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आंधी भी नहीं डिगा सकी हौसले: हवाई पट्टी पर किसानों का हल्ला बोल, बोले- आखिरी सांस तक लड़ेंगे जमीन और जीविका की लड़ाई


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आंधी भी नहीं डिगा सकी हौसले: हवाई पट्टी पर किसानों का हल्ला बोल, बोले- आखिरी सांस तक लड़ेंगे जमीन और जीविका की लड़ाई

तारपुरा हवाई पट्टी पर तीसरे दिन भी डटे किसान, महिलाओं ने संभाली आंदोलन की कमान, सोमवार को कलेक्ट्रेट पर होगा शांतिपूर्ण प्रदर्शन, प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के नाम सौंपेंगे ज्ञापन

जनमानस शेखावाटी सवांददाता : शैलेंद्र पारीक

तारपुरा : तारपुरा हवाई पट्टी को प्रस्तावित ग्रीन फील्ड एयरपोर्ट बनाने के विरोध में किसानों का आंदोलन अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचता दिखाई दे रहा है। अपनी जमीन और आजीविका बचाने की लड़ाई लड़ रहे किसान लगातार तीसरे दिन भी हवाई पट्टी पर धरने पर डटे रहे। आंदोलन की सबसे खास बात यह रही कि अब पुरुषों के साथ गांव की महिलाएं और युवतियां भी खुलकर संघर्ष के मैदान में उतर आई हैं।

सरकार द्वारा तारपुरा और दादिया पंचायत क्षेत्र की करीब 4050 बीघा जमीन को प्रस्तावित हवाई अड्डे के लिए चिन्हित किए जाने से हजारों किसानों के सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया है। इसी को लेकर किसानों में भारी आक्रोश है और वे “खेत बचाओ-जीविका बचाओ” आंदोलन के तहत लगातार संघर्ष कर रहे हैं।

तीसरे दिन धरने की अगुवाई गांव की महिलाओं ने संभाली। किसानों के चेहरों पर अपनी जमीन छिनने का दर्द साफ नजर आया, वहीं आंखों में संघर्ष का जज्बा भी दिखाई दिया। शाम को आई तेज आंधी के बीच भी किसानों का जोश, जुनून और जिद कायम रही। तेज हवाओं के बावजूद किसान धरना स्थल से नहीं हटे और संघर्ष जारी रखने का संकल्प दोहराया।

धरने को संबोधित करते हुए सरपंच प्रतिनिधि सुरजीत भींचर ने कहा कि किसानों को एकजुट होकर लंबी लड़ाई लड़नी होगी। पूर्व सरपंच श्रवण सिंह शेखावत ने तन-मन-धन से सहयोग करने का आह्वान करते हुए आंदोलन को मजबूत बनाने पर जोर दिया।

किसान नेता विजेंद्र सिंह काजला ने किसानों का मनोबल बढ़ाते हुए कहा कि सरकार किसानों की जीविका बचाते हुए वैकल्पिक जमीन तलाश कर एयरपोर्ट बनाए। उन्होंने कहा कि किसानों की जमीन किसी भी कीमत पर छीनी नहीं जाने दी जाएगी।

एडवोकेट मधुसूदन शर्मा ने आंदोलन की कानूनी लड़ाई पर जोर देते हुए कहा कि सरकार और प्रशासन को किसानों की समस्याओं से अवगत कराया जाएगा तथा हर स्तर पर किसानों के अधिकारों की रक्षा की जाएगी।

धरने में बैठी महिलाओं में सुमन भास्कर, भगवानी देवी, परमेश्वरी पलसानिया, परमेश्वरी जांगिड़, भागोती देवी, कमला ढाका, विनोद देवी, सुनीता ढाका, बबीता भास्कर और पिंकी भाखर सहित बड़ी संख्या में महिलाएं शामिल रहीं।

वहीं धरने में बृज सुंदर आर्य, रामलाल मातवा, गुमान सिंह, रणजीत सिंह, मामचंद, रामेश्वर बलाई, नागर मल, रेवत सिंह, श्रवण सिंह फौजी, गजेंद्र सिंह शेखावत, पप्पू पाल सिंह, मुकेश कड़वासरा, सुरेंद्र शर्मा, बलजी दादिया सहित सैकड़ों किसान मौजूद रहे।

सोमवार को कलेक्ट्रेट पर होगा प्रदर्शन

मीडिया प्रभारी पंकज शर्मा और किसान संघर्ष समिति के संरक्षक विजेंद्र सिंह काजला ने बताया कि तारपुरा और दादिया के सर्वे से प्रभावित किसान सोमवार 18 मई को जिला कलेक्ट्रेट पहुंचकर कलेक्टर आशीष मोदी को प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपेंगे तथा जमीन बचाने की गुहार लगाएंगे।

धरना स्थल पर “भारत माता की जय”, “जय जवान-जय किसान”, “इंकलाब जिंदाबाद” और “किसान एकता जिंदाबाद” के नारों से माहौल देर तक गूंजता रहा।

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