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बिसाऊ में निजी स्कूलों की किताबों पर मनमानी का आरोप, SDM से जांच की मांग


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बिसाऊ में निजी स्कूलों की किताबों पर मनमानी का आरोप, SDM से जांच की मांग

बिसाऊ में निजी स्कूलों की किताबों पर मनमानी का आरोप, SDM से जांच की मांग

बिसाऊ : क्षेत्र में निजी इंग्लिश मीडियम स्कूलों द्वारा किताबों के नाम पर मनमाने दाम वसूले जाने का मामला सामने आया है। इस संबंध में सामाजिक कार्यकर्ता लतीफ खान ने मंडावा एसडीएम मुनेश कुमारी को अवगत कराते हुए जांच की मांग की है। ज्ञापन में बताया गया कि निजी स्कूलों में छोटे बच्चों की किताबों के लिए 4 से 5 हजार रुपए तक वसूले जा रहे हैं। साथ ही अभिभावकों पर यह दबाव बनाया जाता है कि वे किताबें स्कूल से ही खरीदें, जबकि ऐसा कोई सरकारी नियम नहीं है। इस पर एसडीएम मुनेश कुमारी ने कहा कि औपचारिक रूप से ज्ञापन देने पर मामले की जांच करवाई जाएगी।

अभिभावकों पर बढ़ रहा आर्थिक बोझ
मामले में बताया गया कि किताबों का बढ़ता खर्च कई परिवारों के लिए बड़ी परेशानी बन गया है। कई गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों के बच्चों को पुरानी या अधूरी किताबों से पढ़ाई करनी पड़ रही है, वहीं कुछ मामलों में आर्थिक तंगी के कारण पढ़ाई बीच में छोड़ने की नौबत तक आ रही है।

शिक्षा में बढ़ रही असमानता
विशेषज्ञों का मानना है कि शिक्षा का महंगा होना भविष्य में अवसरों की असमानता को बढ़ा सकता है। यदि समय रहते इस पर नियंत्रण नहीं किया गया तो यह समस्या और गंभीर हो सकती है।

ये उठी मांगें

  • किताबों की कीमतों पर नियंत्रण लागू किया जाए
  • सभी स्कूलों में किफायती और मानक किताबें अनिवार्य हों
  • बार-बार किताबें बदलने की प्रथा पर रोक लगे
  • जरूरतमंद छात्रों को मुफ्त या सब्सिडी पर किताबें मिलें
  • डिजिटल लाइब्रेरी और ओपन एजुकेशन को बढ़ावा दिया जाए

सामाजिक स्तर पर भी जरूरी पहल
अभिभावकों से भी अपील की गई है कि वे सामूहिक रूप से इस मुद्दे को उठाएं, स्कूलों से पारदर्शिता की मांग करें और जरूरत पड़ने पर शिक्षा विभाग में शिकायत दर्ज कराएं।

शिक्षा अधिकार, न कि व्यापार
ज्ञापन में कहा गया कि शिक्षा को बाजार का उत्पाद नहीं बनाया जाना चाहिए। यह हर बच्चे का मौलिक अधिकार है और इसे सुलभ व सस्ता बनाए रखना सरकार और समाज दोनों की जिम्मेदारी है।

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