चांदी के सिक्कों से चर्चा में आया गुरारा, 2744 प्राचीन मुद्राओं की हुई थी खोज
चांदी के सिक्कों से चर्चा में आया गुरारा, 2744 प्राचीन मुद्राओं की हुई थी खोज
श्रीमाधोपुर : शेखावाटी अंचल के सीकर जिले के गुरारा गांव को वर्ष 1998-99 में मिली चांदी के प्राचीन सिक्कों की खोज ने खास पहचान दिलाई थी।
जानकारी के अनुसार, अरावली पर्वतमाला की तलहटी में वन विभाग के श्रमिक पौधारोपण के लिए गड्ढे खोद रहे थे, तभी एक कुलड़ी में 2744 चांदी के सिक्के मिले। ये सिक्के प्राचीन पंचमार्क (आहत मुद्रा) श्रेणी के माने जाते हैं, जो भारतीय इतिहास और संस्कृति की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
इनमें से 61 सिक्कों पर तीन मानव आकृतियां अंकित पाई गईं। प्रसिद्ध सिक्का विशेषज्ञ John Allan ने अपनी पुस्तक में इन्हें “थ्री मैन” के रूप में उल्लेखित किया, वहीं डॉ. परमेश्वरी लाल गुप्ता ने इन्हें तीन मानव आकृतियों के रूप में प्रस्तुत किया।

राजस्थान पुरातत्व संग्रहालय के तत्कालीन मुद्रा विशेषज्ञ जफर उल्लाह खान ने इन आकृतियों की पहचान राम, सीता और लक्ष्मण के रूप में की। उनका मानना था कि इन सिक्कों का संबंध हिंदू धार्मिक मान्यताओं और सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़ा है। विशेष बात यह भी रही कि इन सिक्कों पर सूर्य का चिह्न नहीं पाया गया, जिस पर उनका तर्क था कि भगवान राम स्वयं सूर्यवंशी हैं, इसलिए अलग से सूर्य चिन्ह की आवश्यकता नहीं दर्शाई गई।
इस खोज पर एक शोध पत्र द जर्नल ऑफ़ द न्यू मिसमैटिक सोसाइटी ऑफ इंडिया में भी प्रकाशित हुआ, जिससे इसकी ऐतिहासिक महत्ता और बढ़ गई। वर्तमान में ये सभी सिक्के पुरातत्व संग्रहालय की मुद्रा शाखा में सुरक्षित हैं।
गांव का इतिहास
गुरारा गांव को लगभग 800 वर्ष पूर्व अतिराम ब्राह्मण ने बसाया था, जो पचलंगी गोत्र से थे और आज भी उनके वंशज ‘पटेल’ नाम से जाने जाते हैं। वर्तमान में गांव में 700 से अधिक परिवार निवास करते हैं, जिनका मुख्य व्यवसाय कृषि है। इस ऐतिहासिक खोज ने गुरारा को शेखावाटी क्षेत्र के महत्वपूर्ण पुरातात्विक स्थलों में स्थान दिलाया है।
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