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सावधान : ​फिटनेस-इंश्योरेंस खत्म, तो स्कूल में हैं आपका ‘वेलकम’, ​शिक्षा के नाम पर ‘मौत का ट्रांसपोर्ट’: रसूखदारों के आगे नतमस्तक सिस्टम?, खाकी की नाक के नीचे कबाड़ वाहिनियों का तांडव


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सावधान : ​फिटनेस-इंश्योरेंस खत्म, तो स्कूल में हैं आपका ‘वेलकम’, ​शिक्षा के नाम पर ‘मौत का ट्रांसपोर्ट’: रसूखदारों के आगे नतमस्तक सिस्टम?, खाकी की नाक के नीचे कबाड़ वाहिनियों का तांडव

मासूम बच्चों को करवाया जा रहा मौत का सफर'...! ​रसूख के आगे नतमस्तक दिख रहा सिस्टम...! फतेहपुर में बेखौफ दौड़ रही कबाड़ काल वाहिनियां... ​खाकी खामोश.. परिवहन विभाग लगा ट्रकों के पीछे..?

जनमानस शेखावाटी सवंददाता : आबिद खान

फतेहपुर : ​एक ओर जहाँ राजस्थान पुलिस जिले भर में ‘सड़क सुरक्षा अभियान’ के बड़े-बड़े पोस्टर लगाकर अपनी पीठ थपथपा रही है, वहीं दूसरी ओर सीकर के फतेहपुर में खाकी की नाक के नीचे ‘मौत का व्यापार’ धड़ल्ले से चल रहा है। मासूम बच्चों को कबाड़ वाहनों में भरकर मौत का सफर करवाने वाले ये स्कूल संचालक न केवल कानून का मजाक उड़ा रहे हैं, बल्कि फतेहपुर की पुलिस और परिवहन विभाग की कार्यक्षमता को भी ठेंगा दिखा रहे हैं।

दस्तावेजों ने सालों पहले तोड़ा दम, पर सड़क पर कायम है ‘तांडव’
​हैरानी की बात तो यह है कि फतेहपुर की ग्लोबल स्कूल का एक वाहन (RJ 23 TA 1982) पिछले एक दशक से अधिक समय से ‘अवैध’ तरीके से सड़कों पर कबाड़ बनकर दौड़ रहा है। इस वाहन का फिटनेस दिसंबर 2014 में खत्म हो चुका है और इंश्योरेंस ने तो 30 अगस्त 2013 को ही दम तोड़ दिया था। जिस गाड़ी को सालों पहले कबाड़खाने में होना चाहिए था, उसमें मासूम बच्चों को भरकर स्कूल प्रबंधन उनकी जिंदगी के साथ मौत का खेल रहा है। आखिर किसकी शह पर यह कबाड़ सड़कों पर मासूमों की जान का सौदा कर रहा है?

​हेलमेट पर सख्ती, स्कूलों पर ‘भक्ति? पुलिस की दोहरी नीति पर उठे सवाल..?
​फतेहपुर की सड़कों पर कानून का दोहरा चेहरा नजर आ रहा है। अगर कोई आम नागरिक गलती से हेलमेट घर भूल जाए या लाइसेंस साथ न हो, तो कानून के रखवाले उसे मोटर व्हीकल एक्ट का पाठ’ पढ़ाने में जरा भी देरी नहीं करते। भारी-भरकम चालान काटकर टारगेट पूरे किए जाते हैं। लेकिन जब बात रसूखदार स्कूल संचालकों की आती है, तो पुलिस और परिवहन विभाग की मुस्तैदी ‘मौन’ में बदल जाती है।

​परिवहन विभाग के इंस्पेक्टर पूरी-पूरी रात हाईवे पर ट्रकों के पीछे दौड़ते नजर आते हैं, लेकिन शहर के बीचों-बीच दौड़ते इन ‘बिना फिटनेस वाले कबाड़ ताबूतों’ पर उनकी नजर क्यों नहीं पड़ती? क्या वर्दी का रौब सिर्फ निहत्थी जनता के लिए है और स्कूल संचालकों के रसूख के आगे कानून के हाथ बंधे हुए हैं? या फिर रसूख के आगे सिस्टम ने हार मान ली हैं?

​पीली प्लेट का नियम गायब, सफेद प्लेट पर ‘अवैध’ सवारी
​नियम कहते हैं कि स्कूल वाहन का रंग पीला और नंबर प्लेट कमर्शियल होनी चाहिए। मगर यहाँ तो अंधेर नगरी है! वाहन टैक्सी नंबर होने के बावजूद यह गाड़ी सफेद प्लेट और निजी रंग में धड़ल्ले से बच्चों को ढो रही है। न फिटनेस, न इंश्योरेंस और न ही PUC—यह वाहन सिर्फ धुआं नहीं, बल्कि पुलिस प्रशासन की नाकामी का जीता जागता प्रमाण हैं।

​क्या किसी बड़े हादसे का इंतज़ार है?
​भले ही कोतवाल महेंद्र मीणा की कार्रवाई की चर्चा हो, लेकिन शहर के बीचों-बीच कबाड़ बनकर दौड़ती ये ‘काल वाहिनियां’ चीख-चीख गवाही दे रही हैं कि जमीनी हकीकत कुछ और ही है। पुलिस की यह चुप्पी किसी भी दिन फतेहपुर के किसी घर का चिराग बुझा सकती है।

​क्या खाकी की कार्रवाई महज हेलमेट और बाइक चालको तक सीमित रह गई हैं?
क्योंकि फतेहपुर में आए दिन दौड़ती ये कबाड़ बाल वाहिनियां चीख चीख कर कह रही हैं कि इन्हे किसी का खोफ नही हैं। क्या कोतवाल और परिवहन विभाग के इंस्पेक्टर इन कबाड़ वाहनों को एक अभियान चलाकर कबाड़खाने भेजकर अपनी जिम्मेदारी निभाएंगे? ​या फिर प्रशासन किसी मासूम की जान जाने के बाद ही कागजी कार्रवाई करेगा। भले ही एसपी सीकर के सड़क सुरक्षा अभियान की सूबे में चर्चा हो मगर मौत बनकर दौड़ते ये वाहन सवाल खड़े कर रहे हैं

​जब रसूख का साया वर्दी पर भारी पड़ने लगे, तो समझ लेना चाहिए कि जनता की सुरक्षा अब भगवान भरोसे है। अब देखना यह है कि इस रिपोर्ट के बाद एक अभियान के तहत खाकी कानून का डंडा इन रसूखदारों पर चल पाती है या नही या फिर परिवहन विभाग हमेशा की तरह ट्रकों के पीछे ही दौड़ता रहेगा।

आमजन फतेहपुर पुलिस से मांग कर रहा हैं कि एक अभियान के तहत सभी स्कूली वाहनों को चेक किया जाए और बच्चो की सुरक्षा पर ध्यान दिया जाए और जिनके दस्तावेज नही हैं उन्हें सीज से बच्चो की जान बचाई जाए

इन्होंने कहा 
मेने खूब कार्रवाई की हैं। ऐसा नहीं हैं, मेने कई बार स्कूली बसों को चेक किया हैं और कई बसों पर कार्रवाई भी की गई हैं हमारा अभियान लगातार जारी हैं ऐसे वाहनों को किसी भी हाल में माफ नही किया जाएगा शख्त कार्रवाई की जायेगी चाहे वह किसी का भी वाहन क्यों ना हो। कल से फिर सभी को चेक करते हैं। – हनुमाना राम तरड़, मोटर व्हीकल इंस्पेक्टर फतेहपुर

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