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राजपुरा मोहल्ले के 50 घरों पर संकट, लोगों का प्रदर्शन:कोर्ट ने 4 लोगों को दिया 14 बीघा जमीन का स्वामित्व, बस्तीवासियों ने की निष्पक्ष जांच की मांग


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राजपुरा मोहल्ले के 50 घरों पर संकट, लोगों का प्रदर्शन:कोर्ट ने 4 लोगों को दिया 14 बीघा जमीन का स्वामित्व, बस्तीवासियों ने की निष्पक्ष जांच की मांग

राजपुरा मोहल्ले के 50 घरों पर संकट, लोगों का प्रदर्शन:कोर्ट ने 4 लोगों को दिया 14 बीघा जमीन का स्वामित्व, बस्तीवासियों ने की निष्पक्ष जांच की मांग

पिलानी : पिलानी के राजपुरा मोहल्ले में 14 बीघा जमीन के स्वामित्व को लेकर विवाद गहरा गया है। सूरजगढ़ उपखण्ड अधिकारी के हालिया आदेश के बाद क्षेत्र में रहने वाले लोगों में चिंता और असंतोष बढ़ गया है। मामले को लेकर मंगलवार को बड़ी संख्या में बस्तीवासियों ने तहसीलदार को ज्ञापन सौंपकर भूमि की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की।

ज्ञापन में बताया गया कि राजपुरा मोहल्ले के खसरा नंबर 833 और 942 में स्थित इस भूमि पर लगभग पचास घर बने हुए हैं। यहां रहने वाले परिवार कई वर्षों से इस जमीन पर निवास कर रहे हैं और उनका जीवन पूरी तरह इसी बस्ती पर निर्भर है। लोगों का कहना है कि अचानक हुए नामांतरण से उनके सामने आवास संकट खड़ा हो गया है।

भूमि का नामांतरण होने से बस्ती में मचा हड़कंप

जानकारी के अनुसार, सूरजगढ़ उपखण्ड अधिकारी ने भूमि स्वामित्व से जुड़े लंबे समय से लंबित मामले का निस्तारण करते हुए जमीन को वादी पक्ष के नाम दर्ज करने के आदेश दिए थे। इसके बाद संबंधित भूमि का नामांतरण भी कर दिया गया। जैसे ही यह जानकारी बस्तीवासियों तक पहुंची, इलाके में हड़कंप की स्थिति बन गई।

अंबेडकर भवन से तहसील कार्यालय तक निकाला पैदल मार्च

अपनी मांगों को लेकर मंगलवार को बड़ी संख्या में लोग अंबेडकर भवन पर एकत्र हुए। इसके बाद विधायक पितराम सिंह काला के नेतृत्व में लोगों ने तहसील कार्यालय तक पैदल मार्च किया। प्रदर्शनकारियों ने तहसीलदार को ज्ञापन सौंपकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और बस्तीवासियों के हितों की रक्षा करने की मांग की।

ज्ञापन सौंपने वालों में प्रेमप्रकाश मोयल, प्रदीप झाझड़िया, हीरालाल नायक, डॉ. हरिसिंह सांखला और मुरली सहित बड़ी संख्या में महिलाएं और स्थानीय निवासी शामिल रहे। प्रदर्शन के दौरान लोगों ने प्रशासन से मांग की कि वर्षों से बसे परिवारों के हितों को ध्यान में रखते हुए कोई भी कार्रवाई की जाए।

पहले मदन सिंह के नाम दर्ज थी जमीन

राजस्व रिकॉर्ड के अनुसार यह भूमि मूल रूप से मदन सिंह के नाम दर्ज थी। स्थानीय लोगों का कहना है कि वर्षों तक सार-संभाल नहीं होने के कारण धीरे-धीरे यहां आबादी बसती चली गई और करीब पचास परिवारों ने अपने मकान बना लिए।

कोर्ट का चार लोगों के नाम करने का आदेश

बताया जा रहा है कि पिछले कुछ वर्षों से मदन सिंह के करीबी लोगों ने इस भूमि को अपने नाम दर्ज करवाने के लिए सूरजगढ़ उपखण्ड न्यायालय में वाद दायर किया था। अप्रैल माह में उपखण्ड न्यायालय ने मामले का निस्तारण करते हुए 14 बीघा जमीन निर्मल कंवर, जयेंद्र सिंह, ललित परमार और सुषमा परमार के नाम दर्ज करने के आदेश जारी किए थे।

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