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विश्व बाल श्रम निषेध दिवस पर चूरू में जागरूकता शिविर, ‘न्याय की झोपड़ी’ बनी आकर्षण का केंद्र


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विश्व बाल श्रम निषेध दिवस पर चूरू में जागरूकता शिविर, ‘न्याय की झोपड़ी’ बनी आकर्षण का केंद्र

विश्व बाल श्रम निषेध दिवस पर चूरू में जागरूकता शिविर, ‘न्याय की झोपड़ी’ बनी आकर्षण का केंद्र

जनमानस शेखावाटी सवांददाता : मोहम्मद अली पठान

चूरू : विश्व बाल श्रम निषेध दिवस के अवसर पर राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण जयपुर एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण चूरू के निर्देशानुसार जिलेभर में विधिक साक्षरता एवं जागरूकता शिविरों का आयोजन किया गया। शिविरों का उद्देश्य बाल श्रम जैसी सामाजिक बुराई को समाप्त करने और आमजन को कानूनी अधिकारों के प्रति जागरूक करना रहा।

शिविरों में ‘न्याय की झोपड़ी’ विशेष आकर्षण का केंद्र रही। इसके माध्यम से आमजन, बच्चों और ग्रामीणों को सरल भाषा में कानून की जानकारी दी गई। इस पहल से लोगों को अपनी समस्याएं साझा करने और विधिक सहायता समझने का सहज माध्यम मिला।

शिविरों में राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) की ‘बच्चों को मैत्रीपूर्ण विधिक सेवाएं और उनके संरक्षण के लिए योजना’ के बारे में जानकारी दी गई। पैरा लीगल वॉलंटियर्स ने बताया कि इस योजना का उद्देश्य बच्चों को अनुकूल न्याय प्रक्रिया उपलब्ध करवाना, संकटग्रस्त एवं शोषित बच्चों को निशुल्क कानूनी सहायता देना और उनका पुनर्वास सुनिश्चित करना है।

इस दौरान लोगों को बताया गया कि बाल श्रम एक दंडनीय अपराध है। बच्चों का स्थान कार्यस्थल पर नहीं बल्कि विद्यालयों में है। बच्चों को शिक्षा, सुरक्षा और बेहतर भविष्य का अधिकार है। किसी भी प्रतिष्ठान पर बच्चों से मजदूरी करवाने की सूचना मिलने पर कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है।

जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से आमजन से अपील की गई कि यदि कहीं कोई बच्चा मजदूरी करता दिखाई दे तो इसकी सूचना चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 या स्थानीय पुलिस को दें। बाल श्रम उन्मूलन को समाज की सामूहिक जिम्मेदारी बताया गया।

शिविरों को सफल बनाने में पैरा लीगल वॉलंटियर्स खुशी सैनी, विक्रम प्रजापत, रामावतार शर्मा, शाहिदा बानो, सुमन शर्मा सहित अन्य सदस्यों ने सहयोग किया और लोगों को जागरूक किया।

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