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रामगढ़ में कानून का मजाक!

सहायक अभियंता की हठधर्मिता और पुलिस की 'रहस्यमयी' चुप्पी?

जनमानस शेखावाटी सवंददाता : आबिद खान

​रामगढ़ : क्या राजस्थान पुलिस के नियम-कायदे केवल आम आदमी का चालान काटने के लिए हैं? क्या रसूखदार ठेकेदारों और अधिकारियों के लिए ‘मोटर व्हीकल एक्ट’ के मायने बदल जाते हैं? जनमानस शेखावाटी की टीम ने एक बार फिर उस ‘सफेद हाथी’ का पर्दाफाश किया है जिसे रामगढ़ विद्युत विभाग और स्थानीय पुलिस पाल रही है।

​फतेहपुर में कार्रवाई, तो रामगढ़ में ‘मेहरबानी’ क्यों?

बीते दिनों हमारी टीम की पड़ताल के बाद फतेहपुर शहर कोतवाल महेंद्र मीणा ने त्वरित कार्रवाई करते हुए कानून का डंडा चलाया था। परिवहन विभाग के आर टी ओ हनुमान सिंह ने भी उन निजी कैम्पर गाड़ियों के चालान काटे थे, जो अवैध रूप से ‘राजस्थान सरकार’ और ‘On Govt Duty’ लिखकर सड़कों पर रौब झाड़ रही थीं। और उनकी नेम प्लेट भी उतरवाई गई थी, बिजली विभाग के उच्च अधिकारियों एस ई सीकर ने भी सख्त आदेश जारी किए।

लेकिन बड़ा सवाल यह है कि रामगढ़ की सीमा में प्रवेश करते ही कानून अंधा क्यों हो जाता है?

रामगढ़ ​सहायक अभियंता की हठधर्मिता: कानून से बड़े हैं ठेकेदार?
रामगढ़ विद्युत विभाग के सहायक अभियंता आज भी अपनी हठधर्मिता पर अड़े हुए हैं। उनके संरक्षण में FRT ठेकेदारों की गाड़ियां आज भी राजस्थान सरकार लिख कर खुलेआम नियमों की धज्जियां उड़ा रही हैं। क्या सहायक अभियंता के लिए डिस्कॉम के एस.ई. (SE) के आदेश और सरकार के नियम कोई मायने नहीं रखते? आखिर इन ठेकेदारों को ‘अवैध बोर्ड’ लगाने की खुली छूट किसके इशारे पर दी गई है?

​रामगढ़ पुलिस के इकबाल पर सवाल?

सबसे हैरान करने वाली भूमिका रामगढ़ पुलिस की है। जिस रास्ते से आम जनता की गाड़ियों के कागजात चेक किए जाते हैं, उसी रास्ते से ये अवैध नेमप्लेट वाली गाड़ियां पुलिस की नाक के नीचे से गुजरती हैं।

  • क्या रामगढ़ पुलिस को ये अवैध गाड़ियां नजर नहीं आतीं?
  • ​क्या पुलिस प्रशासन केवल बेबस जनता पर डंडा चलाने के लिए है, या इन रसूखदार ठेकेदारों पर कार्रवाई करने की हिम्मत भी जुटाएगा?
  • ​फतेहपुर पुलिस ने जो तत्परता दिखाई, वह रामगढ़ पुलिस की कार्यशैली में क्यों गायब है?
    क्या यहां ‘मिलीभगत’ का कोई गहरा खेल चल रहा है? या फिर रसूख के साए में सब कुछ ठीक ठाक हैं।

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