर्सनल लॉ उनके धार्मिक ग्रंथों (कुरान और हदीस) पर आधारित है, जिसमें किसी भी प्रकार का बाहरी हस्तक्षेप स्वीकार नहीं किया जाएगा।
मुख्य आपत्तियां धार्मिक स्वतंत्रता का हनन हैं वक्ताओ का कहना है कि विवाह, तलाक और विरासत जैसे निजी कानून उनके धार्मिक विश्वासों से जुड़े हैं, जिन्हें बदला नहीं जा सकता। भारत जैसे बहु-सांस्कृतिक देश में एक समान कानून थोपने से अल्पसंख्यकों की सांस्कृतिक पहचान प्रभावित होगी।
वक्ताओ ने यह भी आशंका जताई है कि इस तरह के मुद्दों को उठाना सामाजिक सौहार्द को प्रभावित कर सकता है।प्रमुख सुझाव सरकार को किसी भी समुदाय के पर्सनल लॉ में बदलाव करने के बजाय मौजूदा विविधता का सम्मान करना चाहिए।विधि आयोग या संबंधित समितियों को ऐसे मामलों में व्यापक और पारदर्शी चर्चा करनी चाहिए।इस विषय को राजनीतिक लाभ के बजाय संवैधानिक दायरे और सामाजिक सहमति के आधार पर देखना चाहिए।
मुख्य अतिथि महोदय ने कहा की सभी जागरूक नागरिकों को www.ucc. rajasthan.gov.in वेबसाइट पर अपनी आपति दर्ज करवाना चाहिए जिससे की सरकार संवेधानिक निर्णय ले सके। इस मौके पर इंजीनियर खुर्शीद हुसैन, शिक्षाविद् अब्दुल हमीद, गनी खां, शायर ईद्रिश खत्री (राज), रमजान गुज्जर, आसिफ अंसारी, आरिफ मुगल, फारूक अंसारी, मुहम्मद अशरफ, आवेस् अंसारी, सदिक अंसारी आदि काफी संख्या में मौजूद रहे। संचालन उस्मान अंसारी ने किया।
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