वन विभाग और विद्युत विभाग की सांठगांठ का आर टी आई में हुआ खुलासा…
20 जिंदा पेड़ो का हुआ था कत्ल..वन विभाग ने स्वीकारे 5, लगाया दस हजार रुपए का जुर्माना...निगम कहता हैं पेड़ो की ट्रिमिंग करो अधिकारियों ने कटवा दिए जड़ से पेड़
जनमानस शेखावाटी सवंददाता : आबिद खान
फतेहपुर : एक ओर जहाँ केंद्र और राज्य सरकारें ‘पेड़ बचाओ-जीवन बचाओ’ का पाठ पढ़ा रही हैं और राजस्थान सरकार एक पेड़ मां के नाम लगाओ जैसी भावुकतापूर्ण योजनाएं चला रही हैं। स्कूलों में बच्चों को पर्यावरण संरक्षण सिखाया जाता हैं, वहीं दूसरी ओर रक्षक ही भक्षक की भूमिका में नजर आते दिखाई दे रहे हैं।
फतेहपुर में विद्युत विभाग की हाई टेंशन लाइनों के नीचे 20 हरे-भरे जिंदा पेड़ों को जड़ों से काट दिया गया था। मजे की बात यह है कि जिस वन विभाग पर पेड़ों की रक्षा की जिम्मेदारी है, उसी के फतेहपुर कार्यालय ने विद्युत विभाग के साथ ऐसी ‘जुगलबंदी’ निभाई कि 20 कटे हुए पेड़ों का वीडियो साक्ष्य होने के बावजूद महज 5 पेड़ों का 10 हजार रुपये जुर्माना लगाकर कागजी खानापूर्ति कर दी गई। यह जुर्माना वन विभाग द्वारा विद्युत विभाग में कार्यरत संधा एंड कंपनी पर लगाया गया था, ताकि मामले को रफा-दफा किया जा सके। क्या उन 15 पेड़ों की चीखें साहबों के कानों तक नहीं पहुँची? क्या सरकारी फाइलों में पर्यावरण की बलि चढ़ाना इतना आसान हो गया है कि साक्ष्यों को ही दफन कर दिया गया?

क्या था मामला?
साल 2022 मार्च का वो महीना जब फतेहपुर से रोलसाबसर के बीच नेशनल हाईवे-52 पर हाई टेंशन लाइनों के नीचे वन क्षेत्र के 20 हरे पेड़ों को विद्युत विभाग द्वारा जड़ से साफ कर दिया गया। जब मामला सुर्खियों में आया, तो तत्कालीन क्षेत्रीय वन अधिकारी नरेंद्र सैनी ने जांच टीम बनाई मौके पर खुद गए और विद्युत विभाग के तत्कालीन सहायक अभियंता रविंद्र कुमार बिजारनिया को पत्र भेजकर स्पष्ट किया कि ये पेड़ आपके विभाग द्वारा काटे गए हैं।
सहायक अभियंता ने खेला खेल कहा, पत्रकार ने काटे होंगे पेड़?
प्रशासनिक बेशर्मी का नमूना देखिए, सहायक अभियंता रविंद्र कुमार बिजारनिया ने वन विभाग को अपने जवाबी पत्र संख्या 233, दिनांक 27 अप्रैल 2022 के माध्यम से यह लिखा कि “पत्रकार आबिद खान द्वारा अपने लोगों से पेड़ कटवाकर हमें बदनाम करने की आशंका है।” मजे की बात यह हैं। जिस पत्रकार ने पर्यावरण को बचाने के लिए आवाज उठाई, बिजली विभाग ने अपनी विफलता छिपाने के लिए उसी को बलि का बकरा बनाने की योजना बनाने का घटिया षड्यंत्र रच दिया। यह पत्र विभाग की कार्यशैली पर एक ऐसा बदनुमा दाग है जिसे मिटाया नहीं जा सकता। सच को दबाने के लिए कलम पर हमला करना अधिकारियों की कायरता को साफ दर्शाता है।
20 पेड़ों के वीडियो सबूत, फिर भी 5 का जुर्माना
वन विभाग ने भले ही पत्रकार पर लगे आरोपों को दरकिनार किया, लेकिन मेहरबानी देखिए कि 20 पेड़ों की हत्या के बदले सिर्फ 5 पेड़ों का जुर्माना संधा एंड कंपनी पर लगाकर इतिश्री कर ली गई। शिकायतकर्ता ने 20 कटे हुए पेड़ों की वीडियो सीडी और रजिस्टर्ड शिकायत पत्र भी उपलब्ध कराया था, फिर भी वन विभाग की आँखें नहीं खुलीं। क्या यह ‘अंधेर नगरी चौपट राजा’ वाली स्थिति नहीं है? क्या उन अधिकारियों की रातों की नींद नहीं उड़ी जिन्होंने वीडियो साक्ष्यों को धूल चटाकर 15 ज़िंदा पेड़ों का वजूद कागजों से दफन कर दिया?

