राम भरोसे फतेहपुर का प्रशासनिक सिस्टम नेताओं के खोखले वादों की खुली पोल
फ़तेहपुर में गहराया प्रशासनिक गतिरोध: मुख्य पदों की रिक्तता से जनसेवाएं बेपटरी, जन-असंतोष चरम पर... उपखंड अधिकारी, तहसीलदार और शहर पटवारी के पद लंबे समय से शून्य; 'अतिरिक्त प्रभार' की वैकल्पिक व्यवस्था जन-आकांक्षाओं पर साबित हो रही नाकाफी
जनमानस शेखावाटी सवांददाता : अनिल शेखीसर
फतेहपुर : फतेहपुर उपखंड में लंबे समय से शीर्ष प्रशासनिक पदों के रिक्त होने के कारण आमजन को बुनियादी सरकारी सेवाओं के लिए अभूतपूर्व संकट का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय नागरिकों, व्यापारिक संगठनों, कृषकों और छात्र समुदाय का स्पष्ट मत है कि उपखंड अधिकारी (SDM), तहसीलदार तथा शहर के पटवारी जैसे अत्यंत संवेदनशील पदों के रिक्त होने से संपूर्ण प्रशासनिक एवं राजस्व तंत्र की गतिशीलता थम सी गई है। इस संस्थागत शून्यता के कारण नागरिकों को अपने मूलभूत अधिकारों और कार्यों के लिए भी कार्यालयों के चक्कर काटने को विवश होना पड़ रहा है। खाली पड़े पद न केवल जनता के कामों की परेशानी के कारण बन रहे बल्कि नेताओं के खोखले वादों की बखिया भी उधेड़ रहे हैं।
संस्थागत समन्वय प्रभावित, नीतिगत निर्णय अधर में
उपखंड अधिकारी (एसडीएम) के पद की रिक्तता से न केवल क्षेत्रीय कानून-व्यवस्था की सतत निगरानी प्रभावित हो रही है, बल्कि विभिन्न अंतर्विभागीय प्रणालियों के बीच आवश्यक प्रशासनिक समन्वय भी बाधित है। उपखंड स्तर पर त्वरित नीतिगत निर्णय लेने और जनसमस्याओं के समयबद्ध निस्तारण के अभाव में आम नागरिकों का व्यवस्था पर से विश्वास डगमगा रहा है। महत्वपूर्ण फाइलें और जनहित से जुड़े मामले उच्च स्तर पर लंबित पड़े हैं।
राजस्व तंत्र में गतिरोध; ठप पड़े कृषक सरोकार
राजस्व प्रशासन के केंद्र बिंदु यानी तहसीलदार का नियमित पदस्थापन न होने से स्थितियां और अधिक जटिल हो गई हैं। भू-नामांतरण (म्यूटेशन), सीमाज्ञान, और राजस्व अभिलेखों के अद्यतन जैसे गंभीर मामलों के निस्तारण में अत्यधिक विलंब की शिकायतें निरंतर सामने आ रही हैं। इसके प्रत्यक्ष परिणामस्वरूप, किसान क्रेडिट कार्ड और फसलों से जुड़े वित्तीय लाभों के लिए कृषक वर्ग को आर्थिक और मानसिक दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
भौतिक सत्यापन अवरुद्ध; युवाओं के भविष्य पर असमंजस के बादल
शहरी क्षेत्र में नियमित पटवारी की अनुपलब्धता ने सीधे तौर पर युवा और छात्र वर्ग को प्रभावित किया है। वर्तमान में उच्च शिक्षा में प्रवेश, छात्रवृत्ति की पात्रता, और विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं व सरकारी भर्तियों के लिए आवेदन की समयसीमा चल रही है। ऐसे में जाति, मूल निवास तथा आय प्रमाण पत्रों के भौतिक सत्यापन का कार्य अवरुद्ध होने से युवाओं में भारी निराशा है; उनका भविष्य तकनीकी बाधाओं के कारण दांव पर लगा हुआ है।
‘अतिरिक्त प्रभार’ की व्यावहारिक सीमाएं और बढ़ता जन-आक्रोश
यद्यपि उच्च प्रशासन द्वारा ‘अतिरिक्त प्रभार’ के वैकल्पिक मार्ग से व्यवस्था को संचालित करने का प्रयास किया गया है, परंतु यह व्यवस्था पूरी तरह नाकाफी सिद्ध हुई है। संबंधित अधिकारी अपने मूल कार्यक्षेत्र की अत्यधिक व्यस्तताओं और उत्तरदायित्वों के कारण फतेहपुर उपखंड को न्यायसंगत समय देने में असमर्थ हैं। इस अंशकालिक व्यवस्था के कारण नागरिकों को बार-बार निराश होकर लौटना पड़ रहा है, जिससे जनता का धैर्य अब जवाब दे रहा है।
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