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टिकट निर्मल कुमार को मिला, हर्ष लांबा ने भी संभाला मोर्चा


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टिकट निर्मल कुमार को मिला, हर्ष लांबा ने भी संभाला मोर्चा

व्यक्ति से बड़ा संगठन और स्वार्थ से बड़ा किसान हित बताया; घर बुलाकर कार्यकर्ताओं से कराया परिचय, अब साथ मिलकर कर रहे चुनाव प्रचार

जनमानस शेखावाटी सवांददाता : मोहम्मद अली पठान

चूरू : ग्रामीण किसान राजनीति में संगठन के प्रति समर्पण की तस्वीर जिला परिषद चूरू के वार्ड संख्या 36 में देखने को मिल रही है। यहां युवा नेता हर्ष लांबा ने महीनों पहले से जनसंपर्क शुरू कर दिया था। कोरोना महामारी हो या पशुओं में फैला लंपी रोग, ग्रामीण शिविर हों या किसानों की समस्याएं-हर्ष लांबा हर मुश्किल वक्त में जनता के बीच खड़े रहे और उनके दुख-सुख में भागीदार बने।

लेकिन राजनीतिक संस्कारों की असली मिसाल तब सामने आई, जब कांग्रेस ने संगठनात्मक सहमति के तहत किसान हितों के सजग प्रहरी और फसल बीमा के जानकार कामरेड निर्मल कुमार को प्रत्याशी बनाया। टिकट नहीं मिलने के बावजूद हर्ष लांबा ने न नाराजगी दिखाई और न ही कोई बहाना बनाया। उन्होंने निर्मल कुमार को अपने घर बुलाकर कार्यकर्ताओं से परिचय कराया और अब पूरे क्षेत्र में उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर चुनाव प्रचार में जुटे हैं।

हर्ष लांबा ने अपनी विचारधारा स्पष्ट करते हुए कहा, “व्यक्ति से बड़ा संगठन और स्वार्थ से बड़ा किसान हित! यही हमारी विचारधारा और यही हमारी ताकत है।” वहीं प्रत्याशी कामरेड निर्मल कुमार ने इसे ग्रामीण किसान राजनीति की खूबसूरत तस्वीर बताते हुए कहा, “जहां पद से बड़ा संगठन और टिकट से बड़ा विचार होता है।”

वरिष्ठ कांग्रेसी युवा नेता विकास मिल ने बताया कि हर्ष लांबा और कामरेड निर्मल कुमार दोनों किसान हितैषी हैं। दोनों अधिवक्ता हैं और उनकी राजनीति का केंद्र किसान, गांव और आम आदमी है।

हर्ष लांबा का यह कदम बताता है कि राजनीति केवल टिकट पाने तक सीमित नहीं है, बल्कि विचारधारा, संगठन और सामूहिक लक्ष्य के प्रति समर्पण भी इसका अहम हिस्सा है। टिकट भले ही एक व्यक्ति को मिला हो, लेकिन किसान हितों के लिए संघर्ष साझा है। व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा से ऊपर उठकर संगठन के फैसले को मजबूती देना ही राजनीतिक परिपक्वता की पहचान है।

हर्ष लांबा ने अपने व्यवहार से यह संदेश दिया है कि नेतृत्व केवल अपने लिए रास्ता बनाने में नहीं, बल्कि संगठन के रास्ते को मजबूत करने में है। किसान एकता, संगठन की ताकत और ग्रामीण राजनीति के स्वस्थ संस्कारों की यह तस्वीर क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है।

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