नियम क्या कहते हैं?
अजमेर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड का स्पष्ट नियम है कि लाइनों में बाधा बनने वाले पेड़ों की केवल ‘ट्रिमिंग’ (छंटाई) की जाए। लेकिन यहाँ तो अधिकारियों के मूक संरक्षण में पेड़ों को ‘मौत की नींद’ सुला दिया गया।
सवाल प्रशासन से:
- क्या एक तरफ एक पेड़ काटने पर डंडा चलाने वाला वन विभाग, इस सामूहिक ‘पेड़ हत्याकांड’ की उच्च स्तरीय जांच करवाकर अपनी निष्पक्षता साबित करेगा?
- क्या जिला कलेक्टर सीकर इस गंभीर मामले में हस्तक्षेप कर उन दोषियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई करेंगे जिन्होंने पर्यावरण का सत्यानाश किया जिन्होंने वीडियो सबूतों के बाद भी फाइल को रद्दी में डाला?
- क्या एसडीएम फतेहपुर इस मामले में हस्तक्षेप करते हुए अपने क्षेत्र में पेड़ बचाओ के सरकार के नारे को आगे बढ़ाएंगे? और एक पेड़ मां के नाम लगाओ जैसी योजना को लागू करेंगे?
- क्या प्रशासन उन अधिकारियों पर लगाम कसेगा जो अपनी गर्दन बचाने के लिए सच्चाई की आवाज उठाने वाली कलम पर ही कीचड़ उछालते हैं?
ये मूक पेड़ बोल नहीं सकते, लेकिन इनकी जड़ों से निकला लहू सिस्टम की ईमानदारी पर सवाल जरूर खड़ा कर रहा है। अब देखना यह है कि क्या वन विभाग के आला अधिकारी इस ‘महापाप’ का प्रायश्चित दोषियों पर कार्रवाई करके करेंगे या फिर भ्रष्टाचार की यह धारदार आरी पर्यावरण को यूँ ही काटती रहेगी? ये देखना होगा
इनका क्या कहना हैं
विद्युत विभाग की गाइडलाइन में साफ लिखा हैं पेड़ो की ट्रिमिंग ही की जानी चाहिए जड़ों से काटना अपराध हैं। सवाईमाधोपुर अजीतगढ़ में भी बिजली विभाग के किसी ठेकेदार ने पेड़ काट दिए थे जिस पर वन विभाग ने जुर्माना लगाया और उसकी मशीन भी सीज कर दी गई थी। ऐसा आपके क्षेत्र में हुआ हैं तो मुझे लिख कर भेजिए में जांच करवा लूंगा वैसे आप वहां एक्स ई एन साहब को भी लिख कर दे सकते हैं वो जांच करवा लेंगे। – सुभाष देवन्दा अधीक्षण अभियंता अजमेर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड सीकर
मेरे कार्यकाल से पहले का मामला हैं। में पता करवाता हूं क्या मामला हैं अगर कोई लापरवाही या भूल रही हैं तो दुबारा जांच करवा लेंगे.. और दोषी पाए जाने पर कार्रवाई की जाएगी। – दीपक कुमार जिला वन अधिकारी (DFO) सीकर
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