सीकर में 3 दिन शेखावाटी की खूबियों पर होगा मंथन:26 से 28 सितंबर तक देशभर के दिग्गज स्पीकर जुटेंगे; आर्कियोलॉजी एंड एपिग्राफी सोसाइटी का छठवां अधिवेशन
सीकर में 3 दिन शेखावाटी की खूबियों पर होगा मंथन:26 से 28 सितंबर तक देशभर के दिग्गज स्पीकर जुटेंगे; आर्कियोलॉजी एंड एपिग्राफी सोसाइटी का छठवां अधिवेशन
सीकर : सीकर में 26 से 28 सितंबर तक शेखावाटी के कल्चर, मंदिरों, शिलालेख, हवेलियों, पुरातत्व और फ्रेस्को पेंटिंग पर मंथन होगा। आयोजन मंडल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि आर्कियोलॉजी एंड एपिग्राफी सोसाइटी और त्रिलोक सिंह रिसर्च इंस्टीट्यूट के संयुक्त तत्वावधान में देश की 11 यूनिवर्सिटी के टॉप प्रोफेसर, स्पीकर और शोधकर्ता जुटेंगे।
3 दिवसीय नेशनल कांफ्रेंस में शेखावाटी के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक, प्राचीन भित्ति चित्रों और मूर्तिकला पर नए सिरे से शोध और चर्चा की जाएगी।
त्रिलोक सिंह रीसर्च एंड डवलपमेंट संस्थान के अध्यक्ष प्रोफेसर शिवराज सिंह ने बताया- एकेडमिक आयोजन में देश के विभिन्न इतिहासकार शेखावाटी के छिपे हुए ऐतिहासिक पहलुओं और नई खोज की संभावनाओं पर मंथन करेंगे। कॉन्फ्रेंस के पहले दिन उद्घाटन सत्र और की-नोट स्पीकर्स के सत्र होंगे। वहीं दूसरे दिन स्पीकर्स और आर्कियोलॉजी स्पेशलिस्ट शेखावाटी का भ्रमण करेंगे। तीसरे दिन अधिवेशन की थीम पर चर्चा-परिचर्चा और समापन सत्र होगा।

भारतीय पुरातत्व और शेखावाटी का योगदान रहेगी उद्घाटन सत्र की थीम
अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के विभागाध्यक्ष और आर्कियोलॉजी एंड एपिग्राफी सोसाइटी के प्रोफेसर बीएल भादाणी ने बताया- 26 सितंबर को उद्घाटन सत्र को मुख्य वक्ता डेक्कन यूनिवर्सिटी पुणे के पूर्व VC बसंत शिंदे, मुख्य अतिथि राजस्थान पुरातत्व विभाग के पंकज धरेंद्र और रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल जेपी नेहरा संबोधित करेंगे। उद्घाटन सत्र की थीम भारतीय पुरातत्व और उसमें शेखावाटी का योगदान होगी। पहले दिन कुल 3 सत्र होंगे।
सोसाइटी के डॉ. रितेश व्यास ने बताया- 27 सितंबर को सभी प्रोफेसर और स्पीकर शेखावाटी के पौराणिक व आर्कियोलॉजिकल स्पॉट हर्ष, जीणमाता, रैवासा, सकराय, नवलगढ़ की विजिट करेंगे। अधिवेशन के अंतिम दिन 28 सितंबर को कुल 3 सत्र होंगे। इसमें शेखावाटी की हवेलियों, पुरातत्व, फ्रेस्को पेंटिंग, मंदिर, वाटर सोर्सेज और शिलालेखों पर की-नोट प्रजेंटेशन होगी। प्रेस कॉन्फ्रेंस में एडवोकेट सूरजभान, केशरदेव नेहरा, बीएल भादाणी, श्याम लाल महर्षि डूंगरगढ़, डॉ. रितेश व्यास, डॉ. गोपाल व्यास आदि मौजूद थे।
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