गैंगस्टर बलबीर बानूड़ा का बेटा सुभाष बरी:पिता की मौत का बदला लेने के लिए फायरिंग की थी; जेल में ही रहेगा
गैंगस्टर बलबीर बानूड़ा का बेटा सुभाष बरी:पिता की मौत का बदला लेने के लिए फायरिंग की थी; जेल में ही रहेगा
सीकर : सीकर की SC-ST कोर्ट ने साल 2018 में मनोज ओला पर हुई फायरिंग के मामले में गैंगस्टर बलबीर बानूड़ा का बेटा सुभाष बानूड़ा और उसके सहयोगी सीताराम सेवदा को बरी कर दिया है। मंगलवार को अजमेर की हाई सिक्योरिटी जेल से कड़ी सुरक्षा के बीच बलबीर बानूड़ा को सीकर कोर्ट परिसर में लाया गया। फिर कड़ी सुरक्षा के बीच वापस भेज दिया गया।
आरोपियों के वकील रघुनाथराम सुला ने बताया- सुभाष बानूड़ा और सीताराम सेवदा को साल 2018 में मनोज ओला पर हुई फायरिंग के मामले में बरी कर दिया गया है। कोर्ट में पीड़ित पक्ष इनकी पहचान ही नहीं कर पाया। ऐसे में दोनों को बरी कर दिया गया है। हालांकि आनंदपाल को पुलिस कस्टडी से फरार करवाने के मामले में सुभाष बानूड़ा जेल में ही रहेगा।
बता दें कि सुभाष बानूड़ा ने अपने साथी रामनिवास, संदीप सैनी, नटवरलाल, चचेरे भाई पवन और सीताराम सेवदा के साथ मिलकर 9 अगस्त 2018 को दुकान पर बैठे हुए राजू ठेहट गैंग के मनोज ओला पर फायरिंग की थी, उसे छह गोलियां लगी थीं।
मामले में पुलिस ने सभी आरोपियों को गिरफ्तार करके कोर्ट में चालान पेश कर दिया, लेकिन जमानत मिलने के बाद 20 अगस्त 2025 को सुभाष बानूड़ा और 31 अक्टूबर 2025 को सीताराम सेवदा को फरार घोषित कर दिया गया था। क्योंकि दोनों ही केस की तारीखों पर नहीं पहुंच रहे थे।
नवंबर में सरेंडर किया
18 से 20 नवंबर 2025 के बीच मनोज ओला पर फायरिंग के मामले में सुभाष बानूड़ा ने सीकर की एससी-एसटी कोर्ट में सरेंडर कर दिया था। वहीं, सीताराम सेवदा को गिरफ्तार कर लिया गया था। सुभाष बानूड़ा का ठेहट मर्डर और सिद्धू मूसेवाला हत्याकांड में भी नाम सामने आया था।
दोनों ही मामलों में उससे पूछताछ हुई, लेकिन उसके खिलाफ कोई भी सबूत पुलिस को नहीं मिला। इसलिए उसे आरोपी नहीं माना गया। जमानत के बाद सुभाष अपने गांव बानूड़ा और जयपुर में रहा था।
पिता की मौत का बदला लेने गैंग में शामिल हुआ
पिता की मौत का बदला लेने के लिए सुभाष ने आनंदपाल गैंग जॉइन की। 13 मार्च 2015 को वह अपने पिता बलबीर के साथियों के साथ फार्म हाउस पर बैठा था। जब पुलिस ने वहां पर दबिश दी। तब सुभाष वहां से फरार हो गया। पुलिस ने मौके से 6 लोगों को गिरफ्तार किया था। पुलिस को मौके से कई हथियार भी मिले थे। ऐसे में पुलिस ने उसे आर्म्स एक्ट के मामले में आरोपी माना।
पहले भी कर चुका सरेंडर
24 जून 2017 में को आनंदपाल की मौत होने के बाद सुभाष ने अपने पिता के ही दोस्त सुभाष बराल के लिए काम करना शुरू कर दिया था। इसके बाद सुभाष पर फायरिंग और मारपीट के कई मामले दर्ज हुए। पुलिस लगातार उसकी तलाश कर रही थी, लेकिन करीब डेढ़ साल बाद सुभाष ने SOG ऑफिस पहुंचकर आईजी दिनेश एमएन के सामने सरेंडर कर दिया था।
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