[pj-news-ticker post_cat="breaking-news"]

उत्कर्ष ने बिना रोशनी के RAS में दृष्टि नहीं पर ‘दृष्टिकोण’ था फौलादी:ऑडियो नोट्स व सॉफ्टवेयर के दम पर ब्लाइंड श्रेणी में हासिल की प्रदेश में 10वीं रैंक


निष्पक्ष निर्भीक निरंतर
  • Download App from
  • google-playstore
  • apple-playstore
  • jm-qr-code
X
उदयपुरवाटीझुंझुनूंटॉप न्यूज़राजस्थानराज्य

उत्कर्ष ने बिना रोशनी के RAS में दृष्टि नहीं पर ‘दृष्टिकोण’ था फौलादी:ऑडियो नोट्स व सॉफ्टवेयर के दम पर ब्लाइंड श्रेणी में हासिल की प्रदेश में 10वीं रैंक

सलाम है जज्बे को, तंगहाली व शारीरिक बाधाएं भी नहीं रोक सकीं उत्कर्ष का प्रशासनिक अधिकारी बनने का सपना

उदयपुरवाटी : कस्बे के चुंगी नम्बर 3 पर स्थित वार्ड नंबर 15 निवासी उत्कर्ष मित्तल ने यह साबित कर दिया है कि सफलता आंखों की मोहताज नहीं होती। राजस्थान प्रशासनिक सेवा के घोषित परिणामों में उत्कर्ष ने अपनी दिव्यांगता को ढाल बनाकर प्रदेश की टॉप-10 ब्लाइंड श्रेणी में जगह बनाकर इतिहास रच दिया है।

तकनीक को बनाया हथियार, घंटों तक ऑडियो नोट्स से की पढ़ाई
उत्कर्ष ने यह मुकाम किसी सुख-सुविधा में रहकर नहीं, बल्कि कड़े संघर्षों के बीच पाया है। जन्म से आँखों की रोशनी न होने और परिवार की कमजोर आर्थिक स्थिति के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी। उन्होंने सामान्य किताबों की जगह स्क्रीन रीडिंग सॉफ्टवेयर और ऑडियो नोट्स का सहारा लिया। जहाँ दुनिया देखने के लिए आँखों की जरूरत होती है, वहां उत्कर्ष ने अपने कान और एकाग्रता को ही अपनी ताकत बना लिया। उनके दादाजी राजेंद्र मित्तल कहते हैं कि उत्कर्ष ने कभी दुनिया नहीं देखी, पर आज दुनिया उसे देख रही है।

मेडिकल टीम ने पलक-पावड़े बिछाकर किया लाडले का अभिनंदन
उत्कर्ष की इस स्वर्णिम सफलता पर कस्बे में जश्न का माहौल है। कैलाश बबेरवाल के नेतृत्व में मेडिकल स्टाफ ने उत्कर्ष का भव्य स्वागत किया। इस मौके पर जगदीश प्रसाद, डॉ. अरुण शेखावत (फिजियोथैरेपिस्ट), सीनियर रेडियोग्राफर जगदीश प्रसाद खरींटा, लैब टेक्नीशियन दीपक चाहर और नर्सिंग ऑफिसर अरविंद बुगालिया ने उत्कर्ष को मालाओं से लाद दिया। दीपक चाहर ने कहा कि उत्कर्ष की जीत केवल एक परीक्षा की जीत नहीं है, बल्कि यह हर उस युवा की जीत है जो अभावों में जी रहा है। आज के दौर में जहाँ युवा छोटी-छोटी असफलताओं से टूट जाते हैं, वहां उत्कर्ष मित्तल एक ‘लाइटहाउस’ की तरह चमक रहे हैं।

सोशल मीडिया पर उनके लिए शुभकामनाओं का सैलाब उमड़ पड़ा है। सर्व समाज के लोगों का कहना है कि उत्कर्ष ने यह साबित कर दिया कि असली दिव्यांगता शरीर में नहीं, बल्कि इंसान के मन में होती है। डॉक्टर अरुण शेखावत ने बताया कि उत्कर्ष की सफलता हमें सिखाती है कि बाधाएं आपको रोकने के लिए नहीं, बल्कि आपकी क्षमता को परखने के लिए आती हैं। यदि एक दृष्टिबाधित छात्र सॉफ्टवेयर की मदद से RAS बन सकता है, तो आपके लिए कुछ भी असंभव नहीं है। बस ज़रूरत है तो लक्ष्य के प्रति ‘उत्कर्ष’ जैसी जिद्द की।

Related Articles