कृषि विकास दर का अस्थिर होना चिंता का विषय: सांसद बृजेंद्र सिंह ओला
“किसानों की आय दोगुनी होने का दावा केवल भ्रम”
झुंझुनूं : झुंझुनूं से सांसद बृजेंद्र सिंह ओला ने लोकसभा में कृषि क्षेत्र की स्थिति को लेकर गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने अतारांकित प्रश्न के माध्यम से देश की जीडीपी में कृषि के योगदान और कृषि विकास दर का मुद्दा उठाते हुए सरकार के दावों पर सवाल खड़े किए।
सांसद ओला ने कहा कि सरकार के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार पिछले 10 वर्षों में देश की जीडीपी में कृषि क्षेत्र का योगदान मात्र 16.8 प्रतिशत से बढ़कर 17.7 प्रतिशत तक ही पहुंच पाया है। वहीं वर्ष 2023-24 में कृषि विकास दर केवल 2.6 प्रतिशत रही, जो इस क्षेत्र की कमजोर स्थिति को दर्शाती है।
उन्होंने बताया कि कृषि विकास दर लगातार अस्थिर बनी हुई है। कई वर्षों में यह दर बेहद कम रही है, यहां तक कि एक वर्ष में यह गिरकर -0.2 प्रतिशत तक पहुंच गई थी, जो किसानों के लिए गंभीर चिंता का विषय है।
सांसद ने सरकार के “किसानों की आय दोगुनी” करने के दावे पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि वास्तव में किसानों की आय दोगुनी हुई होती, तो इसका सीधा प्रभाव कृषि विकास दर और अर्थव्यवस्था में स्पष्ट रूप से दिखाई देता। लेकिन वास्तविक स्थिति इससे अलग है।
उन्होंने कहा कि किसानों की लागत लगातार बढ़ रही है डीजल, खाद, बीज और मजदूरी के खर्च में निरंतर वृद्धि हो रही है, जबकि आमदनी उसी अनुपात में नहीं बढ़ रही। इसके कारण किसानों की वास्तविक बचत कम हो रही है और कई किसान घाटे की स्थिति में पहुंच रहे हैं। साथ ही, अधिकांश किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) का पूरा लाभ भी नहीं मिल पा रहा है।
सांसद ओला ने कहा कि सरकार के आंकड़े स्वयं इस बात को साबित करते हैं कि किसानों की आय दोगुनी होने का दावा जमीनी हकीकत से मेल नहीं खाता।
उन्होंने केंद्र सरकार से मांग करते हुए कहा कि केवल दावों और प्रचार के बजाय कृषि क्षेत्र को मजबूत करने के लिए ठोस और प्रभावी कदम उठाए जाएं, ताकि किसानों की वास्तविक आय में वृद्धि हो सके और उनकी आर्थिक स्थिति में सार्थक सुधार आ सके।
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