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झुंझुनूं सभापति पद का मुकाबला: कांग्रेस को एक पार्षद का साथ चाहिए, भाजपा को 16 का समर्थन जुटाना होगा


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झुंझुनूं सभापति पद का मुकाबला: कांग्रेस को एक पार्षद का साथ चाहिए, भाजपा को 16 का समर्थन जुटाना होगा

कांग्रेस के अब्दुल्ला अगवान और भाजपा के मनु धनकड़ ने दाखिल किया आवेदन; निर्दलीय वीरेंद्र डारा बने अब्दुल्ला के प्रस्तावक

जनमानस शेखावाटी सवांददाता : मोहम्मद आरिफ चंदेल

झुंझुनूं : नगर परिषद में सभापति पद के चुनाव को लेकर तस्वीर साफ हो गई है। कांग्रेस की ओर से वार्ड 41 से निर्वाचित अब्दुल्ला गुलाम नबी अगवान और भाजपा की ओर से वार्ड 49 से निर्वाचित मनु धनकड़ ने सभापति पद के लिए आवेदन दाखिल किया है। 60 वार्डों वाली नगर परिषद में कांग्रेस के 30 पार्षद निर्वाचित हुए हैं, जबकि भाजपा के 15 और निर्दलीयों के 15 पार्षद हैं। बहुमत के लिए 31 पार्षदों का समर्थन जरूरी है।

कांग्रेस बहुमत से केवल एक सीट दूर है। निर्दलीय पार्षद वीरेंद्र डारा का अब्दुल्ला अगवान के आवेदन में प्रस्तावक बनना कांग्रेस के लिए महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है। कांग्रेस खेमे की ओर से कुछ अन्य निर्दलीय पार्षदों के समर्थन का भी दावा किया जा रहा है। दूसरी ओर भाजपा को बहुमत के आंकड़े तक पहुंचने के लिए 16 और पार्षदों के समर्थन की जरूरत होगी।

अब्दुल्ला अगवान : लगातार दूसरी जीत, 734 वोट की बढ़त

वार्ड 41 से कांग्रेस के टिकट पर लगातार दूसरी बार पार्षद निर्वाचित हुए अब्दुल्ला गुलाम नबी अगवान ने 2026 के चुनाव में 1,003 वोट हासिल किए। उन्होंने निर्दलीय प्रत्याशी अबरार अहमद को 734 वोट के अंतर से हराया। 48 वर्षीय अब्दुल्ला बीए स्नातक हैं। लगातार दो बार कांग्रेस के टिकट पर जीत और इस बार बड़ी बढ़त उनके राजनीतिक परिचय का प्रमुख हिस्सा है।

निर्दलीय से कांग्रेस तक का सफर

अब्दुल्ला ने 2014 में निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में नगर परिषद चुनाव लड़ा था, लेकिन जीत नहीं मिली। इसके बाद वे कांग्रेस से जुड़े। 2019 में कांग्रेस ने तत्कालीन पार्षद इकबाल जाजोदिया का टिकट बदलकर अब्दुल्ला अगवान को प्रत्याशी बनाया और उन्होंने चुनाव जीतकर पार्टी का भरोसा कायम रखा। 2026 में भी कांग्रेस ने उन्हें वार्ड 41 से टिकट दिया और उन्होंने फिर जीत दर्ज की। उनकी पत्नी शबाना अगवान को भी कांग्रेस ने वार्ड 53 से प्रत्याशी बनाया था, हालांकि वे चुनाव नहीं जीत सकीं। स्थानीय कांग्रेस की राजनीति में अब्दुल्ला को सांसद बृजेन्द्र ओला के करीबी नेताओं में गिना जाता है।

मनु धनकड़ : पहली बार चुनाव लड़ा, जीत के साथ सभापति की दौड़ में

भाजपा ने सभापति पद के लिए वार्ड 49 से निर्वाचित मनु धनकड़ को प्रत्याशी बनाया है। पेशे से चार्टर्ड अकाउंटेंट मनु ने पहली बार नगर परिषद का चुनाव लड़ा और जीत दर्ज की। वार्ड 49 में उन्हें 651 वोट मिले। उन्होंने निर्दलीय प्रत्याशी डॉ. कमलचंद सैनी को 400 वोट के अंतर से हराया।

भाजपा की ओर से वार्ड 49 से निर्वाचित मनु धनकड़ ने आवेदन दाखिल किया है

मनु धनकड़ का राजनीतिक परिचय झुंझुनूं विधायक राजेंद्र भांबू के दामाद के रूप में भी सामने आता है। चुनाव के दौरान यह संबंध स्थानीय राजनीतिक चर्चा का हिस्सा रहा। पहली बार पार्षद का चुनाव जीतने के बाद भाजपा ने उन्हें सभापति पद के लिए मैदान में उतारा है।

कांग्रेस का गणित : 30 सीटें, एक समर्थन जरूरी

कांग्रेस के पास 30 पार्षद हैं और बहुमत के लिए 31 का आंकड़ा चाहिए। ऐसे में उसे केवल एक अतिरिक्त पार्षद के समर्थन की जरूरत है। वीरेंद्र डारा के अब्दुल्ला अगवान के आवेदन में प्रस्तावक बनने से कांग्रेस के पक्ष में एक समर्थन स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। हालांकि सभापति चुनाव में अंतिम संख्या मतदान और आधिकारिक प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगी।

भाजपा का गणित : 15 सीटें, निर्दलीयों पर नजर

भाजपा के 15 पार्षद निर्वाचित हुए हैं। बहुमत के लिए उसे 16 और पार्षदों का समर्थन जुटाना होगा। ऐसे में भाजपा के लिए निर्दलीय पार्षदों की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। मनु धनकड़ के आवेदन के साथ सभापति पद का मुकाबला अब औपचारिक रूप से कांग्रेस और भाजपा के बीच सामने है। अंतिम फैसला पार्षदों के मतदान से होगा।

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