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मंदिर सिर्फ पत्थर और मूर्ति नहीं है, वो एक एनर्जी सेंटर है – कुड़ी


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मंदिर सिर्फ पत्थर और मूर्ति नहीं है, वो एक एनर्जी सेंटर है – कुड़ी

मंदिर सिर्फ पत्थर और मूर्ति नहीं है, वो एक एनर्जी सेंटर है - कुड़ी

जनमानस शेखावाटी सवांददाता : मनोहरपूर जाफर लोहानी

जयपुर : भामाशाह  मोहन कुड़ी ने कहा कि मंदिर के दर्शन का सबसे बड़ा लाभ तब है जब मंदिर से निकलकर बाहर भी वही शांति, सेवा और ईमानदारी रखो यह शब्द कुड़ी जी ने दी बार एसोसिशन जयपुर द्वारा जगन्नाथपूरी यात्रा 2026 का आयोजन के तहत शनिवार को 13 जून शनिवार कि शाम 6 बजे बनीपार्क रेलवे स्टेशन से सिविल लाइंस विधायक गोपाल शर्मा व जस्टिस अनिल उपमान के मौजुदगी में रवाना होने के बाद मे कहे!

कुड़ी ने कहा कि मंदिर सिर्फ पत्थर और मूर्ति नहीं है, वो एक एनर्जी सेंटर है। जगन्नाथपुरी यात्रा पर निकले बार एसोसिएशन के वकीलों से लेकर हर आम इंसान को दर्शन के ये फायदे मिलते हैं:

मन की शांति

कुड़ी जी ने बताया कि मंदिर की घंटी, शंख, आरती की आवाज़ और धूप की खुशबू दिमाग को रीसेट करती है। कोर्ट-कचहरी, घर की टेंशन सब कुछ देर के लिए साइड हो जाती है। मन को वो शांति मिलती है जो मेडिटेशन से भी नहीं मिलती।

पॉजिटिव एनर्जी

कुड़ी जी ने कहा कि हजारों साल से एक ही जगह पूजा-पाठ, भजन-कीर्तन होता है। उस जगह की वाइब्रेशन पॉजिटिव होती है। माना जाता है कि मूर्ति में वो एनर्जी स्टोर रहती है। दर्शन करते ही वो एनर्जी आप में ट्रांसफर होती है।

अहंकार टूटता है

कुड़ी जी ने कहा कि मंदिर में राजा और रंक, जज और मुजरिम सब एक लाइन में खड़े होते हैं। सब झुकते हैं। ये झुकना अहंकार तोड़ता है और इंसान को इंसान बनाता है। बार एसोसिएशन के वकील भी आज लाइन में लगते है ।

फोकस और संकल्प मजबूत होता है

कुड़ी जी ने कहा कि मंदिर में मन्नत मांगना मतलब अपने बोल को भगवान के सामने बोलना। जब आप दिल से कुछ मांगते हो तो आपका खुद का सबकॉन्शियस माइंड भी उस काम के लिए लग जाता है।

सामाजिक जुड़ाव और सेवा भाव

कुड़ी ने कहा कि मंदिर में दर्शन के बाद प्रसाद, लंगर, दान। ये सब आपको सिखाता है कि लेना नहीं, देना सीखो। जगन्नाथ मंदिर का महाप्रसाद दुनिया भर में फेमस है क्योंकि वहां जात-पात नहीं देखी जाती।

खास बात जगन्नाथ जी की

जगन्नाथ जी को ‘दीनबंधु’ कहते हैं। गरीब का भगवान। उनकी रथ यात्रा में रस्सी खींचने का मौका सबको मिलता है। मतलब: दर्शन का लाभ सिर्फ ब्राह्मण को नहीं, हर इंसान को। कुड़ी ने कहा कि दर्शन का सबसे बड़ा लाभ तब है जब मंदिर से निकलकर बाहर भी वही शांति, सेवा और ईमानदारी रखो।

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