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आधी फीस, दोगुना विश्वास बृज विश्वविद्यालय प्रदान कर रहा है उच्च शिक्षा में छात्राओं को आगे बढ़ने की पूरी आस


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आधी फीस, दोगुना विश्वास बृज विश्वविद्यालय प्रदान कर रहा है उच्च शिक्षा में छात्राओं को आगे बढ़ने की पूरी आस

अब खिलेगा हर बालिका का चेहरा, राजस्थान की उच्च शिक्षा में बालिका शिक्षा का परिदृश्य होगा सुनहरा

भरतपुर : उच्च शिक्षा में नवाचार का अर्थ केवल आधुनिक प्रयोगशालाएँ, डिजिटल तकनीक या नए पाठ्यक्रम का विकास नहीं होता है। वास्तविक नवाचार वह है जो उच्च शिक्षा को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाने का मार्ग प्रशस्त करे। जब कोई विश्वविद्यालय विद्यार्थियों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए ऐसे निर्णय लेता है, जो उच्च शिक्षा को अधिक सुलभ और समावेशी बनाता हैं, तब वह महज निर्णय नहीं होता, बल्कि उच्च शिक्षा समाज के भविष्य में निवेश होता है। इसी सोच को साकार करते हुए बृज विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो मदन सिंह राठौड़ ने छात्राओं की फीस में 50 प्रतिशत की कमी का निर्णय लेकर प्रदेश की उच्च शिक्षा में एक नई मिसाल कायम की है। कुलगुरु प्रो. मदन सिंह राठौड़ के नेतृत्व में लिया गया यह निर्णय आर्थिक रूप से कमजोर छात्राओं के लिए राहत का संदेश होने के साथ-साथ बालिका शिक्षा को प्रोत्साहन देने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। बृज विश्वविद्यालय द्वारा छात्राओं की फीस में 50 प्रतिशत की कमी का निर्णय इसी दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण और दूरगामी प्रभाव वाला कदम है। कुलगुरु प्रो. मदन सिंह राठौड़ द्वारा लिया गया यह निर्णय उच्च शिक्षा में नवाचार का एक सशक्त उदाहरण है। सामान्यतः नवाचार को तकनीकी परिवर्तन, नए पाठ्यक्रम या अनुसंधान तक सीमित माना जाता है, जबकि वास्तविक नवाचार वह है जो शिक्षा के द्वार अधिक से अधिक विद्यार्थियों के लिए खोल सके। फीस में उल्लेखनीय कमी इसी सोच का मूर्त रूप है।

प्रो.मदन सिंह राठौड़ ने कुलगुरु के रूप में छात्र-केंद्रित दृष्टिकोण अपनाते हुए यह संदेश दिया है कि विश्वविद्यालय केवल डिग्री प्रदान करने वाली संस्था नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन का सशक्त माध्यम भी है। उनके द्वारा लिया गया यह निर्णय दर्शाता है कि दूरदर्शी सोच और संवेदनशील नेतृत्व से उच्च शिक्षा में सकारात्मक बदलाव संभव है। यदि इस पहल से प्रेरणा लेकर प्रदेश के अन्य विश्वविद्यालय भी छात्रहित में ऐसे नवाचार अपनाते हैं, तो राजस्थान में उच्च शिक्षा का परिदृश्य और अधिक सशक्त हो सकता है। आर्थिक कारणों से शिक्षा से दूर रहने वाली असंख्य छात्राओं और उनके अभिभावकों को नई आशा मिलेगी और विशेष रूप से बेटियों के लिए उच्च शिक्षा का मार्ग अधिक सहज बनेगा। यहां यह भी ज्ञातव्य रहे कि बृज विश्वविद्यालय अपनी स्थापना के 14 वर्षो बाद भी निर्माण कार्य हेतु मिले अनुदान के अलावा सभी पाठ्यक्रमो का संचालन बिना स्थायी संकाय सदस्यों एवं कर्मचारियों के अभाव में और किसी भी प्रकार राजकीय एवं विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के आर्थिक सहयोग के बिना स्ववित्त पोषित योजना के तहत विधार्थी शुल्क से प्राप्त राजस्व से संचालित हो रहा है। ऐसे में विश्वद्यालय के राजस्व में होने वाली कमी के बावजूद भी बालिका शिक्षा हित में साहसिक निर्णय निश्चित रूप से मील का पत्थर साबित होगा।

प्रो. मदन सिंह राठौड़ का यह निर्णय राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 की उस भावना के अनुरूप है, जिसमें समान अवसर, समावेशी शिक्षा तथा उच्च शिक्षा तक व्यापक पहुँच सुनिश्चित करने पर विशेष बल दिया गया है। उच्च शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री प्रदान करना नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक वर्ग को आगे बढ़ने का अवसर उपलब्ध कराना भी है। उनकी यह पहल महिला सशक्तिकरण की दिशा में भी एक प्रभावी कदम सिद्ध होगी। जब किसी परिवार पर आर्थिक बोझ कम होता है, तो बेटियों की शिक्षा को प्राथमिकता मिलने की संभावना बढ़ जाती है। इससे प्रदेश में बालिकाओं का सकल नामांकन अनुपात बढ़ाने में भी सकारात्मक योगदान मिलेगा।बृज विश्वविद्यालय की यह पहल केवल फीस में कटौती भर नहीं है, बल्कि यह उस विश्वास की पुनर्स्थापना है कि उच्च शिक्षा प्रत्येक विद्यार्थी का अधिकार है, न कि केवल आर्थिक रूप से सक्षम वर्ग का विशेषाधिकार। छात्रहित, सामाजिक समावेशन और महिला शिक्षा के प्रति प्रतिबद्धता का यह निर्णय भविष्य में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में एक अनुकरणीय मॉडल के रूप में याद किया जाएगा।

