फतेहपुर में गोचर की जमीन पर भू-माफियाओं का ‘खेल’ खत्म?: गोचर भूमि में अब वन विभाग की एंट्री नही काटे जा सकते प्लॉट
जिला वन अधिकारी (DFO) ने कनवर्जन रोकने को लेकर लिखा तहसीलदार को पत्र, महंत दिनेश गिरी ने की थी वन विभाग और जिला कलेक्टर को शिकायत
जनमानस शेखावाटी सवंददाता : आबिद खान
फतेहपुर : फतेहपुर क्षेत्र में मैना देवी चैरिटेबल ट्रस्ट के नाम दर्ज करोड़ों रुपयों की बेशकीमती जमीन को लेकर अब एक और नया मोड़ आ गया है। जिस जमीन पर भू-माफिया लंबे समय से अपनी पैनी नजरें गड़ाए बैठे थे और छोटे-छोटे टुकड़ों में काटकर अवैध रजिस्ट्रियां कर रहे थे, अब वहां वन विभाग ने अपना ‘अधिकार’ जताते हुए बड़ा हस्तक्षेप किया है।
जिला वन अधिकारी DFO का कड़ा रुख: तहसीलदार को लिखा पत्र
सीकर जिला उप वन संरक्षक (DFO) दीपक कुमार ने एक सख्त आदेश जारी करते हुए रामगढ़ शेखावाटी के तहसीलदार को पत्र लिखा है। इस पत्र में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि कस्बा फतेहपुर के खसरा नंबर 1181, 1183 और 1186 (कुल रकबा लगभग 116 हेक्टेयर) को सुप्रीम कोर्ट के 12.12.1996 के निर्देशानुसार गठित ‘कपूर कमेटी’ की रिपोर्ट के तहत ‘डीम्ड फॉरेस्ट’ (माना गया वन क्षेत्र) घोषित किया जा चुका है।
अवैध कनवर्जन और रजिस्ट्रियों पर लगेगी लगाम?
वन विभाग को शिकायत मिली थी कि इस संरक्षित भूमि पर राजस्थान गोसेवा समिति और अन्य माध्यमों के विरुद्ध जाकर कुछ भू-माफिया अवैध रूप से प्लॉटिंग काटने का प्लान कर रहे हैं। DFO ने तहसीलदार को लिखे पत्र में साफ कहा है कि: यह जमीन वन (संरक्षण एवं संवर्धन) अधिनियम, 1980 के दायरे में आती है।
बिना राज्य सरकार या केंद्र की अनुमति के यहाँ कोई भी ‘गैर-वानिकी’ कार्य (जैसे फेक्ट्री या प्लॉटिंग) करना कानूनन जुर्म है। DFO का आदेश साफ करता हैं कि इस भूमि का कोमर्शियल कनवर्जन नही किया जा सकता हैं। और ना ही इस पर प्लॉटिंग की जा सकती हैं। तहसीलदार को निर्देश दिए गए हैं कि इस भूमि के अवैध खरीद-बेचान और कनवर्जन प्रक्रिया को तुरंत रोका जाए।

क्या है पूरा विवाद?
फतेहपुर में स्थित यह भूमि पिछले दिनों से विवादो के घेरे में इसलिए हैं बताया जा रहा हैं कि इसमें से कुछ हिस्सा बैचान कर दिया गया हैं। लंबे समय से सामाजिक कार्यकर्ता और गोसेवा समितियां इसे वापस गोचर घोषित करने की मांग कर रही थीं। अब वन विभाग की एंट्री ने उन लोगों की नींद उड़ा दी है जो इस भूमि पर अवैध कॉलोनी काटने का सपना देख रहे थे।
महंत दिनेश गिरी ने उठाई थी आवाज
राजस्थान गोसेवा समिति के प्रधान संरक्षक महंत दिनेश गिरी द्वारा प्रस्तुत परिवाद के बाद प्रशासन हरकत में आया है। वन विभाग के इस कदम के बाद अब उन रजिस्ट्रियों पर भी तलवार लटक गई है जो हाल के दिनों में इस ‘डीम्ड फॉरेस्ट’ यानी लाइक टू फॉरेस्ट की जमीन पर की गई थीं।
”इमरजेंसी सेवा की तरह एक्टिव हुआ विभाग”
जहाँ एक ओर इस भूमि को लेकर माहोल लगातार गर्म तो वहीं दूसरी और वन विभाग का यह ‘एक्शन मोड’ यह साबित करता है कि अगर अधिकारी ठान लें, तो डीम्ड फॉरेस्ट संपत्तियों की बंदरबांट रोकी जा सकती है। अब देखना होगा कि वन विभाग का हस्तक्षेप इसे कहां तक रोक पाता हैं।
इन्होंने ने कहा
हमारे पास राजस्थान गौ सेवा समिति की और से पत्र प्राप्त हुआ जिसके बाद हमने इस मामले मे पता लगाया तों सामने आया कि यह भूमि डिम्ड फॉरेस्ट यानि कि लाइक टू फॉरेस्ट हैं। इसलिए वन विभाग जिला कार्यालय सीकर द्वारा संबंधित तहसीलदार को पत्र लिखकर निर्देशित किया गया हैं कि इस भूमि का किसी भी तरह का कॉमर्शियल कन्वर्जन न किया जाए जिस से इसमें प्लॉटिंग या फेक्ट्री जैसे निर्माण पर रोक लग सके पत्र में बाई मिस्टेक रामगढ़ लिख दिया गया था जिसे करेक्शन कर दिया गया हैं। – दीपक कुमार जिला वन अधिकारी (DFO) सीकर
वर्तमान में अब तक मुझे कोई पत्र डीएफओ साहब की तरफ से नही मिला हैं जब भी मिलेगा उसके अनुसार कार्रवाई की जायेगी सोमवार को चेक करवाता हूं। – हितेश चौधरी तहसीलदार फतेहपुर
हमने राजस्थान गौसेवा समिति की और से संबंधित लोगो के साथ डीएफओ जिला वन अधिकारी सीकर और जिला कलेक्टर सीकर से मिलकर हमने अवगत करवाया कि सर्वोच्च न्यायालय के 12.12.1996 के निर्देशानुसार गठित कपूर कमिटी द्वारा इसे डिम्ड फॉरेस्ट बताया गया था। इस संबंध में डीएफओ साहब ने संज्ञान लिया और इस भूमि पर कनवर्जन को रोकने और प्लॉटिंग फैक्ट्री जैसे कई रोक लगाते हुए तहसीलदार को निर्देशित किया गया हैं। – महंत दिनेश गिरी बुधगिरी मंढी फतेहपुर
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