पूर्व मंत्री के भाई सहित दो इनामी गिरफ्तार:थाने पर हमला और राजकार्य में बाधा का आरोप, अन्य की तलाश जारी, कोर्ट ने जेल भेजा; 39 बरी
पूर्व मंत्री के भाई सहित दो इनामी गिरफ्तार:थाने पर हमला और राजकार्य में बाधा का आरोप, अन्य की तलाश जारी, कोर्ट ने जेल भेजा; 39 बरी
गुढ़ागौड़जी : झुंझुनूं में थाने में पथराव और हिंसा करने के मामले में कोर्ट का 8 साल बाद फैसला आया है। इसमें पूर्व मंत्री राजेंद्र सिंह गुढ़ा के छोटे भाई संजय सिंह उर्फ संजय गुढ़ा को गिरफ्तार किया गया है। वह घटना के बाद से फरार चल रहा था। संजय सिंह के साथ मामले में आरोपी बनाए गए 2 अन्य को भी जेल हुई है।
कोर्ट ने गुढ़ा को युवती की किडनैपिंग के मामले में थाने में भीड़ को उकसाने और हिंसा का नेतृत्व करने का दोषी माना है। मामले में गुढ़ागौड़जी थाने के SHO और एक कॉन्स्टेबल घायल हुए थे।
कोर्ट ने भेजा जेल
गुढ़ागौड़जी SHO सुरेश रोलन ने बताया- गिरफ्तार आरोपियों को कोर्ट में पेश किया था। यहां से कोर्ट ने इन्हें जेल भेज दिया। टीम ने मुखबिर की सूचना पर दबिश देकर संजय सिंह उर्फ संजय गुढ़ा, मोहम्मद जावेद (छावसरी) और धर्मेन्द्र सिंह उर्फ कुकी (हुकमपुरा) को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने इन पर 2-2 हजार रुपए का इनाम घोषित कर रखा था। अपर जिला एवं सेशन न्यायाधीश ने इस मामले की सुनवाई पूरी करते हुए फैसला सुनाया है।
फैसले के बाद से फरार थे पूर्व मंत्री के भाई
जानकारी के अनुसार, इस प्रकरण का फैसला 13 अप्रैल को ही आ चुका था। कोर्ट ने सबूतों के अभाव में इस मामले में नामजद 39 आरोपियों को बरी कर दिया था। कोर्ट ने माना कि अभियोजन पक्ष (पुलिस) आरोपियों के खिलाफ ठोस सबूत पेश करने में नाकाम रहा।
ट्रायल के दौरान 3 आरोपियों की मृत्यु हो गई थी। 39 लोगों को कोर्ट ने दोषमुक्त करार दिया था। इसमें फरार 3 आरोपियों को आज कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया गया। संजय गुढ़ा पर भीड़ को उकसाने और हिंसा का नेतृत्व करने का आरोप था। जब 13 अप्रैल को अन्य 39 आरोपियों का फैसला आया, तब संजय गुढ़ा और अन्य दो साथी फरार थे, इसलिए उनके खिलाफ कानूनी प्रक्रिया अटकी हुई थी।


ये था पूरा मामला
- यह पूरा मामला साल 2018 का है। 3 अगस्त 2018 को गुढ़ागौड़जी क्षेत्र की एक युवती के अपहरण का मामला दर्ज हुआ था। ग्रामीणों का आरोप था कि पुलिस कार्रवाई नहीं कर रही है।
- 14 अगस्त 2018 को युवती की बरामदगी की मांग को लेकर सैकड़ों ग्रामीण थाने के बाहर जमा हुए। शुरुआत में प्रदर्शन शांत था, लेकिन देखते ही देखते भीड़ उग्र हो गई।
- भीड़ ने थाने के भीतर घुसकर पत्थरबाजी और लाठियों से हमला कर दिया। इस हिंसा में तत्कालीन थानाधिकारी अशोक कुमार और कांस्टेबल नरेश कुमार गंभीर रूप से घायल हुए थे।
- उपद्रवियों ने सरकारी फाइलों को फाड़ दिया, फर्नीचर तोड़ा और परिसर में खड़े सरकारी वाहनों को भी क्षतिग्रस्त कर दिया था।
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