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शब्दाक्षर ने मनाई स्व. कन्हैयालाल सहल की जयंती, कवि गोष्ठी में साहित्यकारों ने दी श्रद्धांजलि


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शब्दाक्षर ने मनाई स्व. कन्हैयालाल सहल की जयंती, कवि गोष्ठी में साहित्यकारों ने दी श्रद्धांजलि

शब्दाक्षर ने मनाई स्व. कन्हैयालाल सहल की जयंती, कवि गोष्ठी में साहित्यकारों ने दी श्रद्धांजलि

जनमानस शेखावाटी सवांददाता : शैलेंद्र पारीक

नवलगढ़ : शब्दाक्षर राष्ट्रीय साहित्यिक संस्था की ओर से स्व. कन्हैयालाल सहल की जयंती पर गायत्री विद्यापीठ परिसर में कवि गोष्ठी आयोजित की गई। कार्यक्रम की अध्यक्षता समाजसेवी कैलाश चोटिया ने की। मुख्य अतिथि श्रीकांत पारीक तथा विशिष्ट अतिथि जगदीश प्रसाद जांगिड, प्रदेश अध्यक्ष सुरेश कुमार जांगिड, डॉ. जगदीश प्रसाद कड़वासरा, इंजीनियर भंवरलाल जांगिड और वृक्षमित्र श्रवण कुमार जाखड़ रहे। मुख्य वक्ता शब्दाक्षर के राष्ट्रीय संरक्षक और शेखावाटी के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. दयाशंकर जांगिड थे। कार्यक्रम की शुरुआत स्व. कन्हैयालाल सहल को श्रद्धांजलि अर्पित कर की गई।

डॉ. दयाशंकर जांगिड ने कहा कि स्व. रामकुमार सहल के सातों पुत्रों पर मां सरस्वती की विशेष कृपा रही। उनके पुत्रों ने शिक्षा, साहित्य और समाजसेवा के क्षेत्र में योगदान देकर नवलगढ़ का नाम रोशन किया। स्व. कन्हैयालाल सहल ने हिंदी और राजस्थानी भाषा में सैकड़ों पुस्तकें लिखीं। राजस्थानी भाषा को मान्यता दिलाने के लिए उन्होंने निरंतर प्रयास किए। साथ ही राजस्थानी भाषा की लोकोक्तियों की प्रभावशाली व्याख्या की।

कवि गोष्ठी में ओमप्रकाश सैन, डॉ. कैलाश शर्मा, अंजनी कुमार स्वामी, आशीष शर्मा, भवानी शंकर सैनी, रमाकांत सोनी, सुरेश कुमार जांगिड, मुरली मनोहर चोबदार, सज्जन जोशी और रिद्धकरण बासोतिया ने अपनी कविताएं प्रस्तुत कीं। शब्दाक्षर के राष्ट्रीय अध्यक्ष रवि प्रताप सिंह ने दूरभाष के माध्यम से आयोजन समिति को बधाई दी। उन्होंने कहा कि साहित्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाली विभूतियों को याद करना और उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित करना हम सभी का दायित्व है।

अध्यक्षीय उद्बोधन में कैलाश चोटिया ने कहा कि स्व. कन्हैयालाल सहल के साहित्यिक योगदान को याद करना उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है। राजस्थानी भाषा का शब्दकोश समृद्ध और आकर्षक है। हमें अपने दैनिक जीवन में राजस्थानी भाषा का अधिकाधिक प्रयोग करना चाहिए। यही स्व. सहल को सच्ची श्रद्धांजलि होगी। कार्यक्रम में टी.एम. त्रिपाठी, सीताराम घोड़ेला और चक्रपाणि मिश्रा सहित अन्य लोग मौजूद रहे। संचालन कवि रमाकांत सोनी ने किया।

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