बेटे की मुस्कान या कमीशन की दुकान? अपनी ममता और मेहनत को लुटने से बचाइए!
जब NCERT श्रेष्ठ है, तो प्राइवेट पब्लिशर्स की कमीशन वाली रद्दी किताबों से आपकी जेब पर डकैती क्यों?" "आज खामोश रहे तो कल योग्यता भी नीलाम होगी: अपने बच्चे को 'किताबी माफिया' से बचाने के लिए आज ही आवाज उठाइए!"
प्रिय अभिभावकों, जब आप अपने बच्चे की उंगली थामकर उसे स्कूल की दहलीज पर छोड़ते हैं, तो आप अपनी दुनिया की सबसे कीमती अमानत एक ‘भरोसे’ को सौंपते हैं। लेकिन क्या आपको पता है कि उसी भरोसे की आड़ में आपके प्यार और मेहनत का कुछ स्कूलों में सौदा हो रहा है?
आज एक पत्रकार के तौर पर नहीं, बल्कि एक दर्द भरे दिल के साथ आपसे पूछ रहा हूँ-क्या आपके बच्चे का बस्ता ज्ञान का घर है या किसी की तिजोरी की चाबी?
या फिर मजबूरी की आड़ में ‘कमीशन की डकैती’ हैं।
एक पिता जब अपनी मेहनत की कमाई से स्कूल की लंबी लिस्ट वाली किताबें खरीदता है, तो वह केवल कागज़ नहीं खरीद रहा होता, वह अपने बच्चे के सुनहरे कल की उम्मीद खरीदता है। लेकिन कुछ जगहों पर उन किताबों के पीछे छिपा है ‘कमीशन का दीमक’ जिसे समय रहते आपको समझना होगा।
जब NCERT की किताबे कम कीमत में उन से श्रेष्ठ ज्ञान दे रही हैं, तो चंद रुपयों के लालच में उन ‘प्राइवेट पब्लिशर्स’ की रद्दी को आपके घर का बजट बिगाड़ने के लिए क्यों भेजा जा रहा है?
जबकि शिक्षा से जुड़े सीनियर प्रशासनिक अधिकारी कह रहे हैं। NCERT सब से बेहतर हैं। तो व्यापार की इस मंडी से बचिए।
यह व्यापार कम और, आपकी भावनाओं का गला घोंटना ज्यादा है। इसे गुणवता का नाम देकर खुद को दिलासा मत दीजिए, यह सरेआम की जा रही ‘आर्थिक डकैती’ है।
अभिभावकों, याद रखिए कि कानून आपकी बेबसी का साथी है, स्कूल की मनमानी का नहीं: कोई भी संस्थान आपको विशेष ब्रांड या दुकान से किताबें लेने के लिए बाध्य नहीं कर सकता। और ना ही आप के बच्चो पर पर अपनी किताबे थोंप सकता, यह कानूनन ‘रिस्ट्रिक्टिव ट्रेड प्रैक्टिस’ है। शिक्षा बोर्ड्स के अनुसार, स्कूलों को सत्र शुरू होने से पहले ही किताबों की लिस्ट सार्वजनिक करनी होती है। निजी किताबों को बच्चो पर थोपना नियमों का खुला उल्लंघन है।
यदि स्कूल आपको डराता है, तो ‘बाल अधिकार संरक्षण आयोग’ (NCPCR) और जिला शिक्षा विभाग और जिला कलेक्टर आपकी सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्हें शिकायत कीजिए गुगल से मेल आईडी उठाइए अपने अपने जिला कलेक्टर और जिला मुख्य शिक्षा अधिकारी को अपना ये दर्द मेल पर भेजिए अगर आपके पास मेल आईडी उपलब्ध नही हैं तो हमारी टीम आपकी मदद करेगी।
चुप्पी तोड़िए, वरना कल देर हो जाएगी!
हम अपने बच्चों को सिखाते हैं कि ‘सच्चाई की जीत होती है’, लेकिन जब हम खुद स्कूल के इस भ्रष्टाचार के सामने सिर झुका देते हैं, तो हम उन्हें कायरता का पहला पाठ पढ़ाते हैं।
क्या आप चाहते हैं कि आपका बच्चा एक ऐसे माहौल में बड़ा हो जहाँ शिक्षा सिर्फ एक धंधा बन चुकी हो?
हमने पत्रकारिता का फर्ज निभाते हुए खराब व्यवस्था की इस सड़ांध को आपके सामने नग्न कर दिया है।
अब बारी आपकी है। अगर आज आपने इस ‘आर्थिक बुलडोजर’ को नहीं रोका, तो कल ये आपके बच्चे के आत्मविश्वास को भी कुचल देंगे।
सवाल पूछिए!
उठिए, स्कूल प्रबंधन से जवाब मांगिए। उन्हें बताइए कि आपकी जेब पर डकैती डालने का अधिकार किसी को नहीं है। NCERT की किताबे पर्याप्त हैं। आज लड़िए, ताकि कल आपके बच्चे को अपनी योग्यता के लिए गिड़गिड़ाना न पड़े। कलम ने अपना लहू बहाकर सच लिख दिया है… अब आपके विरोध और आपकी जागरूकता का पसीना ही इस बदलाव की इबारत लिखेगा। वरना आने वाली पीढ़ियां सिर्फ दर्द सुनाएगी, सत्य की खोज में-आपकी अपनी आवाज़, टीम जनमानस शेखावाटी
इस पोस्ट को एक शेयर कर हर अभिभावक तक पहुंचाकर इस लूट को बंद करवाने में अपनी उपस्थिति जरूर करवाने का कष्ट करे
जनमानस शेखावाटी न्यूज टीम का मकसद किसी व्यक्ति विशेष या संस्था की छवि खराब करना नही हैं। हमारा मकसद सिर्फ खराब व्यवस्था से पर्दा उठाकर जागरूकता फैलाना और सरकार तक बात पहुंचाना हैं। याद रखिए आज नही जागे तो कल बहुत देर हो जाएगी। – आबिद खान, स्पेशल इन्वेस्टिगेशन जर्नलिस्ट, जनमानस शेखावाटी न्यूज़
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