इंग्लिश मीडियम स्कूलों में विज्ञान के शिक्षक नहीं, परीक्षा सिर पर
शिमला सहित कई स्कूलों में विज्ञान संकाय की पढ़ाई पर सवाल, विद्या संबल योजना से जगी उम्मीद भी पदों के समायोजन में उलझी
जनमानस शेखावाटी सवांददाता : अनिल शर्मा
शिमला : सरकारी स्कूलों को अंग्रेजी माध्यम में बदलकर बेहतर शिक्षा देने की योजना के बीच विज्ञान संकाय में शिक्षकों की कमी विद्यार्थियों के लिए परेशानी बन रही है। कई स्कूलों में विज्ञान संकाय शुरू होने और विद्यार्थियों के प्रवेश लेने के बावजूद विषय पढ़ाने के लिए शिक्षक उपलब्ध नहीं होने की बात सामने आ रही है। ऐसे में बोर्ड परीक्षाओं से पहले पाठ्यक्रम पूरा होने और विद्यार्थियों की तैयारी को लेकर चिंता बढ़ गई है।
सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों को स्थानीय स्तर पर विज्ञान की पढ़ाई उपलब्ध कराने के उद्देश्य से सरकारी स्कूलों में विज्ञान संकाय शुरू किए थे। इससे निजी स्कूलों की महंगी फीस वहन नहीं कर पाने वाले परिवारों को राहत मिलने की उम्मीद थी। लेकिन विषय विशेषज्ञ शिक्षकों की कमी के कारण इस उद्देश्य पर सवाल उठने लगे हैं।
विज्ञान संकाय में भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान और जीव विज्ञान जैसे विषयों की पढ़ाई के साथ प्रयोगात्मक कार्य भी जरूरी हैं। ऐसे में नियमित कक्षाओं और प्रायोगिक अभ्यास के बिना विद्यार्थियों के लिए पाठ्यक्रम पूरा करना और परीक्षा की तैयारी करना मुश्किल हो सकता है।
विद्या संबल योजना से उम्मीद, लेकिन पदों का पेच
शिक्षकों की कमी दूर करने के लिए विद्या संबल योजना के तहत शिक्षक लगाने की प्रक्रिया से विद्यार्थियों और अभिभावकों को उम्मीद जगी थी। उन्हें लगा कि विषयवार शिक्षक उपलब्ध होने से पढ़ाई नियमित हो सकेगी। हालांकि, कुछ स्कूलों में पदों के समायोजन और पहले से वेतन आहरित होने की स्थिति के चलते नए शिक्षकों की व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
महादेवी खेड़वाल राजकीय अंग्रेजी माध्यम विद्यालय, शिमला में भी विज्ञान संकाय के विद्यार्थियों को विषय शिक्षकों की उपलब्धता को लेकर चिंता है। विद्यार्थियों की मांग है कि विभाग जल्द स्थिति स्पष्ट करे और नियमित पढ़ाई के लिए आवश्यक शिक्षकों की व्यवस्था सुनिश्चित करे।
सरकारी स्कूल में प्रवेश लिया, अब निजी पढ़ाई का डर
सरकारी अंग्रेजी माध्यम स्कूलों में पढ़ने वाले कई विद्यार्थी ऐसे परिवारों से आते हैं, जो निजी स्कूलों की फीस वहन नहीं कर सकते। अभिभावकों का कहना है कि यदि विज्ञान संकाय शुरू करने के बाद शिक्षकों की व्यवस्था नहीं होती है, तो बच्चों को निजी ट्यूशन या कोचिंग का सहारा लेना पड़ सकता है। इससे परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा।
स्कूलवार समीक्षा की मांग
विद्यार्थियों और अभिभावकों की मांग है कि शिक्षा विभाग प्रत्येक अंग्रेजी माध्यम स्कूल में विज्ञान संकाय की स्थिति की समीक्षा करे। स्कूलवार विद्यार्थियों की संख्या, उपलब्ध विषय शिक्षकों और रिक्तियों का ब्योरा सामने लाया जाए। विद्या संबल योजना के तहत भी वास्तविक जरूरत वाले स्कूलों में शिक्षकों की व्यवस्था की जाए, ताकि विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित न हो।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब विज्ञान संकाय शुरू कर विद्यार्थियों को प्रवेश दे दिया गया, तो विषय पढ़ाने के लिए शिक्षक क्यों उपलब्ध नहीं हैं? परीक्षा नजदीक होने के बीच विद्यार्थियों को नियमित पढ़ाई मिलना जरूरी है। शिक्षा व्यवस्था की सफलता केवल कागजों पर दर्ज पदों से नहीं, बल्कि कक्षा में हो रही पढ़ाई से तय होती है।
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