आज भी राजस्थान के अनेक ग्रामीण और अर्धशहरी क्षेत्रों में आर्थिक अभाव छात्राओं की उच्च शिक्षा के मार्ग की सबसे बड़ी चुनौती है। राजस्थान सहित देश के अनेक क्षेत्रों में आज भी आर्थिक कारणों से अनेक विद्यार्थी, विशेषकर बेटियाँ, उच्च शिक्षा से वंचित रह जाती हैं। अनेक प्रतिभाशाली ग्रामीण छात्राएं महज इसलिए विश्वविद्यालय की चौखट तक नहीं पहुँच पाते क्योंकि फीस और अन्य शैक्षणिक खर्च उनके परिवार की क्षमता से बाहर होते हैं।परिवार सीमित संसाधनों के कारण अक्सर बेटियों की शिक्षा को आगे बढ़ाने में कठिनाई महसूस करते हैं। ऐसे में यदि विश्वविद्यालय स्वयं आर्थिक बोझ कम करने की पहल करता है, तो इससे बालिकाओं के नामांकन में वृद्धि होगी और महिला शिक्षा को नई गति मिलेगी। ऐसे में बृज विवि का फीस में आधी कमी का निर्णय अनगिनत छात्राओं के लिए उच्च शिक्षा के द्वार और अधिक सुगम और सुलभ बनाएगा। नि:संदेह इस निर्णय का सबसे सकारात्मक प्रभाव बालिकाओं की शिक्षा पर पड़ने की संभावना है। सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियों के कारण कई परिवार बेटियों की उच्च शिक्षा को लेकर असमंजस में रहते हैं। जब शिक्षा का खर्च कम होगा तो स्वाभाविक रूप से अधिक परिवार अपनी बेटियों को विश्वविद्यालय भेजने के लिए प्रेरित होंगे। इससे प्रदेश में बालिकाओं के नामांकन में वृद्धि होगी और महिला सशक्तिकरण को भी नई गति मिलेगी।

परिवार सीमित संसाधनों के कारण अक्सर बेटियों की शिक्षा को आगे बढ़ाने में कठिनाई महसूस करते हैं। ऐसे में यदि विश्वविद्यालय स्वयं आर्थिक बोझ कम करने की पहल करता है, तो यह केवल राहत नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना का संदेश भी है। इससे बालिकाओं के नामांकन में वृद्धि होगी और महिला शिक्षा को नई गति मिलेगी। कुलगुरु प्रो. मदन सिंह राठौड़ ने अपने कार्यकाल में शिक्षा को अधिक सुलभ, समावेशी और छात्र-केंद्रित बनाने की दिशा में जिस प्रकार के नवाचारों को प्रोत्साहित किया है, यह निर्णय उसी श्रृंखला की एक महत्वपूर्ण कड़ी है। यह केवल फीस में कमी नहीं, बल्कि शिक्षा के लोकतंत्रीकरण और सामाजिक उत्तरदायित्व का सशक्त उदाहरण है।यदि इस प्रकार की पहल अन्य विश्वविद्यालयों द्वारा भी अपनाई जाती है, तो प्रदेश में उच्च शिक्षा का परिदृश्य और अधिक सशक्त होगा तथा आर्थिक अभाव किसी भी विद्यार्थी, विशेषकर बेटियों, के सपनों के आड़े नहीं आएगा। बृज विश्वविद्यालय का यह निर्णय निस्संदेह उच्च शिक्षा में नवाचार, सामाजिक संवेदनशीलता और दूरदर्शी नेतृत्व का प्रेरणादायी उदाहरण है।

आज आवश्यकता केवल विश्वविद्यालयों की संख्या बढ़ाने की नहीं, बल्कि ऐसी नीतियाँ अपनाने की है जो विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा से जोड़ें। बृज विश्वविद्यालय ने यह संदेश दिया है कि यदि नेतृत्व दूरदर्शी और छात्र-केंद्रित हो तो सीमित संसाधनों में भी बड़े परिवर्तन संभव हैं। यह अपेक्षा की जानी चाहिए कि प्रदेश के अन्य विश्वविद्यालय भी इस प्रकार के छात्रहितैषी नवाचारों पर गंभीरता से विचार करे। यदि शिक्षा वास्तव में विकास का आधार है, तो उसे आर्थिक रूप से अधिक सुलभ बनाना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। बृज विश्वविद्यालय की यह पहल केवल फीस में कमी का निर्णय नहीं, बल्कि शिक्षा के माध्यम से सामाजिक न्याय, समान अवसर और महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक सार्थक हस्तक्षेप है। यदि इस निर्णय का प्रभाव अपेक्षित रूप से सामने आता है, तो यह आने वाले समय में प्रदेश की उच्च शिक्षा व्यवस्था के लिए एक अनुकरणीय मॉडल बन सकता है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 स्पष्ट रूप से उच्च शिक्षा में समान अवसर, समावेशिता और सकल नामांकन अनुपात बढ़ाने पर बल देती है। बृज विश्वविद्यालय का यह निर्णय इन उद्देश्यों को व्यवहारिक रूप देने का प्रयास प्रतीत होता है। शिक्षा को आर्थिक रूप से सुलभ बनाना केवल एक प्रशासनिक निर्णय नहीं, बल्कि सामाजिक उत्तरदायित्व का भी परिचायक है।

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