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होली पर चिराना के चंग-ढप की भारी मांग:दूर-दराज से खरीदने आ रहे लोग, कीमत 250 रुपए से 500 रुपए तक


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होली पर चिराना के चंग-ढप की भारी मांग:दूर-दराज से खरीदने आ रहे लोग, कीमत 250 रुपए से 500 रुपए तक

होली पर चिराना के चंग-ढप की भारी मांग:दूर-दराज से खरीदने आ रहे लोग, कीमत 250 रुपए से 500 रुपए तक

चिराना : फाल्गुन की मस्ती और देशी धमाल में चंग व ढप का महत्वपूर्ण स्थान है। शेखावाटी क्षेत्र सहित पूरे राजस्थान में चिराना गांव के चंग व ढप अपनी गुणवत्ता के लिए प्रसिद्ध हैं। होली के अवसर पर इनकी मांग अत्यधिक बढ़ जाती है, जिसके चलते दूर-दराज से लोग इन्हें खरीदने चिराना आते हैं।

चिराना में चंग का घेरा बनाने का कार्य होली से एक महीने पहले ही शुरू हो जाता है। दौलत राम सैनी और सीताराम सैनी जैसे कई कारीगर विशेष रूप से आम की लकड़ी का उपयोग करते हैं, जो हल्की और मजबूत होने के कारण लंबे समय तक चलती है। ये घेरे 24 इंच से 32 इंच तक विभिन्न आकारों में बनाए जाते हैं, जिनकी कीमत 250 रुपये से 500 रुपये तक होती है।

चंग-ढप खरीदते लोग
चंग-ढप खरीदते लोग

लकड़ी के घेरे तैयार होने के बाद उन पर चमड़ा चढ़ाने का काम होता है। मूलचंद बाकोलिया, बाबूलाल बाकोलिया और रघुवीर बाकोलिया जैसे कारीगर कई वर्षों से यह कार्य कर रहे हैं। वे बताते हैं कि भेड़ की खाल को इस काम के लिए सबसे उत्तम माना जाता है। खाल को अच्छी तरह साफ करके घेरे पर चढ़ाकर सुखाया जाता है, जिसके बाद चंग बजाने के लिए तैयार हो जाता है। तैयार चंग की कीमत आकार के अनुसार 800 रुपये से 1300 रुपये तक होती है।

होली के नजदीक आते ही चंग की मांग और बढ़ जाती है। चिराना से ये चंग केवल शेखावाटी क्षेत्र ही नहीं, बल्कि राजस्थान के अन्य हिस्सों में भी निर्यात किए जाते हैं। इनकी प्रसिद्धि के कारण ही दूर-दराज के खरीदार विशेष रूप से चिराना आकर चंग और उनके घेरे खरीदते हैं।

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