उपभोक्ता आयोग ने कलेक्टर-ADM सहित 6 अफसरों को किया तलब:1536 लाभार्थियों को नहीं मिले आवास; SP करवाएंगे समन तामील
उपभोक्ता आयोग ने कलेक्टर-ADM सहित 6 अफसरों को किया तलब:1536 लाभार्थियों को नहीं मिले आवास; SP करवाएंगे समन तामील
झुंझुनूं : झुंझुनूं जिला उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष मनोज कुमार मील सदस्य प्रमेन्द्र सैनी ने एक ऐतिहासिक और कड़ा रुख अपनाते हुए जिले के शीर्ष प्रशासनिक अधिकारियों के खिलाफ उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम की धारा 72 में कार्यवाही करते हुए आदेश पारित किया है।
मुख्यमंत्री जन आवास योजना के तहत 1536 लाभार्थियों को न्याय न मिलने और आयोग के आदेशों की अवहेलना करने पर जिला कलेक्टर अरुण गर्ग, ADM अजय आर्य, कमिश्नर देवीलाल बोचलिया समेत कई अधिकारियों को तलब किया गया है। कोर्ट ने इन सभी को 13 मार्च को पेश होने के निर्देश दिए हैं।
इन अधिकारियों को किया तलब
आयोग ने मामले की गंभीरता को देखते हुए व्यक्तिगत रूप से इन अधिकारियों को तलब किया है: अरुण गर्ग (जिला कलेक्टर), अजय आर्य (ADM), देवीलाल बोचलिया (नगर परिषद कमिश्नर), हवाई सिंह यादव (तत्कालीन SDM), कौशल्या विश्नोई (वर्तमान SDM), महेंद्र मूंड (तहसीलदार)।
एसपी को भेजे समन
समन की तामील सुनिश्चित करने के लिए आयोग ने सीधे पुलिस अधीक्षक (SP) को जिम्मेदारी सौंपी है। एसपी समन तामील करवाएंगे।
यह है पूरा मामला
झुंझुनूं के मंड्रेला रोड पर स्थित मुख्यमंत्री जन आवास योजना में आवासों के आवंटन को लेकर जिला उपभोक्ता आयोग ने उपभोक्ताओं के पक्ष में फैसला सुनाया था। आयोग ने नगर परिषद को आदेश दिया था कि या तो वे सभी सुविधाओं के साथ फ्लैट्स का कब्जा सौंपें, या फिर लाभार्थियों की जमा राशि ब्याज और मानसिक संताप के मुआवजे सहित लौटाएं।
नगर परिषद ने इस फैसले को राज्य और राष्ट्रीय आयोग में चुनौती दी, लेकिन वहां भी उनकी अपील खारिज हो गई और जिला आयोग का फैसला बरकरार रहा।
कुर्क भूमि को गुपचुप तरीके से मुक्त करने का मामला
मामले में मोड़ तब आया जब अवार्ड राशि वसूलने के लिए तत्कालीन SDM हवाई सिंह यादव ने नगर परिषद की खसरा नंबर 1691 की भूमि को कुर्क कर लिया था। नियमतः इस भूमि पर उपभोक्ता आयोग के नाम का नामांतरण (म्यूटेशन) नोट भी दर्ज हो गया था।
तत्कालीन SDM ने आयोग की अनुमति के बिना अपने स्तर पर ही इस कुर्क शुदा भूमि को मुक्त कर दिया। नगर परिषद ने इस कुर्क भूमि के कुछ हिस्सों को खुली बोली लगाकर बेच भी दिया। जमीन बेचने के बाद जो पैसा आया, वह भी आयोग में जमा नहीं कराया गया और न ही पीड़ितों को मिला।
धारा 72 के तहत जेल और जुर्माना
पीड़ितों की शिकायत पर आयोग ने इसे ‘न्यायिक अवज्ञा’ माना है। अब इन अधिकारियों के खिलाफ उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम की धारा 72 के तहत कार्रवाई की जा रही है। इस धारा के तहत दोषी पाए जाने पर अधिकारियों को 3 साल तक की जेल और 1 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है।
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