स्मेल्टर चिमनी को ‘औद्योगिक धरोहर’ घोषित करने की मांग, SDM को सौंपा ज्ञापन
खेतड़ी की ऐतिहासिक स्मेल्टर चिमनी को ‘औद्योगिक धरोहर’ घोषित करने की मांग, ध्वस्तीकरण पर रोक लगाने की अपील
खेतड़ी : खेतड़ी स्थित हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड के खेतड़ी कॉपर कॉम्प्लेक्स की ऐतिहासिक स्मेल्टर चिमनी को “औद्योगिक धरोहर” घोषित करने और प्रस्तावित ध्वस्तीकरण पर रोक लगाने की मांग को लेकर स्थानीय लोगों ने एसडीएम को ज्ञापन सौंपा।
खेतड़ीवासियों ने यह ज्ञापन महामहिम राष्ट्रपति एवं राजस्थान उच्च न्यायालय, जयपुर के मुख्य न्यायाधीश के नाम सामूहिक हस्ताक्षरयुक्त ज्ञापन सौंपकर हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड के खेतड़ी कॉपर काम्पलेक्स स्थित स्मेल्टर प्लांट की ऐतिहासिक चिमनी को राष्ट्रीय औद्योगिक स्मारक घोषित करने तथा इसके प्रस्तावित विध्वंस पर तत्काल रोक लगाने की मांग की। उनका कहना है कि यह चिमनी केवल एक औद्योगिक ढांचा नहीं, बल्कि क्षेत्र की ऐतिहासिक पहचान और हजारों परिवारों की भावनाओं से जुड़ी विरासत है।
ज्ञापन में मांग की गई कि इस ऐतिहासिक धरोहर को संरक्षित कर इसे औद्योगिक स्मारक के रूप में विकसित किया जाए, ताकि आने वाली पीढ़ियां अपने औद्योगिक इतिहास से परिचित हो सकें। संयोजक रमेश पाण्डे सहित फतेहसिंह बडाऊ, विमल कुमार शर्मा, नरेंद्र सिंह शेखावत, सुरेंद्र फौजी, प्रेम छापोला, जसवंत सिंह, श्रवण सेन, श्यामलाल गुर्जर, रेखा सैनी, हिमांशु सैनी, राजकुमार सिंह निर्वाण व डालचंद चंचलानी ने कहा कि इस ऐतिहासिक चिमनी को लंबे समय से औद्योगिक धरोहर घोषित करने की मांग की जा रही है, लेकिन अब एचसीएल प्रबंधन द्वारा इसे हटाने की योजना बनाई जा रही है।
ऐतिहासिक महत्व
खेतड़ी कॉपर कॉम्प्लेक्स की स्थापना वर्ष 1967 में देश को तांबा उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से की गई थी। वर्ष 1973 के आसपास स्थापित स्मेल्टर प्लांट की यह चिमनी लगभग 114 मीटर (397 फीट) ऊंची है, जो उस दौर की आधुनिक तकनीक और उत्कृष्ट इंजीनियरिंग का प्रतीक मानी जाती है। यह चिमनी आज भी क्षेत्र के औद्योगिक स्वर्णिम इतिहास की साक्षी है।

“मिनी चंडीगढ़” रहा खेतड़ी
कॉम्प्लेक्स के साथ विकसित टाउनशिप कभी सुव्यवस्थित आवास, स्कूल, अस्पताल, बाजार और खेल सुविधाओं के कारण “मिनी चंडीगढ़” के रूप में प्रसिद्ध रही। यहां हजारों परिवारों का जीवन इस औद्योगिक इकाई से जुड़ा रहा।
नीतिगत फैसलों से पतन
समय के साथ नीतिगत निर्णयों और प्लांट बंद होने के कारण रोजगार के अवसर समाप्त हुए और टाउनशिप धीरे-धीरे वीरान होती गई। आज उस गौरवशाली दौर की प्रमुख पहचान के रूप में यही स्मेल्टर चिमनी शेष बची है।
ध्वस्तीकरण का खतरा
जानकारी के अनुसार स्मेल्टर प्लांट को हटाने के लिए निजी एजेंसी को कार्य सौंपा गया है, जिसके तहत इस ऐतिहासिक चिमनी को भी गिराने की योजना है। इसे लेकर क्षेत्र में चिंता और विरोध बढ़ रहा है।

जनभावनाएं और मांग
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह चिमनी केवल एक संरचना नहीं, बल्कि हजारों परिवारों की स्मृतियों, संघर्ष और पहचान का प्रतीक है। यदि इसे हटाया गया तो क्षेत्र की ऐतिहासिक पहचान समाप्त हो जाएगी और आने वाली पीढ़ियां अपने औद्योगिक इतिहास से वंचित रह जाएंगी।
प्रमुख मांगें
- स्मेल्टर चिमनी को “औद्योगिक धरोहर” घोषित किया जाए
- प्रस्तावित ध्वस्तीकरण पर तत्काल रोक लगाई जाए
- इसे औद्योगिक स्मारक के रूप में संरक्षित किया जाए
- क्षेत्र को औद्योगिक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित किया जाए
- राज्य सरकार, जिला प्रशासन और कंपनी के संयुक्त प्रयास से संरक्षण योजना बनाई जाए
भावनात्मक जुड़ाव
स्थानीय लोगों का मानना है कि जैसे कुतुब मीनार, हवा महल और विजय स्तंभ अपनी-अपनी जगहों की पहचान हैं, उसी प्रकार खेतड़ी की यह स्मेल्टर चिमनी क्षेत्र की ऐतिहासिक पहचान है। लोगों ने “चिमनी बचाओ अभियान” के तहत इस विरासत को संरक्षित करने की मांग करते हुए प्रशासन से संवेदनशील निर्णय लेने की अपील की है।
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