खाटू मेले में अफवाह के कारण कम आए श्रद्धालु:45KM तक पैदल चलने की बात कही थी; 40 लाख का अनुमान था,15 लाख ही पहुंचे
खाटू मेले में अफवाह के कारण कम आए श्रद्धालु:45KM तक पैदल चलने की बात कही थी; 40 लाख का अनुमान था,15 लाख ही पहुंचे
खाटूश्यामजी : विश्व प्रसिद्ध खाटूश्यामजी में इस बार फाल्गुन मेले में श्रद्धालुओं की संख्या उम्मीद से कम रही। इसके कारण स्थानीय व्यापारियों को आर्थिक नुकसान हुआ है। इस बार चारण खेत के जिगजैग खुले ही नहीं। व्यापारियों ने कहा- मेले में 45 किलोमीटर पैदल चलने की अफवाह फैला दी गई, जबकि खाटू में ज्यादा भीड़ होने के बाद भी 6 किलोमीटर से ज्यादा नहीं चलना पड़ता। इतना तो आम दिनों में भी चलना पड़ता है। लेकिन अफवाहों के कारण श्रद्धालु नहीं आए।
इस बार मेले में 30-40 लाख लोगों के आने का अनुमान था, लेकिन 15 लाख भक्त ही दर्शन के लिए पहुंचे। खाटू दर्शन के लिए नियमित रूप से आने वाले श्रद्धालु भी कम नजर आए। खाटू के होटल, गेस्ट हाउस और धर्मशालाओं में कमरे खाली रहे।

गुलाब के फूलों का स्टॉक बचा हुआ रह गया
श्रीजी पुष्प भंडार के मालिक तेजन शर्मा ने कहा- इस बार व्यापार पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ा है। बाबा श्याम को चढ़ने वाले गुलाब के फूलों का स्टॉक बचा रह गया। यूट्यूब पर अफवाहें फैलाकर सब खराब हो गया। 45 किलोमीटर पैदल चलने की अफवाह फैला दी गई, जबकि 6 किलोमीटर से ज्यादा पैदल नहीं चलना पड़ता। इतना तो आम दिनों में भी चलना पड़ता है। लेकिन अफवाहों के कारण श्रद्धालु नहीं आए और फूलों का स्टॉक खराब हो गया।
आम दिनों में जहां खाटू में होटल, गेस्ट हाउस और धर्मशालाओं में कमरों के लिए मारामारी रहती है, वहीं इस बार ज्यादातर जगहों पर 50% ऑक्यूपेंसी भी नहीं रही। अफवाह और अव्यवस्थाओं के कारण फाल्गुन मेले में भक्त कम पहुंचे।
इस बार मेले में फीकापन रहा
रूप-श्रृंगार व्यापारी केशरमल मुंडोतिया ने कहा- इस बार मेले में फीकापन रहा। जैसी व्यवस्था होनी चाहिए थी, वैसी नहीं थी। जो श्रद्धालु आए भी, वे यहां रुके नहीं, क्योंकि प्राइवेट बसों की हड़ताल के कारण उन्हें लौटने की जल्दी थी।
भीड़ और व्यापार दोनों ही आधे रह गए
प्रसाद विक्रेता सागरमल बाजिया ने बताया- पिछली बार के मुकाबले इस बार भीड़ और व्यापार दोनों ही आधे रह गए। व्यापारियों ने पिछले मेले के अनुमान से प्रसाद का स्टॉक किया था, लेकिन बिक्री कम होने से भारी नुकसान हुआ है। पिछली बार की तुलना में इस बार भक्तों की भीड़ लगभग 50 फीसदी कम रही।
बहुत आसानी से बाबा श्याम के दर्शन हुए
जयपुर के झालाना इलाके से आए श्रद्धालु कानाराम खटीक ने बताया- इस बार खाटू में भीड़ कम रही, क्योंकि लोगों ने अफवाहें फैला रखी है। लोग वीडियो बनाकर यह अफवाह उड़ा रहे हैं कि 30-35 किमी पैदल चलना पड़ेगा, जबकि खाटू में ऐसा कुछ नहीं है। इस बार कम पैदल चलना पड़ा और बहुत आसानी से बाबा श्याम के दर्शन हुए। अफवाहें उड़ने की वजह से ही लोग कम आए।

20 प्रतिशत माल भी नहीं बिक सका
खिलौने की दुकानदार शारदा सैन ने बताया- बच्चों के खिलौनों का 20 प्रतिशत माल भी नहीं बिक सका। रेहड़ी-ठेले वाले हेमराज ने बताया- दर्शन के बाद एग्जिट पॉइंट की गलियों में भी बिक्री नहीं हो रही है। बिक्री के लिए लाया गया माल ज्यों का त्यों पड़ा है।

मेला फीका रहने के 5 बड़े कारण
- 45 किमी. पैदल चलने की अफवाह: भास्कर की ग्राउंड पर पड़ताल में सामने आया कि मेले से पहले वायरल हुई रील्स में श्याम बाबा के दर्शन से पहले 45 किमी. पैदल चलने की बात कही गई, जिससे श्रद्धालुओं में एक डर बन गया। प्रशासन और मंदिर कमेटी इस भ्रम को दूर नहीं कर पाई।
- खाटू-जयपुर प्राइवेट बसों की हड़ताल: मेला शुरू होने के ठीक 2 दिन बाद खाटू से जयपुर आने-जाने वाली बसों की 23 फरवरी से हड़ताल हो गई। बस ऑपरेटरों का कहना था कि मेले के दौरान उन्हें जयपुर में सिंधी कैंप तक जाने की इजाजत मिलनी चाहिए, क्योंकि अभी हीरापुरा तक जाने की इजाजत है। जबकि श्रद्धालु सिंधी कैंप तक जाने की जिद करते हैं और ऐसा न करने पर मारपीट करते हैं।
- राजस्थान बोर्ड और CBSE बोर्ड परीक्षाएं: राजस्थान बोर्ड और सीबीएसई बोर्ड की परीक्षाएं चल रही हैं, जिसका असर खाटू मेले में भी देखने को मिला। परीक्षाओं के चलते न केवल छात्र, बल्कि उनके माता-पिता ने भी खाटू आने से परहेज किया।
- चारों पार्किंग की खाटू कस्बे से दूरी:खाटू आने वाले श्रद्धालुओं को अपने वाहन 4 पार्किंग स्थलों में खड़े करने पड़े। ये पार्किंग स्थल 52 बीघा, सांवलपुरा, श्याम पाठशाला (दांता रोड) और सीतारामपुरा (रेनवाल रोड) में बनाए गए। इन चारों पार्किंग स्थलों की खाटू कस्बे से दूरी 2 से 4 किलोमीटर तक है, जिसके चलते श्रद्धालुओं ने मेले की बजाय आम दिनों में खाटू आने को अधिक महत्व दिया।
- जगह-जगह रास्ते रोकना: खाटू में मेले के दौरान रुकने के लिए आने वाले भक्तों को जगह-जगह रोका जा रहा है। अत्यधिक बेरिकेडिंग के कारण श्रद्धालु रुकने की बजाय लगातार आगे बढ़ रहे हैं, जिससे मेले में भीड़ कम हो रही है।
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