कृषि विज्ञान केंद्र ने उर्वरक उपयोग पर प्रशिक्षण दिया:पातलीसर में 27 किसानों को संतुलित प्रयोग की जानकारी दी
कृषि विज्ञान केंद्र ने उर्वरक उपयोग पर प्रशिक्षण दिया:पातलीसर में 27 किसानों को संतुलित प्रयोग की जानकारी दी
सरदारशहर : कृषि विज्ञान केंद्र की ओर से गांव पातलीसर में उर्वरकों के संतुलित उपयोग पर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें ग्रामीण क्षेत्र के 27 प्रगतिशील किसानों ने सक्रिय रूप से भाग लिया। कार्यक्रम में वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. विनोद कुमार सैनी तथा विषय विशेषज्ञ (एसएमएस) हरीश कुमार रछोइया ने मुख्य वक्ता के रूप में किसानों को वैज्ञानिक और तकनीकी जानकारी प्रदान की।
प्रशिक्षण के दौरान डॉ. सैनी ने मृदा स्वास्थ्य के महत्व पर बात की। उन्होंने बताया कि फसल उत्पादन बढ़ाने के लिए उर्वरकों का अंधाधुंध प्रयोग करने के बजाय संतुलित और आवश्यकतानुसार उपयोग करना आवश्यक है। उन्होंने मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरकों की मात्रा निर्धारित करने, मृदा स्वास्थ्य कार्ड के उपयोग और नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और पोटाश (एनपीके) के संतुलित अनुपात को अपनाने पर जोर दिया। साथ ही

उन्होंने वर्मी कम्पोस्ट, गोबर की खाद एवं हरी खाद जैसे जैविक स्रोतों को शामिल करने की सलाह दी, जिससे मृदा की उर्वरता और संरचना में सुधार होता है। विषय विशेषज्ञ हरीश कुमार रछोइया ने तकनीकी सत्र में उर्वरकों के सही समय, सही मात्रा और सही विधि पर ध्यान केंद्रित किया। उन्होंने बताया कि नाइट्रोजन उर्वरकों का प्रयोग विभाजित खुराक (स्प्लिट डोज) में अधिक प्रभावी होता है, जबकि फॉस्फोरस और पोटाश को बुवाई के समय आधार खाद (बेसल डोज) के रूप में देना चाहिए।
उन्होंने फर्टिगेशन तकनीक, नीम-लेपित यूरिया के उपयोग, सूक्ष्म पोषक तत्वों जैसे जिंक और आयरन की कमी के लक्षण और उनके सुधार के उपायों पर भी विस्तार से जानकारी दी। प्रशिक्षण के दौरान किसानों को उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से होने वाले दुष्प्रभावों जैसे मृदा स्वास्थ्य में गिरावट, जल प्रदूषण और उत्पादन लागत में वृद्धि के प्रति भी जागरूक किया गया।
कार्यक्रम में व्यावहारिक प्रदर्शन के माध्यम से किसानों को मृदा नमूना लेने की वैज्ञानिक विधि,उर्वरकों के संतुलित प्रयोग और फसल की आवश्यकता के अनुसार पोषक तत्व प्रबंधन की जानकारी दी गई। अंत में, वैज्ञानिकों ने किसानों के साथ संवाद स्थापित किया,उनकी समस्याओं का समाधान किया तथा उन्हें संतुलित उर्वरक उपयोग अपनाने के लिए प्रेरित किया। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम किसानों को वैज्ञानिक खेती की ओर अग्रसर करने और उत्पादन लागत कम करने में सहायक सिद्ध होगा।
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