रीढ़ का टीला: प्राचीन ‘पटन’ शहर के अवशेष, साइट म्यूजियम की संभावनाएं प्रबल
रीढ़ का टीला: प्राचीन ‘पटन’ शहर के अवशेष, साइट म्यूजियम की संभावनाएं प्रबल
खेतड़ी : उपखंड क्षेत्र की त्योंदा ग्राम पंचायत स्थित रीढ़ का टीला इन दिनों पुरातात्विक महत्व के कारण चर्चा में है। यहां प्राचीन ‘पटन’ शहर के अवशेष दबे होने के संकेत मिले हैं, जिनका उत्खनन कार्य जनवरी 2026 से जारी था। भीषण गर्मी के चलते फिलहाल खुदाई कार्य रोक दिया गया है, जिसे अब आगामी सत्र में नवंबर से दोबारा शुरू किए जाने की संभावना है।

पुरातत्व विभाग के पुरान्वेषण एवं उत्खनन अधिकारी डॉ. विवेक शुक्ला ने वरिष्ठ पत्रकार एवं इतिहासकार गोविंद राम हरितवाल से बातचीत में बताया कि अब तक के उत्खनन में नगर के उत्तर-पश्चिम दिशा में प्रवेश द्वार होने के संकेत मिले हैं। साथ ही संभावना जताई गई है कि पूरे नगर के चारों ओर सुरक्षा के लिए परकोटा रहा होगा, जिसकी पुष्टि पूर्ण उत्खनन के बाद ही हो सकेगी।
अब तक मिले साक्ष्यों से यह स्थान एक समृद्ध प्राचीन शहर रहा होने के प्रमाण सामने आए हैं। यहां मिले मंदिरों के अवशेष उस समय की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं को दर्शाते हैं।
साइट म्यूजियम की तैयारी
डॉ. पंकज धरेन्द्र ने बताया कि इस ऐतिहासिक स्थल पर साइट म्यूजियम स्थापित करने के लिए व्यापक कार्य योजना तैयार कर राज्य सरकार को भेजी जाएगी, जिससे क्षेत्र का समन्वित विकास संभव हो सके। वहीं डॉ. विनीत गोधल ने इस स्थल को भविष्य में बहुसांस्कृतिक केंद्र के रूप में विकसित किए जाने की संभावना जताई है।

गहराई में मिला समृद्ध इतिहास
उत्खनन टीम के सदस्य डॉ. महेश सामोता ने बताया कि खुदाई में अब तक मिट्टी की 19वीं परत तक पहुंचा जा चुका है, जहां मानव बसावट के स्पष्ट संकेत मिले हैं। इतनी गहराई तक अवशेष मिलना इस बात का प्रमाण है कि यह स्थल सदियों तक एक जीवंत नगर रहा है।
खुदाई में प्राचीन दीवारों के अवशेष, कुषाण काल की ईंटें (जिन पर उंगलियों के निशान मौजूद हैं), टेराकोटा के टुकड़े तथा अन्य पुरावशेष मिले हैं, जो उस समय की उन्नत निर्माण कला और सामाजिक-आर्थिक जीवन को दर्शाते हैं।
इसके अलावा गुर्जर-प्रतिहार काल के मंदिर अवशेष भी यहां से प्राप्त हुए हैं, जिन्हें बाद में मुगल काल में नष्ट किए जाने के संकेत मिलते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि रीढ़ का टीला प्राचीन समय में किसी महत्वपूर्ण व्यापारिक या प्रशासनिक केंद्र के रूप में विकसित रहा होगा, जो आज भी अपने गर्भ में इतिहास की अनमोल धरोहर समेटे हुए है।
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