झुंझुनूं में नारियल के रेशों से तैयार होंगे पौधे:पानी बचाने के लिए बूंद-बूंद सिंचाई करेंगे; 23 हेक्टेयर में बनेगी हाईटेक ‘नमो नर्सरी’
झुंझुनूं में नारियल के रेशों से तैयार होंगे पौधे:पानी बचाने के लिए बूंद-बूंद सिंचाई करेंगे; 23 हेक्टेयर में बनेगी हाईटेक 'नमो नर्सरी'
झुंझुनूं : झुंझुनूं में 23 हेक्टेयर में हाईटेक नर्सरी तैयार की जाएगी। हाईटेक इसलिए क्योंकि यहां पौधों को पॉलिथीन की जगह नारियल के रेशों में तैयार किया जाएगा। वहीं पानी बचाने के लिए बूंद-बूंद सिंचाई का प्रयोग होगा। नमो नर्सरी के मास्टर प्लान के तहत इसे तैयार किया जाएगा। उपनिदेशक कार्यालय उप वन संरक्षक काव्या बी. ने बताया कि बीड़ झुंझुनूं में करीब 23 हेक्टेयर में यह विशेष नर्सरी तैयार की जाएगी। इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि पौधों की ग्रोथ तेज होगी और पानी की खपत 50% तक कम हो जाएगी।

मिट्टी का झंझट खत्म, कॉयर में पनपेंगे पौधे
अब तक नर्सरियों में मिट्टी की थैलियों का उपयोग होता था, जिससे पौधों की जड़ें उतनी मजबूत नहीं हो पाती थीं। नमो नर्सरी में ‘कॉयर पोट्रेस’ (Coir Potrays) का इस्तेमाल होगा। यह नारियल के रेशों से बना होता है, जो नमी को सोख कर रखता है और जड़ों को फैलने के लिए ज्यादा ऑक्सीजन देता है।

मौसम की मार से बचाएंगे ‘मिस्ट चैंबर’
अक्सर तेज गर्मी या सर्दी में छोटे पौधे मर जाते हैं। नमो नर्सरी में मिस्ट चैंबर और शेड नेट लगाए जाएंगे। यह एक तरह का लैब जैसा वातावरण होगा जहां तापमान और नमी को कंट्रोल किया जा सकेगा। यानी अब कड़कती धूप में भी पौधे सुरक्षित रहेंगे। नर्सरी में सिंचाई के लिए अब पाइप या नालियों से पानी नहीं बहाया जाएगा। इसकी जगह ड्रिप इरिगेशन और स्प्रिंकलर सिस्टम लगेगा। इससे पौधों को उनकी जरूरत के हिसाब से पानी मिलेगा और पानी की बर्बादी बिल्कुल नहीं होगी।
पौधों की सर्वाइवल रेट बढ़ेगी, जल्दी बढेंगे पौधें
नर्सरी से ले जाने के बाद पौधे के सूखने की संभावना बहुत कम हो जाएगी, क्योंकि उसकी जड़ें तकनीक से मजबूत की गई होंगी। वैज्ञानिक तरीके से तैयार होने के कारण पौधे सामान्य के मुकाबले जल्दी बढ़ेंगे। स्थानीय किसानों और बागवानी प्रेमियों के लिए यह नर्सरी एक मॉडल की तरह काम करेगी, जहां से वे नई तकनीक सीख सकेंगे।
उपनिदेशक कार्यालय उप वन संरक्षक काव्या बी. ने बताया किनमो नर्सरी सामान्य नर्सरी जैसी नहीं होगी। इसमें हम हाईटेक और वैज्ञानिक पद्धति अपना रहे हैं। हमारा फोकस पानी की बचत और पौधों की क्वालिटी सुधारने पर है। बीड़ झुंझुनू में इसके लिए जमीन चिन्हित कर ली गई है।
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