अर्द्धवार्षिक परीक्षाएं सिर पर, स्कूलों से विषय शिक्षक डेपुटेशन पर; बच्चों की पढ़ाई प्रभावित
गणित, विज्ञान और अंग्रेजी के शिक्षक चुनावी व विभागीय ड्यूटी में व्यस्त, अधूरे पाठ्यक्रम के बीच परीक्षा की तैयारी करना विद्यार्थियों के लिए चुनौती
जनमानस शेखावाटी सवांददाता : अनिल शर्मा
खेतड़ी : अर्द्धवार्षिक परीक्षाएं नजदीक हैं, लेकिन जिले के कई विद्यालयों में विद्यार्थियों का पाठ्यक्रम अब तक पूरा नहीं हुआ है। कहीं गणित के शिक्षक की कमी है, तो कहीं विज्ञान और अंग्रेजी पढ़ाने वाले अध्यापकों को डेपुटेशन पर दूसरे स्थानों पर लगा दिया गया है। ऐसे में विद्यार्थियों की परीक्षा तैयारी प्रभावित होने की आशंका है। सवाल यह है कि जब स्कूलों में विषय अध्यापक ही उपलब्ध नहीं होंगे, तो बच्चे पाठ्यक्रम पूरा कर पुनरावृत्ति और प्रश्नों का अभ्यास कैसे करेंगे?
गणित, विज्ञान और अंग्रेजी जैसे महत्वपूर्ण विषयों में नियमित पढ़ाई, सवालों का अभ्यास और शिक्षक का मार्गदर्शन जरूरी होता है। लेकिन चुनावी और अन्य विभागीय कार्यों में शिक्षकों की ड्यूटी लगाए जाने से विद्यालयों में पढ़ाई प्रभावित होने की शिकायतें सामने आ रही हैं। परीक्षा की तारीख नजदीक आने के साथ विद्यार्थियों और अभिभावकों की चिंता भी बढ़ रही है।
अर्द्धवार्षिक परीक्षा से पहले विद्यार्थियों को पाठ्यक्रम पूरा करने के साथ पढ़े हुए विषयों की पुनरावृत्ति और प्रश्नों का अभ्यास करने के लिए पर्याप्त समय चाहिए। शिक्षक उपलब्ध नहीं होने से यह प्रक्रिया बाधित होती है, तो इसका असर परीक्षा की तैयारी पर पड़ सकता है। ऐसे में सवाल उठता है कि समय पर पाठ्यक्रम पूरा नहीं होने की स्थिति में जिम्मेदारी किसकी होगी?
डेपुटेशन में दूसरे कर्मचारियों को प्राथमिकता क्यों नहीं?
चुनावी और प्रशासनिक कार्यों के लिए कर्मचारियों की जरूरत से इनकार नहीं किया जा सकता, लेकिन ऐसी व्यवस्था भी जरूरी है कि सरकारी विद्यालयों में नियमित पढ़ाई बाधित न हो। शिक्षा विभाग को गणित, विज्ञान और अंग्रेजी जैसे महत्वपूर्ण विषयों के शिक्षकों को अनावश्यक रूप से डेपुटेशन पर लगाने से बचना चाहिए। जहां संभव हो, प्रशासनिक कार्यों के लिए अन्य उपलब्ध कर्मचारियों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
यदि किसी विषय शिक्षक को आवश्यक कार्य के लिए लगाना अनिवार्य हो, तो संबंधित विद्यालय में वैकल्पिक शिक्षक की व्यवस्था की जानी चाहिए। इससे विद्यार्थियों की पढ़ाई लगातार जारी रह सकेगी।
परीक्षा से पहले समीक्षा जरूरी
अर्द्धवार्षिक परीक्षाओं से पहले शिक्षा विभाग को विद्यालयवार और विषयवार शिक्षकों की उपलब्धता की समीक्षा करनी चाहिए। जिन स्कूलों के विषय शिक्षक डेपुटेशन पर हैं, वहां उनकी वापसी या वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित करने के साथ पाठ्यक्रम पूरा करवाने पर भी ध्यान देना होगा।
आखिरकार, विद्यार्थियों से अच्छे परिणाम की अपेक्षा करने से पहले उन्हें पढ़ाई के लिए पर्याप्त शिक्षक और समय उपलब्ध कराना जरूरी है। प्रशासनिक व्यवस्थाओं के बीच बच्चों की शिक्षा प्रभावित नहीं होनी चाहिए। समय रहते ठोस कदम उठाए जाएं, ताकि शिक्षक की कमी का खामियाजा विद्यार्थियों को न भुगतना पड़े।
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