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जिले में कुल 2400 मीट्रिक टन भंडारण क्षमता के कुल 13 गोदाम, किसानों को उपलब्ध होगी अपनी कृषि उपज को सुरक्षित एवं वैज्ञानिक तरीके से भंडारण करने की सुविधा


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जिले में कुल 2400 मीट्रिक टन भंडारण क्षमता के कुल 13 गोदाम, किसानों को उपलब्ध होगी अपनी कृषि उपज को सुरक्षित एवं वैज्ञानिक तरीके से भंडारण करने की सुविधा

जिले में कुल 2400 मीट्रिक टन भंडारण क्षमता के कुल 13 गोदाम, किसानों को उपलब्ध होगी अपनी कृषि उपज को सुरक्षित एवं वैज्ञानिक तरीके से भंडारण करने की सुविधा

जनमानस शेखावाटी सवांददाता : मोहम्मद अली पठान

चूरू : मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में ‘सहकार से समृद्धि’ की भावना साकार हो रही है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के संकल्पित प्रयासों से प्रदेश में सहकारिता क्षेत्र में अभूतपूर्व काम हो रहा है। ‘सहकार से समृद्धि‘ के मंत्र के साथ सहकारिता प्रदेश के किसानों, पशुपालकों, महिलाओं, युवाओं और ग्रामीण भारत के आर्थिक सशक्तीकरण का माध्यम बन गई है। इसी कड़ी में ग्राम सेवा सहकारी समितियों में भंडारण क्षमता वृद्धि से किसानों को सशक्त आधार है। चूरू जिले के दी चूरू सेन्ट्रल को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड द्वारा वित्तीय वर्ष 2025-26 में ग्रामीण कृषि अवसंरचना को सुदृढ़ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की गई है।

बैंक के सतत प्रयासों एवं समन्वय से ग्राम सेवा सहकारी समितियों में कुल 13 गोदामों की स्वीकृति प्राप्त हुई, जिनमें 500 मीट्रिक टन क्षमता के 02 गोदाम, 250 मीट्रिक टन क्षमता के 02 गोदाम तथा 100 मीट्रिक टन क्षमता के 07 गोदाम बन चुके हैं व 100 मीट्रिक टन क्षमता के 02 गोदाम निर्माणाधीन है। इन गोदाम निर्माण से जिले में कुल 2,400 मीट्रिक टन अतिरिक्त भंडारण क्षमता का सृजन हुआ है। इन गोदामों के निर्माण से स्थानीय कृषकों को अपनी कृषि उपज का सुरक्षित एवं वैज्ञानिक भंडारण करने की सुविधा उपलब्ध होगी।

अब किसानों को फसल कटाई के तुरंत बाद कम कीमतों पर उपज बेचने की विवशता नहीं रहेगी, बल्कि वे बाजार की अनुकूल परिस्थितियों की प्रतीक्षा कर उचित समय पर अपनी उपज का विक्रय कर बेहतर मूल्य प्राप्त कर सकेंगे। इससे किसानों की आय में वृद्धि होने के साथ-साथ फसल की गुणवत्ता एवं मात्रा में होने वाली भंडारणजनित हानि भी कम होगी।

इसके अतिरिक्त गोदामों के माध्यम से किसानों को कृषि ऋण, वेयरहाउस रसीद आधारित वित्तपोषण तथा अन्य सहकारी सेवाओं का लाभ अधिक प्रभावी ढंग से उपलब्ध कराया जा सकेगा। ग्राम सेवा सहकारी समितियों की आधारभूत संरचना मजबूत होने से ग्रामीण कृषि विपणन व्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी तथा स्थानीय कृषि अर्थव्यवस्था को दीर्घकालिक लाभ प्राप्त होगा।

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