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किसानों का ट्रैक्टर मार्च, कोटपूतली-किशनगढ़ एक्सप्रेसवे निरस्त करने की मांग:किसान नेता बोले- आमजन को एक्सप्रेसवे की जरूरत नहीं


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किसानों का ट्रैक्टर मार्च, कोटपूतली-किशनगढ़ एक्सप्रेसवे निरस्त करने की मांग:किसान नेता बोले- आमजन को एक्सप्रेसवे की जरूरत नहीं

किसानों का ट्रैक्टर मार्च, कोटपूतली-किशनगढ़ एक्सप्रेसवे निरस्त करने की मांग:किसान नेता बोले- आमजन को एक्सप्रेसवे की जरूरत नहीं

जनमानस शेखावाटी सवांददाता : अशोक सिंह शेखावत

नीमकाथाना : नीमकाथाना में किसानों ने प्रस्तावित कोटपूतली-किशनगढ़ ग्रीन एक्सप्रेसवे को निरस्त करने की मांग को लेकर विशाल ट्रैक्टर रैली निकाली। ये विरोध प्रदर्शन भूदोली चौराहे के पास स्थित मालनगर बालाजी मंदिर से शुरू होकर शहर के मुख्य मार्गों से होते हुए अतिरिक्त जिला कलेक्टर (एडीएम) कार्यालय पहुंचा।

ग्रीन एक्सप्रेस वे परियोजना रद्द करने की मांग किसानों ने एडीएम भागीरथ साख को एक ज्ञापन सौंपकर परियोजना को तत्काल रद्द करने की मांग की। रैली से पहले एक बैठक भी हुई, जिसमें आगे की रणनीति पर चर्चा हुई।

मालनगर बालाजी मंदिर से शुरू हुई ट्रैक्टर रैली।
मालनगर बालाजी मंदिर से शुरू हुई ट्रैक्टर रैली।

इस ट्रैक्टर रैली में किसान महापंचायत के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामपाल जाट, प्रदेश अध्यक्ष मुसद्दीलाल यादव और जिला अध्यक्ष बलदेव यादव सहित बड़ी संख्या में किसानों ने भाग लिया। किसानों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए स्पष्ट किया कि वे अपनी कृषि भूमि का अधिग्रहण किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं करेंगे।

किसान नेताओं ने बताया कि ये परियोजना हजारों बीघा उपजाऊ कृषि भूमि को प्रभावित करेगी और किसानों की आजीविका पर सीधा असर डालेगी। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
ट्रैक्टर रैली मुख्य मार्गों से होते हुए एडीएम कार्यालय तक पहुंची।
ट्रैक्टर रैली मुख्य मार्गों से होते हुए एडीएम कार्यालय तक पहुंची।

नेता बोले- आमजन को एक्सप्रेस वे की जरूरत नहीं

किसान महापंचायत के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामपाल जाट ने कहा कि किसान अपनी जमीन बचाने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं। उन्होंने ‘जान दे देंगे, लेकिन जमीन नहीं देंगे’ का नारा लगाते हुए आरोप लगाया कि यह एक्सप्रेसवे आम जनता की जरूरत नहीं है, बल्कि कुछ खास लोगों के हितों को साधने के लिए बनाया जा रहा है।

जाट ने तर्क दिया कि पहले से ही एक समानांतर राजमार्ग मौजूद है और नए एक्सप्रेसवे से दूरी में केवल 12 से 13 किलोमीटर की कमी आएगी। इसके बावजूद, परियोजना के लिए लगभग 6,500 बीघा उपजाऊ भूमि का अधिग्रहण किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इससे किसानों की आजीविका प्रभावित होगी, हरियाली नष्ट होगी और पर्यावरण पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।

उन्होंने आगे कहा कि कंक्रीट और सीमेंट की नई सड़क बनने से वाहनों की आवाजाही बढ़ेगी, जिससे प्रदूषण में बढ़ेगा और पर्यावरणीय संकट गहरा सकता है। जब पहले से ही एक वैकल्पिक सड़क उपलब्ध है, तो नए एक्सप्रेसवे की आवश्यकता समझ से परे है।

देखें प्रदर्शन से जुड़े PHOTOS

किसानों ने ग्रीन एक्सप्रेसवे परियोजना रद्द करने की मांग की।
किसानों ने ग्रीन एक्सप्रेसवे परियोजना रद्द करने की मांग की।
किसानों ने नीमकाथाना एडीएम भागीरथ साख को ज्ञापन सौंपकर परियोजन रद्द करने की मांग की।
किसानों ने नीमकाथाना एडीएम भागीरथ साख को ज्ञापन सौंपकर परियोजन रद्द करने की मांग की।

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