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सात साल से खेल मैदान का इंतजार, बिसाऊ के युवा अपने खर्चे पर बना रहे रनिंग ट्रैक


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सात साल से खेल मैदान का इंतजार, बिसाऊ के युवा अपने खर्चे पर बना रहे रनिंग ट्रैक

आर्मी भर्ती की तैयारी के लिए सड़कों और खेतों में दौड़ने को मजबूर युवा, 10 से 15 हजार रुपए जुटाकर लादयाण जोहड़ में बना रहे अस्थायी ट्रैक

जनमानस शेखावाटी सवांददाता : लतीफ खान

बिसाऊ : देश की सेवा करने का सपना लेकर सेना में भर्ती की तैयारी कर रहे बिसाऊ के युवाओं के सामने खेल मैदान का अभाव बड़ी चुनौती बना हुआ है। मंडावा विधानसभा क्षेत्र के प्रमुख कस्बे में युवा पिछले सात वर्षों से खेल मैदान की मांग उठा रहे हैं, लेकिन स्थायी समाधान नहीं होने से उन्हें सड़कों और खेतों के कच्चे रास्तों पर दौड़ लगाकर शारीरिक दक्षता की तैयारी करनी पड़ रही है। अब युवाओं ने आपस में पैसे एकत्रित कर लादयाण जोहड़ मैदान में अस्थायी रनिंग ट्रैक तैयार करने की पहल की है। इससे खेल सुविधाओं को लेकर जिम्मेदारों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

2020 में भी युवाओं ने अपने खर्चे पर बनाया था ट्रैक

जगतपुरा मोहल्ले के युवा कैलाश कुमार ने बताया कि वर्ष 2020 में युवाओं ने मिलकर लादयाण जोहड़ मैदान में सेना भर्ती की शारीरिक परीक्षा की तैयारी के लिए अपने खर्चे पर अस्थायी रनिंग ट्रैक तैयार करवाया था। उस समय मैदान में शारीरिक अभ्यास के लिए जरूरी सुविधाएं भी जुटाई गई थीं। अब एक बार फिर युवाओं को अपनी जेब से पैसे खर्च कर ट्रैक तैयार करना पड़ रहा है।

टीए आर्मी भर्ती की तैयारी कर रहे सलमान खान ने बताया कि पिछले दो दिनों से युवा साथी आपस में पैसे एकत्रित कर रनिंग ट्रैक बनाने में जुटे हैं। मैदान के बीच मौजूद किंकर, घास और अन्य बाधाओं को भी हटाया जाएगा, ताकि दौड़ और शारीरिक अभ्यास में परेशानी नहीं हो। इस काम पर करीब 10 से 15 हजार रुपए खर्च होने का अनुमान है।

युवाओं का कहना है कि सेना में भर्ती होने के लिए वे लगातार मेहनत कर रहे हैं, लेकिन बुनियादी खेल सुविधाओं के अभाव में उन्हें खुद ही व्यवस्था करनी पड़ रही है।

2019 से उठ रही मांग, जमीन आवंटन के बाद भी निर्माण अटका

खेल मैदान की मांग को लेकर संघर्ष कर रहे लतीफ खान ने बताया कि वर्ष 2019 से तत्कालीन पालिका अध्यक्ष, क्षेत्रीय विधायक और पूर्व सांसद सहित जनप्रतिनिधियों को कई बार लिखित ज्ञापन दिए गए और मौखिक रूप से भी समस्या से अवगत करवाया गया। इसके बावजूद खेल मैदान का निर्माण शुरू नहीं हो सका।

लतीफ खान के अनुसार, विधानसभा चुनाव 2023 से पहले खेल मैदान के लिए जमीन आवंटित करने की प्रक्रिया हुई थी। उस समय मैदान की अनुमानित लागत करीब 1.50 करोड़ रुपए बताई गई थी। हालांकि, संबंधित जमीन को लेकर विवाद और स्थगन आदेश की स्थिति सामने आने के कारण निर्माण कार्य अटक गया।

युवाओं का सवाल है कि यदि जमीन विवादित थी तो आवंटन से पहले उसकी स्थिति स्पष्ट क्यों नहीं की गई? वहीं, जमीन नगरपालिका के अधीन होने की स्थिति में विवाद और स्थगन आदेश के निस्तारण के लिए अब तक क्या कार्रवाई हुई है? युवाओं ने संबंधित अधिकारियों से जमीन की वर्तमान स्थिति और निर्माण की राह में आ रही बाधाओं को स्पष्ट करने की मांग की है।

स्थगन आदेश हटवाने के लिए ठोस पहल की मांग

लतीफ खान का आरोप है कि खेल मैदान की जमीन पर स्थगन आदेश लगने के बाद उसके समाधान के लिए प्रभावी पहल नहीं हुई। उनका कहना है कि युवा कई बार मांग उठा चुके हैं, लेकिन जमीन संबंधी विवाद के निस्तारण और निर्माण कार्य शुरू कराने की दिशा में अब तक ठोस परिणाम सामने नहीं आया।

युवाओं की मांग है कि प्रशासन जमीन विवाद और स्थगन आदेश की वर्तमान स्थिति सार्वजनिक करे। साथ ही, जनप्रतिनिधि कानूनी प्रक्रिया के तहत समाधान करवाकर खेल मैदान निर्माण का रास्ता साफ कराएं, ताकि वर्षों से लंबित मांग पूरी हो सके।

खेल मैदान नहीं, फिर भी 10 युवाओं का अग्निवीर भर्ती में चयन

बिसाऊ में खेल मैदान की सुविधा नहीं होने के बावजूद युवाओं ने हिम्मत नहीं हारी। सेना की अग्निवीर भर्ती की तैयारी के दौरान उन्होंने सड़कों और खेतों के कच्चे रास्तों पर दौड़ लगाकर अभ्यास जारी रखा। युवाओं के अनुसार, बीकानेर में आयोजित अग्निवीर रैली भर्ती में कस्बे के 10 कायमखानी युवाओं का चयन हुआ।

इस सफलता से प्रेरित होकर अन्य युवाओं ने भी आगामी भर्ती की तैयारी शुरू कर दी है। वर्तमान में करीब 40 से 50 युवा लिखित परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद शारीरिक परीक्षा की तैयारी में जुटे हैं। युवाओं के अनुसार, उनकी शारीरिक परीक्षा फरवरी 2027 में बीकानेर में प्रस्तावित अग्निवीर रैली भर्ती के दौरान होनी है। ऐसे में बेहतर रनिंग ट्रैक और खेल मैदान की जरूरत और बढ़ गई है।

चुनाव में अहम भूमिका, फिर भी बुनियादी सुविधा का इंतजार

बिसाऊ मंडावा विधानसभा क्षेत्र का प्रमुख कस्बा है और चुनावी समीकरणों में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका मानी जाती है। इसके बावजूद युवाओं को खेल मैदान जैसी बुनियादी सुविधा के लिए वर्षों से संघर्ष करना पड़ रहा है।

युवाओं की मांग है कि खेल मैदान का मुद्दा केवल आश्वासनों तक सीमित नहीं रहे। जमीन विवाद के समाधान, बजट की वास्तविक स्थिति और निर्माण कार्य शुरू करने की समयसीमा को लेकर स्पष्ट जानकारी दी जाए।

अब सवाल यही है कि बिसाऊ के युवाओं को अपना खेल मैदान कब मिलेगा? फिलहाल सेना में भर्ती होने का सपना देख रहे युवा सड़कों, खेतों और अपने खर्चे से तैयार किए जा रहे अस्थायी रनिंग ट्रैक पर पसीना बहाने को मजबूर हैं।

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